पॉल्यूशन नहीं बिगाड़ पाएगा दिवाली का मजा ! रोज सुबह उठकर करें इन 5 आसनों का अभ्यास, फेफड़ों में आएगी नई जान

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Diwali Pollution Yoga for Lungs Protection: दिवाली के आसपास पॉल्यूशन काफी बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है. हालांकि अगर रोज सुबह कुछ आसान योगासन जैसे अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, उष्ट्रासन और भुजंगासन को अपने रूटीन में शामिल कर लें, तो आपके फेफड़े हेल्दी रहेंगे और सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होगी.

फेफड़ों को मजबूत करने के लिए अनुलोम-विलोम का अभ्यास करना चाहिए.

Diwali Pollution Yoga for Lungs Protection: दिवाली के त्योहार से पहले ही दिल्ली-एनसीआर में हवा की क्वालिटी भी काफी बिगड़ चुकी है. दिवाली के बाद पॉल्यूश में इजाफा होने की आशंका है. पटाखों का धुआं, गाड़ियों का प्रदूषण और ठंडी हवाओं में फैले कण फेफड़ों पर सीधा असर डालते हैं. पिछले साल दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 795 तक पहुंच गया था, जो हैजर्डस कैटेगरी में आता है. ऐसी हवा में सांस लेना हमारे फेफड़ों, दिल और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. अगर आप चाहें तो कुछ आसान योगासन और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर इस नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं. NIH की स्टडी में पाया गया है कि कुछ योगासन फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और सांस संबंधी दिक्कतों को कम करने में मदद करते हैं. तो आइए जानते हैं वो 5 योगासन जो दिवाली के त्योहार पर इसके बाद के पॉल्यूशन से आपके फेफड़ों को बचा सकते हैं.

अनुलोम-विलोम (Anulom vilom)

अनुलोम-विलोम सबसे आसान और असरदार प्राणायाम है. यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिपोर्ट बताती है कि यह न सिर्फ फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है बल्कि तनाव भी घटाता है. इसे करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका बंद करें और बायीं नासिका से सांस अंदर लें. अब अनामिका से बायीं नासिका बंद करके दाहिनी नासिका से सांस बाहर छोड़ें. यही एक राउंड पूरा होगा. इस प्रक्रिया को रोज कम से कम 10 मिनट तक करें. इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ेगा और सांस लेने की ताकत में सुधार होगा.

कपालभाति (Kapal bhati)

कपालभाति को फेफड़ों की सफाई के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है. NIH की रिसर्च के अनुसार यह फेफड़ों के रिसेप्टर्स को एक्टिव कर उनकी क्षमता बढ़ाता है. इसे करने के लिए गहरी सांस लें और फिर नाक से तेज सांस छोड़ें, साथ ही पेट को अंदर की ओर खींचें. सांस अंदर लेना अपने आप होगा. इस प्रक्रिया को 30-40 बार दोहराएं. इससे फेफड़ों में जमा धूल और टॉक्सिन्स बाहर निकलने में मदद मिलती है.

भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari)

भ्रामरी यानी गूंजती मधुमक्खी की आवाज की तरह सांस छोड़ना. NIH की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह फेफड़ों की वर्किंग को बेहतर बनाता है और सांस की थकान को कम करता है. इसे करने के लिए आराम से बैठें, आंखें बंद करें और अंगूठों से कान के पास की कार्टिलेज को हल्का दबाएं. गहरी सांस लें और फिर हम्म्म की आवाज के साथ धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें. दिन में 5 मिनट करने से दिमाग शांत होता है और फेफड़ों की ताकत बढ़ती है.

उष्ट्रासन (Camel Pose)

उष्ट्रासन करने से छाती और फेफड़े खुलते हैं, जिससे सांस लेना आसान होता है. स्टडीज के मुताबिक यह फेफड़ों की क्षमता और पीक एक्सपायरेटरी फ्लो को बढ़ाता है. इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठें, फिर दोनों हाथ कमर पर रखें. सांस लेते हुए छाती को ऊपर की ओर उठाएं और धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें. अगर संभव हो तो हाथों को एड़ी पर रखें. कुछ सेकंड इस स्थिति में रहें और फिर धीरे-धीरे वापिस आएं.

भुजंगासन (Cobra Pose)

भुजंगासन को छाती खोलने वाला आसन कहा जाता है. यह फेफड़ों में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाता है और ब्रीदिंग कैपेसिटी में सुधार करता है. पेट के बल लेट जाएं, हाथों को कंधों के नीचे रखें और कोहनी शरीर से सटी रहे. अब सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर और छाती को ऊपर उठाएं. कुछ देर रोककर वापस लेट जाएं. यह आसन फेफड़ों की मसल्स को मजबूत बनाता है.

रोज कैसे करें इनका अभ्यास?

इन आसनों को रोज सुबह खुले और साफ वातावरण में करना सबसे अच्छा होता है, लेकिन दिवाली के बाद जब हवा में पॉल्यूशन ज्यादा हो, तो इन्हें घर के अंदर, किसी हवादार जगह पर करें. शुरुआत में कम समय से शुरू करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं. अगर आपको सांस या हार्ट से जुड़ी कोई परेशानी है, तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें

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