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How To Use Kachnar Plant : कचनार एक ऐसी खास जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल पाइल्स, खांसी, दस्त, पेचिश, ब्लीडिंग, अपच, मलेरिया, गले में खराश, टीबी आदि के उपचार में किया जाता है. इसके अलावा अल्सर, मोटापा और कीड़े के उपचार में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
कचनार का पेड़ हमें अक्सर अपने आसपास लगा दिख जाता है. इस पौधे का वैज्ञानिक नाम Bauhinia variegata कहते हैं. देखने में भी यह काफी अधिक आकर्षक होता है. इसके पत्ते दिल के आकार के होते हैं. इसके साथ ही साथ यह एक बहुत महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है. यह एक दो नहीं बल्कि तमाम रोगों में कारगर साबित होता है.

कचनार के पौधों के औषधीय गुण व उसके उपयोग के तरीकों पर लोकल 18 से बातचीत के दौरान पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर आदित्य पांडे ने बताया की सामान्य से नजर आने वाला यह पौधा किसी दुर्लभ जड़ी बूटी से काम नहीं है. यह थायराइड, त्वचा रोग और महिलाओं संबंधी रोगों के लिए यह ‘संजीवनी’ से कम नहीं है.

इसे इस्तेमाल करने के कई तरीके हैं. लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करते हुए इसे पांच तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं. कचनार की कलियों की भुजिया बनाकर खाना उत्तर भारत में सबसे आम है. इसके साथ ही साथ इसका काढ़ा बनाकर भी इसे इस्तेमाल कर सकते हैं. वही इस चरण या फिर गुलकंद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए यह पौधा किसी संजीवनी बूटी से काम नहीं है. मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्त स्त्राव को नियंत्रित करने से लेकर हार्मोन संतुलन में यह काफी मददगार साबित होता है. इसके लिए कचनार की छाल या फिर उसके फूलों को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाकर पिया जा सकता है.

डॉ आदित्य पांडे बताते हैं कि वैसे तो आयुर्वेद को अपने दिनचर्या में शामिल करना एक स्वस्थ जीवन शैली का निर्माण करता है. लेकिन किसी भी गंभीर बीमारी में आयुर्वेदिक औषधियां का इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदाचार्य की सलाह अत्यंत आवश्यक है.