शंख बजाने से दूर हो सकती है खर्राटों की समस्या ! सेहत को मिलेंगे अनगिनत फायदे, नई स्टडी में हुआ खुलासा

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Benefits of Blowing Shankh: एक हालिया स्टडी में पाया गया है कि शंख बजाने से खर्राटों की समस्या से राहत मिल सकती है. शंख बजाने से गले की मांसपेशियां मजबूत हुईं, खर्राटे कम हुए और नींद की गुणवत्ता में सुधार देखा …और पढ़ें

शंख बजाने से दूर हो सकती है खर्राटों की समस्या ! सेहत को मिलेंगे अनगिनत फायदेशंख बजाने से स्लीप एप्निया से राहत मिल सकती है.
Shankh Bajane Ke Fayde: हिंदू धर्म में शंख का विशेष महत्व माना गया है. पूजा-पाठ में अक्सर शंख बजाया जाता है. आयुर्वेद में शंख बजाना सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना गया है. समय के साथ शंख का चलन कम हो गया है, लेकिन एक नई स्टडी में शंख को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक डॉक्टर ने शंख को लेकर स्टडी की है, जिसमें पता चला है कि रोज कुछ देर शंख बजाने से खर्राटों की समस्या यानी स्लीप एप्निया से राहत मिल सकती है. इससे गले की मसल्स मजबूत होती हैं और नींद की क्वालिटी में भी सुधार आ जाता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्लीप एप्निया नींद से जुड़ी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की सांसें सोते समय बार-बार रुक जाती हैं. यह तब होता है जब गले की मांसपेशियां बहुत ज्यादा ढीली हो जाती हैं, जिससे सांस की नली बंद हो जाती है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. जयपुर के डॉक्टर राजीव गुप्ता ने इस बीमारी से जूझ रहे एक 42 वर्षीय मरीज को दिन में दो बार शंख बजाने की सलाह दी. एक साल के भीतर मरीज की खर्राटों की समस्या कम हुई, दिन में नींद आना घटा और गले की मांसपेशियां मजबूत हो गईं. उन्होंने कई मरीजों पर शंख बजाने से मिले फायदों को देखकर रिसर्च करने का फैसला किया.
पहले से मौजूद कई रिसर्च में पता चला है कि सैक्सोफोन जैसे वाद्य यंत्र बजाने से नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है. इसी आधार पर उन्होंने यह अनुमान लगाया कि शंख बजाना भी स्लीप एप्निया में कारगर हो सकता है. उनका यह अध्ययन यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल ओपन रिसर्च में प्रकाशित हुआ है और इसे स्लीप एप्निया के लिए सीपीएपी मशीन जैसी महंगी व जटिल तकनीकों का सस्ता विकल्प माना जा रहा है.

डॉ. गुप्ता और उनकी टीम ने 30 मरीजों को दो समूहों में बांटा. पहले समूह के 14 मरीजों को दिन में दो बार शंख बजाने का अभ्यास कराया गया, जबकि दूसरे समूह के 16 मरीजों को केवल डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने को कहा गया. छह महीने बाद शंख बजाने वाले समूह की नींद की गुणवत्ता में 34% सुधार देखा गया. उनकी दिन की नींद कम हुई, ऑक्सीजन लेवल बेहतर हुआ और शरीर में ऑक्सीजन की कमी का स्तर 4.4 अंकों तक घटा. इसके अलावा 30% लोगों की नींद की आदतें सुधरीं.

शंख बजाना केवल एक धार्मिक या पारंपरिक क्रिया नहीं है, बल्कि इसमें वैज्ञानिक पहलू भी हैं. जब हम गहरी सांस लेकर शंख में फूंकते हैं, तो इससे गले और जीभ की मांसपेशियों पर दबाव बनता है. यह प्रक्रिया थ्रोट मसल्स को मजबूत बनाती है और स्लीप एप्निया में होने वाले गले के संकुचन को रोकती है. इसके अलावा यह अभ्यास आसान है और दिन में दो बार कुछ मिनटों के लिए किया जा सकता है, जबकि सीपीएपी मशीन का इस्तेमाल करना कई मरीजों के लिए असहज होता है.

अध्ययन में केवल 30 मरीज शामिल थे, लेकिन रिसर्चर्स ने बताया कि उन्होंने शंख की तकनीक कई अन्य मरीजों पर भी आजमाई है, जो सीपीएपी मशीन का उपयोग नहीं कर पा रहे थे. उन्होंने पाया कि ऐसे मरीज 4 साल तक बिना मशीन के रह पाए और उनकी नींद में भी सुधार हुआ. यह दर्शाता है कि शंख बजाना न केवल एक वैकल्पिक उपाय है, बल्कि यह लंबे समय तक कारगर भी हो सकता है. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर किए गए ट्रायल्स में भी प्रभावी साबित होती है, तो यह स्लीप एप्निया से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए एक सस्ती, सुरक्षित और घरेलू चिकित्सा बन सकती है.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. …और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. … और पढ़ें

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