Pitru Paksha गर्भ में मृत्यु हो जाने पर क्या बच्चे का श्राद्ध करना चाहिए ? शास्त्र क्या कहता है

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं. 7 सितंबर से श्राद्ध पक्ष आरंभ हो जाएंगे. मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं. कहा जाता है कि इस अवधि में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता हैं, पितृ दोष दूर होता है.

लोगों को बड़े-बुजुर्गों के श्राद्ध के नियम तो पता होते हैं लेकिन कई बार ये सवाल उठता है कि जिन बच्चों की मृत्यु गर्भ में ही हो गई हो क्या उनका श्राद्ध किया जाता है ? जन्म लेने के बाद किस उम्र तक के बच्चों का श्राद्ध शास्त्रसम्मत है आइए जानते हैं.

गर्म में संतान की मृत्यु होने पर उसका श्राद्ध करें या नहीं ?

कई बार गर्भावस्था के दौरान किसी कारणवश संतान की मृत्यु हो जाती है तो शास्त्रों के अनुसार उसका श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है. अजन्मी संतान की आत्मा की शांति मलिन षोडशी परंपरा का निर्वहन किया जाता है.

मलिन षोडशी हिंदू धर्म में मृत्युपरांत किया जाने वाला एक अनुष्ठान है, जो मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति और परिवार को अशुभ प्रभाव से बचाने के लिए किया जाता है. मलिन षोडशी क्रिया मृत्यु से अंतिम संस्कार तक के समय में की जाती है.

किस उम्र तक के बच्चों का नहीं होता श्राद्ध ?

वहीं जो बच्चे जन्म के बाद मृत्यु को प्राप्त हुए हैं उन बच्चों के श्राद्ध के नियम बच्चे की मृत्यु की उम्र पर निर्भर करते हैं. नवजात शिशु से 2 वर्ष से कम उम्र के बालक का कोई श्राद्ध नहीं होता इनकी भी मलिन षोडशी होती है और तर्पण किया जाता है क्योंकि पारंपरिक श्राद्ध कर्म इनके लिए नहीं किया जाता है. इन बच्चों का श्राद्ध और वार्षिक क्रिया नहीं होती है.

किस तिथि पर होता है बच्चों का श्राद्ध ?

पितृपक्ष में 6 साल से बड़े बच्चे की मृत्यु तिथि पर ही उसका श्राद्ध किया जाता है, लेकिन तिथि ज्ञान न होने पर त्रयोदशी पर पूर्ण विधि विधान से किया गया श्राद्ध बच्चों की मृतात्मा को प्राप्त होता है. अगर तिथि ज्ञात ना हो तो त्रयोदशी तिथि में ही तर्पण करना चाहिए.इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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