खेती के लिए छोड़ी पायलट की नौकरी, एक बच्चे ने मोड़ दी जिंदगी की कहानी

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Khargone News: राघव शरद देवस्थले ने लोकल 18 को बताया कि उनके मन को खेती की ओर मोड़ने वाली घटना उत्तराखंड में घटी. वहां उन्होंने एक बच्चे से पूछा कि उसके पिता क्या व्यवसाय करते हैं लेकिन बच्चा यह कहने में हिचकिचा रहा था कि उसके पिता किसान हैं.

खरगोन. आज के समय में हर युवा विदेश जाकर बेहतर करियर और मोटा पैकेज पाना चाहता है जबकि मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के ग्राम मातमुर के राघव शरद देवस्थले ने अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मिले लाखों के पैकेज वाली नौकरी ठुकरा दी और गांव आकर खेती को अपना लिया. आज वह गांव में रहकर तुलसी, लेमन ग्रास और अमाड़ी की भाजी जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं और इन्हीं से अपने ब्रांडेड प्रोडक्ट बनाकर सालाना लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं.

राघव शरद देवस्थले मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. कक्षा 12वीं के तुरंत बाद ही अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने पायलट की ट्रेनिंग ली. वहां उन्हें अच्छी नौकरी का ऑफर भी मिला लेकिन उन्होंने करियर की चमक-दमक को छोड़कर भारत लौटने का फैसला लिया. परिवार से सक्षम थे, चाहते तो कोई बड़ा व्यापार कर सकते थे लेकिन उन्होंने खेती करने का मन बनाया. उन्होंने पारंपरिक फसलों की जगह कुछ नया ट्राई किया.

खेती के साथ बनाते हैं खुद के प्रोडक्ट
करीब 7 साल पहले खरगोन की पर्यटन नगरी महेश्वर के पास मातमुर गांव में उन्होंने तुलसी, लेमन ग्रास और अमाड़ी से खेती शुरू की. इसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा. उत्पादन मिलने पर वह फसल को सोलर ड्रायर से सुखाते हैं और फिर उससे वैल्यू एडिशन वाले प्रोडक्ट तैयार करते हैं. आज उनकी यूनिट से लेमन टी, ट्राइबल टी मसाला, चाट मसाला, हाइड्रेट लाल अमाड़ी और धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनते हैं. इनकी स्थानीय बाजारों से लेकर अन्य जिलों तक अच्छी मांग है. वह अपने उत्पादन ऑनलाइन भी बेचते हैं. इससे उन्हें खेती से कई गुना ज्यादा आय होने लगी है.

यहां से मिली खेती की प्रेरणा
राघव लोकल 18 को बताते हैं कि उनके मन को खेती की ओर मोड़ने वाली घटना उत्तराखंड में घटी. वहां उन्होंने एक बच्चे से पूछा कि उसके पिता क्या करते हैं लेकिन बच्चा यह कहने में हिचकिचा रहा था कि उसके पिता किसान हैं. इसी बात ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर किया. उन्हें लगा कि अगर किसान समृद्ध और आत्मनिर्भर होंगे, तभी उनके बच्चे गर्व से खुद को किसान का बेटा कह पाएंगे. इसी सोच के साथ उन्होंने कम जमीन में खेती में नए प्रयोग करने शुरू किए. आज राघव देवस्थले न केवल सफल किसान बन चुके हैं बल्कि वह युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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