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34 मिनट पहले
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खाना खाने के बाद डकार आना कॉमन बात है। बड़े-बूढ़े कहते हैं कि यह पेट भरने का संकेत है, लेकिन क्या सच में ऐसा ही होता है? सवाल ये है कि डकार क्यों आती है, क्या इसके पीछे शरीर का कोई संकेत छिपा है?
कभी-कभी डकार आना सामान्य है, लेकिन बार-बार या बहुत ज्यादा डकार अपच, गैस या एसिडिटी जैसी परेशानियों का संकेत भी हो सकती है। क्या यह हमारी सेहत के बारे में कुछ बताती है?
इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज जानेंगे कि डकार क्यों आती है। साथ ही जानेंगे कि-
- क्या डकार किसी बीमारी का संकेत है?
- ज्यादा डकार आए तो कैसे कंट्रोल करें?
सवाल- खाना खाने के बाद हम डकार लेते हैं। बड़े-बूढ़े कहते हैं कि यह पेट भरने का मैसेज है। लेकिन क्या ये बात सही है? डकार एक्चुअली क्या है?
जवाब- खाना खाने के बाद डकार आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। जब हम खाते या पीते हैं, तो खाने के साथ कुछ हवा भी पेट में चली जाती है। यह हवा पेट में दबाव बनाती है और शरीर उसे मुंह के रास्ते बाहर निकाल देता है, इसे ही डकार कहते हैं।
डकार का मतलब पेट भरना नहीं होता, बल्कि यह पेट में जमा अतिरिक्त हवा के निकलने का संकेत है। जल्दी-जल्दी खाना, ज्यादा बात करते हुए खाना, ठंडे या कार्बोनेटेड ड्रिंक पीना और च्युइंगम चबाना डकार की संभावना बढ़ा देता है। अगर डकार बहुत ज्यादा आए, जलन या दर्द के साथ हो, तो यह एसिडिटी या पाचन समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में खानपान और आदतों पर ध्यान देना जरूरी होता है।
सवाल- डकार क्यों आती है?
जवाब- इन कारणों से आती है डकार-
- अगर खाना खाते समय हवा निगल ली है। यह अक्सर जल्दबाजी में खाने, बात करते हुए खाने से होता है।
- कोई ड्रिंक या च्युइंगम चबाते समय भी हवा भोजन नली में चली जाती है।।
- यह हवा पेट और भोजन नली में दबाव बनाती है।
- डकार हवा को मुंह के रास्ते बाहर निकालने का तरीका है।

सवाल- अगर खाना खाने के बाद डकार आए तो इससे हमारे पेट और डाइजेशन के बारे में क्या पता चलता है?
जवाब- खाना खाने के बाद डकार का मतलब है कि खाते समय भोजन नली में हवा चली गई है। इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।
अगर बार-बार डकार आ रही है और साथ में पेट में भारीपन है, जलन है तो यह एसिडिटी या गैस का संकेत हो सकता है। यह पाचन तंत्र में किसी कमी का भी संकेत हो सकता है।
सवाल– डकार आना हमारी ओवरऑल सेहत के बारे में क्या बताता है?
जवाब- डॉ. जी. एस. लांबा कहते हैं कि डकार आना आमतौर पर हमारी पाचन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत नहीं होती है।
हल्की डकार का मतलब है कि पाचन सामान्य है, लेकिन बार-बार डकार, पेट में दर्द, जलन या अपच के साथ हो तो यह गैस, एसिडिटी या पाचन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। डकार का पैटर्न, खाने-पीने की आदतें और अन्य लक्षण मिलाकर ही हमारी ओवरऑल सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सवाल- क्या डकार आने का मतलब ये है कि शरीर के अंदर टॉक्सिन्स हैं?
जवाब- डॉ. जी. एस. लांबा कहते हैं कि डकार आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि शरीर में टॉक्सिन्स जमा हैं।
यह पाचन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। टॉक्सिन्स शरीर से लिवर, किडनी और पसीने के जरिए बाहर निकलते हैं, डकार से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए डकार को किसी स्वास्थ्य समस्या या टॉक्सिन लेवल का संकेत मानना ठीक नहीं है।
सवाल- अगर बहुत ज्यादा या बार-बार डकार आए तो इसका मतलब क्या है?
जवाब- अगर बहुत ज्यादा या बार-बार डकार आती है, तो यह आमतौर पर पेट या पाचन में किसी असुविधा का संकेत हो सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण गैस बनना, एसिडिटी, अपच या बहुत जल्दी और ज्यादा हवा निगलना हो सकता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक, च्युइंगम, जल्दी-जल्दी खाना या तनाव के कारण भी डकार आ सकती है।
कभी-कभी यह पेट या भोजन नली की सूजन या पाचन समस्या का भी संकेत हो सकता है।

सवाल- क्या बार-बार डकार आना पेट की किसी बीमारी का संकेत है?
जवाब- डॉ. जी. एस. लांबा कहते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है। डकार आना बेहद कॉमन है, यह समस्या का संकेत नहीं होती है। यह पेट में गैस बनने या हवा ज्यादा निगलने (एरोफेजिया) की वजह से होता है। अगर इसके साथ सीने में जलन, पेट में दर्द, सूजन या खट्टी डकार आएं तो यह एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्या का संकेत हो सकता है।
सवाल- क्या डकार का लिवर, किडनी या गट हेल्थ से कोई संबंध है?
जवाब- डकार का लिवर या किडनी से सीधे कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद आंतों में बैक्टीरिया के असंतुलन, भोजन के सही तरीके से न पचने या ज्यादा गैस बनने से डकार बढ़ सकती है।
लिवर का काम पित्त बनाकर फैट पचाने में मदद करना होता है। इसलिए लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर भी पाचन गड़बड़ हो सकता है।

सवाल- खट्टी या बदबूदार डकार किस बात का संकेत है?
जवाब- डकार कई तरह की हो सकती है। सभी प्रकार और उनसे जुड़े सेहत के संकेत देखिए-
खट्टी डकार (सॉर बेल्चिंग)
- एसिड रिफ्लक्स या एसिडिटी का संकेत हो सकती है।
- मसालेदार, तला-भुना या भारी खाना इसकी वजह बन सकता है।
बदबूदार डकार (फाउल स्मेल बेल्चिंग)
- खराब डाइजेशन या पेट में इंफेक्शन का संकेत हो सकती है।
- ज्यादा प्रोटीन या बासी भोजन खाने से भी हो सकती है।
खाने के तुरंत बाद डकार
- ओवरईटिंग या जल्दी खाना खाने की आदत का संकेत।
- कमजोर डाइजेशन से भी जुड़ा हो सकता है।
सड़े अंडे जैसी डकार (सल्फर बेल्चिंग)
- पेट में बैक्टीरियल इंफेक्शन या फूड पॉइजनिंग का संकेत।
- कुछ मामलों में इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) से जुड़ी हो सकती है।
खाली पेट डकार
- गैस्ट्राइटिस या पेट में ज्यादा एसिड बनने का संकेत।
- लंबे समय तक भूखे रहने से भी ऐसा हो सकता है।
तेज आवाज वाली डकार
- ज्यादा हवा निगलने या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पीने से हो सकती है।
- च्यूइंग गम या स्ट्रॉ से ड्रिंक पीना भी वजह बन सकता है।
उल्टी जैसे टेस्ट वाली डकार
- एसिड रिफ्लक्स या गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का संकेत हो सकती है।
- इसके साथ सीने में जलन महसूस हो सकती है।
मीठे या अजीब स्वाद वाली डकार
- स्लो डाइजेशन या कुछ खास फूड के रिएक्शन से जुड़ी हो सकती है।
- पेट में फर्मेंटेशन बढ़ने से भी ऐसा हो सकता है।
सवाल- एयरोफेजिया क्या होता है और इसका डकार से क्या संबंध है?
जवाब- एयरोफेजिया एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें हम अनजाने में ज्यादा हवा निगल लेते हैं। यह आमतौर पर जल्दी खाना, बहुत बात करते हुए खाना, च्युइंगम चबाना या कार्बोनेटेड ड्रिंक पीने से होता है। जब पेट में अतिरिक्त हवा जमा होती है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए डकार करता है।
इसलिए एयरोफेजिया और डकार का सीधा संबंध है। डकार इस अतिरिक्त हवा को बाहर निकालने का प्राकृतिक तरीका है। सामान्य रूप से यह नुकसानदेह नहीं है, लेकिन बार-बार डकार, पेट में भारीपन या असुविधा होने पर खाने की आदतें बदलना और डॉक्टर से सलाह लेना मददगार होता है।
सवाल- ज्यादा डकार आए तो कैसे कंट्रोल करें?
जवाब- अगर लगातार डकार आ रही है तो तुरंत कंट्रोल करने के लिए करें ये आसान उपाय-
- पीठ सीधी करके बैठें या कुछ देर खड़े रहें, झुककर बैठने या लेटने से गैस ऊपर की ओर आ सकती है।
- धीरे-धीरे गुनगुना पानी पीने से पेट में फंसी गैस आसानी से निकल जाती है और डकार कम हो जाती है।
- 5-10 मिनट हल्की वॉक करने से पाचन तेज होता है और गैस बनना बंद हो जाती है।
- गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे छोड़ने से पेट की मसल्स रिलैक्स होती हैं, जिससे डकार कम हो सकती है।
- इसके अलावा सौंफ या अजवाइन चबाने से गैस और अपच में राहत मिलती है।
- अगर डकार के साथ सीने में जलन या दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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