फिजिकल हेल्थ- बार-बार पेशाब आना बीमारी का संकेत: ये 7 लक्षण दिखें तो न करें इग्नोर, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

39 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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अक्सर कुछ लोग बार-बार पेशाब आने की समस्या से परेशान रहते हैं। मेडिसिन की भाषा में इसे ‘फ्रीक्वेंट यूरिनेशन’ कहा जाता है। कई बार इसकी वजह सिर्फ ज्यादा पानी पीना या दवाओं का असर होता है। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है।

इस समस्या की वजह से ऑफिस में बैठना और रातों की नींद तक हराम हो जाती है। वहीं कुछ लोग तो इसके डर से पानी पीना कम कर देते हैं, जिससे उन्हें डिहाइड्रेशन समेत कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि सही समय पर जांच और इलाज से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

तो चलिए, आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में हम फ्रीक्वेंट यूरिनेशन के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • फ्रीक्वेंट यूरिनेशन के क्या कारण हैं?
  • इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है?

फ्रीक्वेंट यूरिनेशन के कारण

यह समस्या उम्र, लिंग, लाइफस्टाइल और हेल्थ कंडीशन सभी पर निर्भर होती है। कई बार यह सिर्फ एक सामान्य आदत या अस्थायी कारण से होती है। लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

आइए, अब इन कारणों को विस्तार से समझते हैं।

डायबिटीज

शरीर में जब ब्लड शुगर लेवल ज्यादा हो जाता है तो किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को यूरिन के जरिए बाहर निकालने लगती है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों को बार-बार पेशाब जाने की शिकायत रहती है।

ओवरएक्टिव ब्लैडर

इस स्थिति में ब्लैडर पूरी तरह भरा न होने पर भी भी बार-बार पेशाब की जरूरत महसूस होती है और कई बार इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।

जरूरत से ज्यादा लिक्विड लेना

अगर एक बार में बहुत ज्यादा पानी पी लिया जाए तो बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस हो सकती है। कैफीन और अल्कोहल जैसे ड्रिंक्स से भी यूरिन की फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)

इस स्थिति में मूत्राशय (bladder) या मूत्रमार्ग (urethra) में सूजन हो जाती है। इसके कारण बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है। अक्सर इसमें जलन और असहजता भी होती है। हालांकि समय पर इलाज से राहत मिल सकती है।

किडनी इन्फेक्शन

किडनी में इन्फेक्शन होने पर यूरिन की फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है। इसके साथ पीठ या कमर में दर्द, तेज बुखार, मतली और उल्टी जैसी शिकायतें भी होती हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

प्रेग्नेंसी

महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ता गर्भाशय ब्लैडर पर दबाव डालता है, जिससे बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है। पहली और तीसरी तिमाही में यह समस्या ज्यादा होती है।

दवाओं का असर

कुछ दवाइयां जैसे हाई ब्लड प्रेशर या इंफ्लेमेशन के इलाज में दी जाने वाली दवाएं, पेशाब की मात्रा बढ़ा सकती हैं।

प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं

पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यूरिनरी ट्रैक्ट पर दबाव डालता है, जिससे बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है।

ब्लैडर स्टोन या ट्यूमर

ब्लैडर में स्टोन या ट्यूमर यूरिनरी सिस्टम में दबाव पैदा कर सकते हैं, जिससे पेशाब बार-बार आता है। कई बार पेशाब करते समय दर्द या जलन भी महसूस होती है।

स्ट्रेस और एंग्जाइटी

स्ट्रेस और एंग्जाइटी नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं और ब्लैडर की मांसपेशियों को बार-बार सिकोड़ सकते हैं। इससे फ्रीक्वेंट यूरिनेशन की समस्या हो सकती है।

फ्रीक्वेंट यूरिनेशन के साथ दिख सकते हैं ये लक्षण

बार-बार पेशाब आना हमेशा अकेली समस्या नहीं होती है। कई बार इसके साथ कुछ और लक्षण भी नजर आते हैं, जो किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। अगर फ्रीक्वेंट यूरिनेशन के साथ नीचे बताए गए लक्षण भी महसूस हों तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

फ्रीक्वेंट यूरिनेशन का इलाज

इसका इलाज मूल कारण पर निर्भर करता है। अगर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन या किडनी में इन्फेक्शन का पता चलता है तो इसके लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। डायबिटीज होने पर दवा, खानपान और एक्सरसाइज के जरिए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल किया जाता है।

इसके अलावा ओवरएक्टिव ब्लैडर के लिए दवाएं दी जाती हैं। ब्लैडर को ज्यादा देर तक पेशाब रोकने का अभ्यास करवाने की तकनीकें मददगार हो सकती हैं। प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं के लिए दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामलों में बढ़े हुए प्रोस्टेट या अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए सर्जिकल प्रक्रियाओं की जरूरत हो सकती है।

फ्रीक्वेंट यूरिनेशन से जुड़े कुछ आम सवाल और जवाब

सवाल- फ्रीक्वेंट यूरिनेशन की जांच कैसे की जाती है?

जवाब- इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले यूरिन पैटर्न, समय, मात्रा और अन्य लक्षण जैसे जलन, दर्द, प्यास व बीमारियां और दवाओं के बारे में पूछते हैं। इसके अलावा कुछ जांच भी करा सकते हैं, जिसके आधार पर वह इलाज करते हैं। जैसेकि-

यूरिन टेस्ट: यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, ब्लड शुगर या प्रोटीन की मौजूदगी की जांचने के लिए।

ब्लड टेस्ट: डायबिटीज, किडनी फंक्शन और अन्य मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स की जांच के लिए।

इमेजिंग टेस्ट: किडनी, ब्लैडर और प्रोस्टेट में कोई समस्या, स्टोन या ट्यूमर का पता लगाने के लिए।

सिस्टोस्कोपी: एक पतली ट्यूब और कैमरे की मदद से ब्लैडर के अंदरूनी हिस्से की सीधी जांच की जाती है, जिससे चोट, सूजन या ट्यूमर का पता चलता है।

यूरोडायनेमिक स्टडी: ब्लैडर की क्षमता और पेशाब के फ्लो को मापने के लिए।

प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट: पुरुषों में प्रोस्टेट की स्थिति जांचने के लिए।

सवाल- एक स्वस्थ व्यक्ति को आमतौर पर एक दिन में कितनी बार यूरिन पास करने की जरूरत होती है?

जवाब- यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सिंह सोमवंशी बताते हैं कि आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क को दिन में 4 से 8 बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस हो सकती है। वहीं रात में आमतौर पर एक बार या कभी-कभी दो बार भी हो सकती है। अगर ये संख्या लगातार बहुत ज्यादा या कम हो रही हो तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

सवाल- फ्रीक्वेंट यूरिनेशन से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- इस समस्या से बचने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसेकि-

  • पानी या कैफीन का सेवन संतुलित मात्रा में करें। शराब बिल्कुल भी न पिएं।
  • ब्लैडर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए कीगल एक्सरसाइज करें।
  • स्ट्रेस और एंग्जाइटी को कम करने के लिए योग और ध्यान करें।

सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है?

जवाब- अगर समस्या ज्यादा समय तक बनी रहती है या इसके साथ दर्द, पेशाब में खून, बुखार या अन्य चिंताजनक लक्षण होते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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