फिजिकल हेल्थ- क्या मसल्स में रहता है दर्द: हो सकता है मायल्जिया, इन 8 संकेतों से पहचानें, डॉक्टर से जानें मैनेजमेंट के 9 टिप्स

43 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

क्या कभी आपने बिना किसी खास वजह के शरीर में दर्द महसूस किया है। मांसपेशियों में ऐसा दर्द, जैसे बहुत भारी काम किया हो, जबकि असल में ऐसा कुछ किया ही न हो। इस तरह के मसल्स पेन को मायल्जिया (Myalgia) कहा जाता है। यह दर्द कभी हल्का होता है तो कभी इतना बढ़ जाता है कि रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लगने लगते हैं।

अक्सर लोग इसे सामान्य थकान, हल्के खिंचाव या मौसम के बदलने का असर समझकर इग्नोर कर देते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिसर्च बताती है कि कोविड-19 संक्रमण भी इसका एक बड़ा कारण हो सकता है। इसके अलावा रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस जैसी गंभीर बीमारियां और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी मायल्जिया की वजह बन सकते हैं।

तो चलिए, आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में हम मायल्जिया के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • मायल्जिया के क्या लक्षण हैं?
  • इसे मैनेज करने के क्या उपाय हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- मायल्जिया क्या है?

जवाब- मायल्जिया का मतलब है, मांसपेशियों में दर्द। यह दर्द कभी एक जगह पर होता है (जैसे कंधे या जांघ में) तो कभी पूरे शरीर में फैल जाता है। यह कोई खास बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है, जो कई कारणों से हो सकता है। जिम में ज्यादा मेहनत, फ्लू या कोई चोट के कारण भी मायल्जिया परेशान कर सकता है। यह दर्द हल्का हो सकता है और इतना तेज भी कि काम करना मुश्किल हो जाता है।

सवाल- मायल्जिया क्यों होता है?

जवाब- मायल्जिया ज्यादातर मामलों में बहुत भारी काम करने से होता है। ज्यादा वर्कआउट करने से भी मसल्स डैमेज हो सकती हैं। इसके कई और भी कारण हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

आइए, अब इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं।

ज्यादा मेहनत से होने वाला दर्द

अगर आपने जिम में नया वर्कआउट शुरू किया है या भारी सामान उठाया है तो मांसपेशियों में दर्द होना सामान्य बात है। इसे डिले ऑनसेट मसल सोरनेस (DOMS) कहा जाता है। यह दर्द आमतौर पर 6–12 घंटे बाद महसूस होता है और लगभग 48 घंटे तक बना रह सकता है। यह इसलिए होता है क्योंकि मेहनत के दौरान मांसपेशियों में हल्की टूट-फूट होती है। यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया है।

चोट से मायल्जिया

खेलते समय या गिरने से मांसपेशियों में चोट लग सकती है। यह दर्द उसी जगह होता है, जहां चोट लगी हो। ऐसी चोट का दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन अगर ज्यादा हो तो बिना देर किए अपने डॉक्टर को दिखाएं।

वायरल संक्रमण

फ्लू, कोविड-19 या दूसरी वायरल बीमारियों से भी पूरे शरीर में दर्द हो सकता है। वायरस मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं, जिससे थकान और दर्द होता है। यह दर्द आमतौर पर बीमारी ठीक होने पर चला जाता है।

दवाओं का साइड इफेक्ट

कुछ दवाएं (जैसे कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टैटिन्स) भी मायल्जिया का कारण बन सकती हैं। अगर आपको लगता है कि दवा लेने के बाद दर्द शुरू हुआ है तो डॉक्टर से बात करें।

बीमारियों से दर्द

फाइब्रोमायल्जिया, रूमेटॉइड आर्थराइटिस या ल्यूपस जैसी बीमारियां भी मायल्जिया का कारण हो सकती हैं। ये बीमारियां लंबे समय तक दर्द पैदा कर सकती हैं।

तनाव का असर

मानसिक तनाव या स्ट्रेस भी मांसपेशियों में खिंचाव ला सकता है। जब आप तनाव में होते हैं तो मांसपेशियां सख्त हो सकती हैं, जिससे दर्द शुरू हो जाता है।

डेफिशिएंसी

शरीर में विटामिन–D, B-12 और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी मायल्जिया का कारण बन सकती है। समय रहते इसका पता लगाकर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट और डाइट लेना जरूरी है।

सवाल- मायल्जिया के क्या लक्षण हैं?

जवाब- मायल्जिया का दर्द हर बार एक जैसा नहीं होता है। इसमें कभी हल्का खिंचाव जैसा लगता है तो कभी इतना तेज दर्द होता है कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है। दर्द शरीर के एक हिस्से में या पूरे शरीर में फैल सकता है। इसके साथ थकान, कमजोरी और कुछ मामलों में बुखार या जोड़ों में सूजन भी हो सकती है।

सवाल- मायल्जिया को मैनेज करने के तरीके

जवाब- मायल्जिया को मैनेज करना इसके कारण पर निर्भर करता है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं-

आइए, इन पॉइंट्स के बारे में विस्तार से बात करते हैं।

मसल्स को आराम

सबसे आसान तरीका है मांसपेशियों को आराम देना। ज्यादा मेहनत करने से बचें और मांसपेशियों को रिकवरी का समय दें। इससे दर्द अपने आप कम हो सकता है।

सिंकाई का कमाल

चोट लगने के तुरंत बाद ठंडी सिंकाई करें, यह सूजन को कम कर सकती है। कुछ दिनों बाद गर्म सिंकाई से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं। सिंकाई दर्द को तेजी से कम करने में मददगार है।

पेनकिलर दवाएं

पेनकिलर दवाएं दर्द और सूजन को कम कर सकती हैं। हालांकि किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर के सलाह के न करें।

स्ट्रेचिंग और हल्का व्यायाम

हल्की स्ट्रेचिंग मांसपेशियों को लचीला रखती है और दर्द को कम करती है। हालांकि अगर आप नए हैं तो किसी योग गुरु या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।

दर्द बढ़े तो डॉक्टर से सलाह लें

अगर दर्द लंबे समय तक रहे या बहुत तेज हो तो डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर ब्लड टेस्ट या दूसरी जांच करके सही कारण और इलाज बता सकते हैं। गंभीर मामलों में फिजियोथेरेपी या इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।

सवाल- क्या मायल्जिया हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत होता है?

जवाब- नहीं, कई बार मायल्जिया ओवरवर्क, एक्सरसाइज या स्ट्रेन से होता है और कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। अगर दर्द लगातार रहे, साथ में बुखार या सूजन हो तो यह रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारी का संकेत हो सकता है।

सवाल- मायल्जिया और सामान्य मसल्स पेन में क्या फर्क है?

जवाब- ऑर्थोपेडिक्स डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल बताते हैं कि सामान्य मसल्स पेन थोड़े समय के लिए होता है और आमतौर पर मेहनत या चोट से होता है। जबकि मायल्जिया में दर्द बिना वजह बार-बार या लंबे समय तक रहता है। अगर दर्द कुछ दिनों में नहीं घटता या रोजमर्रा के कामों पर असर डाल रहा है तो यह मायल्जिया हो सकता है।

सवाल- क्या मायल्जिया सिर्फ शरीर के एक हिस्से में होता है?

जवाब- नहीं, यह कभी एक जगह पर जैसे कंधे या पैर में तो कभी पूरे शरीर में महसूस हो सकता है। यह इस पर निर्भर करता है कि कारण क्या है, जैसे चोट, वायरल संक्रमण या कोई दवा। पूरे शरीर में फैला दर्द आमतौर पर किसी इंटरनल इन्फेक्शन या बीमारी का संकेत होता है।

सवाल- क्या मायल्जिया का इलाज घर पर किया जा सकता है?

जवाब- अगर दर्द हल्का है और किसी चोट या ओवरवर्क की वजह से है तो आराम, सिंकाई और हाइड्रेशन से राहत मिल सकती है। वहीं अगर दर्द लगातार बना रहे तो खुद से दवा लेना या दर्द को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

सवाल- क्या मायल्जिया को रोका जा सकता है?

जवाब- डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल बताते हैं कि हां, कुछ हद तक। रोजाना हल्का व्यायाम करें, स्ट्रेचिंग की आदत डालें और पर्याप्त नींद लें। शरीर को हाइड्रेटेड रखें और जरूरत से ज्यादा मेहनत से बचें। तनाव को कम करना भी जरूरी है, क्योंकि फिजिकल और मेंटल स्ट्रेस दोनों ही मसल्स पेन को बढ़ा सकते हैं।

…………………

फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

फिजिकल हेल्थ- ठंड के मौसम में कम होता विटामिन D: डाइट में करें बदलाव, डॉक्टर की सलाह से लें सप्लीमेंट, बरतें 6 जरूरी सावधानियां

दुनिया में करीब 50% लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। भारत में यह समस्या और भी गंभीर है। भारत में लगभग 76% से 80% लोग विटामिन D की कमी का शिकार हैं। यानी हर चार में से तीन लोगों के शरीर में यह जरूरी विटामिन कम है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *