34 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी
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भारत में क्रीम बिस्किट खूब खाए जाते हैं। इनमें हानिकारक ट्रांस फैट और केमिकल मिलाए जाते हैं। बिस्किट्स के बीच भरी हुई मीठी क्रीम जितनी स्वादिष्ट लगती है, उतनी ही नुकसानदेह भी है। ये बिस्किट्स, जो अक्सर खाने के बाद मीठे में या शाम की चाय-कॉफी के साथ खाए जाते हैं, हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ये बच्चों के लिए अधिक नुकसानदायक हैं, क्योंकि उन्हें इन बिस्किट्स की लत लग जाती है।
जिस क्रीम के नाम पर इन बिस्किट्स को क्रीम बिस्किट कहकर बेचा जा रहा है, असल में वह क्रीम नहीं है। यह एक नकली नॉन-डेयरी मिश्रण होता है। इन्हें बनाने के लिए सस्ते और खतरनाक केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं। ये दिल की बीमारी, मोटापा और बच्चों की ग्रोथ से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज क्रीम बिस्किट के नुकसान पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इसमें मिला ट्रांस फैट कितना नुकसानदायक है?
- इसकी जगह क्या खा सकते हैं?
क्रीम में नहीं होते पोषक तत्व
बिस्किट के बीच में जो मीठी चीज लगी होती है, वह क्रीम नहीं होती है। यह कई सस्ते केमिकल्स और ट्रांस फैट से बनी चीज होती है। इसमें कोई पोषक तत्व नही होता है। इससे सेहत को सिर्फ नुकसान होते हैं।

कैसे बनती है बिस्किट की क्रीम
बिस्किट के बीच मेंं लगी क्रीम बनाने के लिए कई अनहेल्दी चीजों का इस्तेमाल होता है। क्रीम जैसी दिख रही चीज को बनाने के लिए वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल होता है। इसे मीठा बनाने के लिए शुगर सिरप मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं। ऐसी कई चीजें मिलाने के बाद सबसे आखिर में प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं, ताकि इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाए।

ट्रांस फैट के नुकसान
क्रीम बिस्किट में सबसे नुकसानदायक चीजों में से एक ट्रांस फैट है। आमतौर बिस्किट की क्रीम बनाने के लिए इस्तेमाल हुए वनस्पति घी में खूब सारा ट्रांस फैट होता है। ट्रांस फैट्स से शरीर में एलडीएल यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ता है और HDL यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल घटता है। इससे हार्ट अटैक या दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है।
अगर ट्रांस फैट का सेवन लंबे समय तक किया जाए तो शरीर में इन्फ्लेमेशन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।

बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक
ट्रांस फैट बच्चों के लिए अधिक खतरनाक होता है। इससे पेट और कमर के आसपास मोटापा बढ़ता है, लिवर की बीमारियां बढ़ सकती हैं। बच्चों की ग्रोथ में देरी का कारण बन सकता है। यहां तक कि यह पाचन तंत्र और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे पाचन बिगड़ता है और इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है।
शुगर सिरप के नुकसान
- ब्लड ग्लूकोज लेवल तेजी से बढ़ाता है, जिससे इंसुलिन स्पाइक होता है।
- इससे ओबिसिटी बढ़ती है और मेटाबॉलिक सिंड्रोम हो सकता है।
- फ्रुक्टोज से लिवर में फैट जमा होता है और फैटी लिवर डिजीज हो कती है।
- डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
आर्टिफिशियल फ्लेवर के नुकसान
- कुछ फ्लेवरिंग एजेंट्स जैसे डायएसिटाइल से न्यूरोलॉजिकल नुकसान हो सकते हैं।
- बच्चों में हाइपरएक्टिविटी, चिड़चिड़ापन और ADHD जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
- शरीर में एलर्जिक रिएक्शन और इम्यून रिस्पॉन्स कमजोर हो सकता है।
आर्टिफिशियल कलर केमिकल्स के नुकसान
- कई आर्टिफिशियल रंगों को कार्सिनोजेनिक माना जाता है।
- बच्चों में कॉन्संट्रेशन की कमी और हाइपरएक्टिविटी की कमी हो सकती है।
- लिवर और किडनी पर टॉक्सिक प्रभाव हो सकते हैं।
- कुछ लोगों में स्किन एलर्जी और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
इमल्सीफायर्स के नुकसान
- पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं।
- इससे आंतों में सूजन और लीकी गट सिंड्रोम हो सकता है।
- मूड डिसऑर्डर और ऑटो-इम्यून डिजीज हो ससकती है।
- शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को गलत दिशा में मोड़ सकते हैं।
प्रिजर्वेटिव्स के नुकसान
- BHA और BHT जैसे प्रिजर्वेटिव्स से कैंसर हो सकता है।
- सोडियम बेंजोएट से विटामिन C मिलता है तो बेंजीन नामक कैंसरजनक तत्व बना सकता है।
- बच्चों में व्यावहारिक बदलाव, चिड़चिड़ापन हो सकती है।
- इनके कारण एकाग्रता की कमी हो सकती है।
- लिवर और किडनी पर बोझ बढ़ाता है।
ये केमिकल्स बेहद खतरनाक हैं
क्रीम बिस्किट खाने से सिर्फ मोटापा नहीं बढ़ता है, बल्कि इनमें ऐसे एडिटिव्स यानी रासायनिक तत्व होते हैं जो धीरे-धीरे शरीर में जमा हो सकते हैं। इनसे एलर्जिक रिएक्शन भी हो सकते हैं।

मोटापा और मेटाबॉलिक बीमारियों से रिश्ता
क्रीम बिस्किट खाना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि यह गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। इन बिस्किट्स में चीनी, मैदा और हानिकारक फैट ज्यादा होता है, जबकि फाइबर और पोषण की मात्रा बहुत कम होती है। इस वजह से ये किसी नशे जैसे हो जाते हैं और लोग इन्हें ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं। धीरे-धीरे इससे मोटापा, इंसुलिन रेसिस्टेंस और फैटी लिवर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यहां तक कि किशोरों यानी टीनएजर्स को भी ये समस्याएं हो सकती हैं।

ऐसे प्रोसेस्ड फूड्स में बहुत कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन जरूरी पोषण नहीं होता है। इनमें मौजूद रिफाइंड शुगर और सिंथेटिक तत्व मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हार्ट से जुड़ी दिक्कतों और ऑटोइम्यून बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इतना ही नहीं, ये फूड्स शरीर के हार्मोन्स को भी बिगाड़ देते हैं। खासकर किशोरों में हार्मोनल असंतुलन और थायरॉइड जैसी समस्याएं जंक फूड्स की वजह से देखने को मिल रही हैं, क्योंकि उनका पोषण ठीक नहीं होता और वे लगातार ऐसे फूड खाते रहते हैं।
इसके बजाय क्या खा सकते हैं?
क्रीम बिस्किट्स के बजाय कुछ हेल्दी विकल्प हो सकते हैं। इनके बदले में साबुत अनाज या बाजरे से बने कुकीज, नट बटर जैसे मूंगफली या बादाम से बने स्नैक्स या खजूर और मेवे की बार्स खा सकते हैं। घर पर बनी ओट कुकीज, जिन्हें केले, नारियल तेल और ड्राई फ्रूट्स से बनाया जाए, एक बेहतरीन विकल्प हैं।
- कुछ हेल्दी स्नैक्स जैसे- मूंग खाखरा, भुना चना, मखाना और सीड्स या नट्स से बने क्रैकर्स खा सकते हैं।
- राजगिरा या मुरमुरे की चिक्की भी अच्छा विकल्प हो सकती है, बशर्ते इसे कम-से-कम सामग्री के साथ तैयार किया गया हो।
- क्रीम बिस्किट स्वाद में मीठे जरूर होते हैं, लेकिन सेहत के लिए मीठे नहीं होते हैं।
- पेरेंट्स और सभी लोग खाने की चीजों का इंग्रीडिएंट लेबल जरूर पढ़ने चाहिए और जब भी मीठा खाने का मन हो तो प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड स्नैक्स को प्राथमिकता दें।
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