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Sendha Salt Vs Normal Salt: सेंधा नमक और साधारण नमक में कौन सा आपके लिए बेहतर है? यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. रोजमर्रा के लिए आयोडीन युक्त नमक और धार्मिक अवसरों पर सेंधा नमक का संतुलित उपयोग सेहत और आस्था दोनों के लिए सही विकल्प है. (रिपोर्ट: वंदना रेवांचल तिवारी)

नमक हर व्यंजन का स्वाद बढ़ाने वाला अहम हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे सेहत और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी गहरी बातें भी छिपी हैं. आमतौर पर हमारे घरों में दो तरह के नमक इस्तेमाल होते हैं आयोडीन युक्त साधारण टेबल सॉल्ट और प्राकृतिक सेंधा नमक. इन दोनों का स्वाद, पौष्टिकता और असर, सब अलग है.

रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ के अनुसार, आयोडीन युक्त नमक थायरॉइड ग्रंथि के सही कार्य के लिए जरूरी है. सामान्य नमक समंदर या खारे झील के पानी से तैयार किया जाता है. इसे मशीन में शुद्ध किया जाता.

सामान्य नमक में 97 प्रतिशत सोडियम क्लोराइड होता है जबकि रिफाइनिंग के वक्त तीन फीसदी अन्य चीजें मिलाई जाती है. इनमें आयोडीन प्रमुख है. शरीर को रोज लगभग 140 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है, जो टेबल सॉल्ट से पूरी हो जाती है. इसकी कमी थकान, वजन बढ़ने और थायरॉइड असंतुलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है.

सेंधा नमक समुद्री नमक नहीं है, बल्कि हिमालय की चट्टानों से निकाला जाने वाला शुद्ध खनिज नमक है. इसमें सोडियम कम और मिनरल्स ज्यादा होते हैं. सेंधा नमक है जो धरती के नीचे मिलता है और यह दरदरा है.

यही वजह है कि सेंधा नमक को हेल्दी विकल्प माना जाता है, लेकिन इसमें आयोडीन नहीं होने के कारण इसे पूरी तरह साधारण नमक की जगह नहीं लेना चाहिए.

व्रत और धार्मिक अवसरों पर सेंधा नमक का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि इसे पूरी तरह पवित्र और प्राकृतिक माना जाता है.

समुद्री नमक के विपरीत यह जीव-जंतुओं के संपर्क या रासायनिक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरता. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सेंधा नमक अशुद्धियों से मुक्त और शरीर के लिए सौम्य होता है.

सेंधा नमक में ऊपर से आयोडीन मिलाने की जरूरत नहीं होती, जबकि सामान्य नमक में मिलाना पड़ता है. हालांकि सेंधा नमक अपेक्षाकृत महंगा होता है और दरदरा होता है जिससे यह भोजन में पूरी तरह से मिक्स नहीं हो पाता.
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