रूही (काल्पनिक नाम) उम्र करीब 20-22 साल की रही होगी. हर वक्त चेहरे पर रौनक रहती थी और सेहत ऐसी कि लोग उसकी फिटनेस की मिसाल देते थे. यही नहीं, महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य की निशानी पीरिड्स भी समय पर आ रहे थे. लेकिन, पिछले कुछ महीने से रूही को लग रहा था कि उसकी सेहत कुछ ठीक नहीं है… कुछ तो ऐसा है, जिसे वो सही से पकड़ नहीं पा रही है, लेकिन महसूस जरूर कर रही है. शुरुआत कब हुई, उसे खुद याद नहीं. समय के साथ परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही थी. पीरियड्स भी अनियमित हो चुके थे. एक माहवारी के दौरान उसने नोटिस किया कि, उसका दर्द बढ़ता जा रहा है, रुटीन भी पूरा बिगड़ता जा रहा है. शुरू में तो उसे लगा कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन परेशानी बढ़ी तो पास के डॉक्टर के पास जा पहुंची.
हमेशा खुश रहने वाली रूही को आज दर्द के हाल में देख डॉक्टर साहिबा भी हैरान रह गईं. पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब जांच की तो पता चला कि हार्मोन डिसबैलेंस हो चुके हैं, जिसकी वजह से दर्द लगातार बढ़ रहा है. शारीरिक कमजोरी आ रही है. शरीर में खून की कमी भी आ रही है. डॉक्टर ने रूही से पूछा कि ये परेशानी कब से है. इसपर रूही ने बताया कि, करीब 2 महीने से पीरियड्स अनियमित हैं, दर्द भी हल्का-फुल्का था. कुछ दवाएं भी लीं, लेकिन परेशानी समय के साथ बढ़ती ही जा रही है. इसके बाद डॉक्टर ने अनियमित पीरियड्स और होने वाला दर्द हार्मोन में बदलाव के चलते होता है. साथ ही, ये भी बताया कि इस दर्द को कैसे दूर कर सकती हैं.
महिलाओं में क्यों होता है हार्मोनल बदलाव
नोएडा की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि, पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) एक ऐसा हार्मोनल डिसऑर्डर है, जिसकी वजह से महिलाओं को पीरियड्स संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है. महिलाओं में बढ़ते हार्मोनल असंतुलन की वजह से अनियमित पीरियड्स, तेज दर्द, बार-बार थकान और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं. आज के समय में ये समस्याएं आम हो चुकी हैं. अगर आप दवाएं खाकर परेशान हो चुकी हैं तो कुछ आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर देखना चाहिए. आइए जानते हैं इन आयुर्वेदिक उपायों के बारे में-
हार्मोन को बैलेंस करने के आयुर्वेदिक उपाय
– सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण मिलाकर पीने से शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन होता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज, गैस, एसिडिटी दूर करता है और हार्मोनल असंतुलन की जड़ तक पहुंचकर उसे ठीक करने में मदद करता है.
– हल्दी और शतावरी का सेवन भी महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन को कम करता है और एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. यह एस्ट्रोजन लेवल को नियंत्रित करता है और पीरियड्स के दर्द व अनियमितता में राहत देता है.
– सूर्य नमस्कार और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने से कई फायदे मिलते हैं. रोजाना 10-12 चक्र सूर्य नमस्कार और 10-15 मिनट अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति जैसे प्राणायाम करने से तनाव का स्तर कम होता है. स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) महिलाओं के प्रजनन हार्मोन को सीधे प्रभावित करता है, इसलिए योग से हार्मोनल हेल्थ में बड़ा सुधार देखा जाता है.
– चौथा टिप्स सबसे आसान है और वह है पर्याप्त नींद और पानी. रात में कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद और दिन में 3-4 लीटर पानी पीना शरीर की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया को सक्रिय करता है. नींद के दौरान ही शरीर हार्मोन को फिर से सेट करता है.