‘M नाम वाले होते हैं बेहद लकी? गणेश जी खोलते हैं भाग्य के बंद दरवाजे, जानें पूजा का सही तरीका!

नाम ज्योतिष के अनुसार, ‘म’ अक्षर से शुरू होने वाले लोग भावुक, महत्वाकांक्षी और दृढ़ निश्चयी होते हैं. वे रिश्तों को ईमानदारी से निभाते हैं, जीवन में सफलता के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, और अक्सर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ रहते हैं.

ये लोग दिल के साफ होते हैं, पारंपरिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं और किसी भी काम को योजनाबद्ध तरीके से करना पसंद करते हैं. तो ऐसे में आइए जानें कि 'M' अक्षर नाम वालों के लिए कौन हैं सबसे शुभ देवता.

ये लोग दिल के साफ होते हैं, पारंपरिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं और किसी भी काम को योजनाबद्ध तरीके से करना पसंद करते हैं. तो ऐसे में आइए जानें कि ‘M’ अक्षर नाम वालों के लिए कौन हैं सबसे शुभ देवता.

'M' अक्षर के नाम वालों के लिए श्री गणेश जी को सबसे शुभ देवता माने जाते हैं. उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं, करियर में सफलता मिलती है और  घर में खुशहाली आती है.

‘M’ अक्षर के नाम वालों के लिए श्री गणेश जी को सबसे शुभ देवता माने जाते हैं. उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं, करियर में सफलता मिलती है और घर में खुशहाली आती है.

'M' अक्षर के नाम वाले भगवान गणेश जी की पूजा करने के लिए, सबसे पहले स्वच्छ होकर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर चावल से आसन बनाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. एक कलश में जल, सुपारी, हल्दी और सिक्का भरकर रखें.

‘M’ अक्षर के नाम वाले भगवान गणेश जी की पूजा करने के लिए, सबसे पहले स्वच्छ होकर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर चावल से आसन बनाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. एक कलश में जल, सुपारी, हल्दी और सिक्का भरकर रखें.

गणेश जी के सामने हाथ में अक्षत लेकर

गणेश जी के सामने हाथ में अक्षत लेकर “ॐ गं गणपतये इहागच्छ इह सुप्रतिष्ठो भव” मंत्र का जाप करते हुए अक्षत अर्पित करें. फिर जल अर्पित करें. फिर चंदन और सिंदूर से तिलक लगाएं. चंदन लगाते समय “इदं रक्त चंदनम् लेपनम् ऊं गं गणपतये नमः” और सिंदूर लगाते समय “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ओम गं गणपतये नमः” मंत्र बोलें.

21 गांठें और फूल अर्पित करें. दूर्वा अर्पित करते समय 'इदं दुर्वादलं ओम गं गणपतये नमः' और फूल अर्पित करते समय 'एष: पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नमः' मंत्र बोलें. अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएं, उसके बाद मोदक, लड्डू  मिठाई का भोग लगाएं. भोग के बाद ' इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:' बोलकर पान और सुपारी भी चढ़ाएं.

21 गांठें और फूल अर्पित करें. दूर्वा अर्पित करते समय ‘इदं दुर्वादलं ओम गं गणपतये नमः’ और फूल अर्पित करते समय ‘एष: पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नमः’ मंत्र बोलें. अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएं, उसके बाद मोदक, लड्डू मिठाई का भोग लगाएं. भोग के बाद ‘ इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:’ बोलकर पान और सुपारी भी चढ़ाएं.

गणेश चालीसा का पाठ करें, गणेश जी की आरती गाएं और पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें. अंत में, भोग का प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें.

गणेश चालीसा का पाठ करें, गणेश जी की आरती गाएं और पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें. अंत में, भोग का प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें.

Published at : 20 Nov 2025 05:14 PM (IST)

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