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Pasai Rice Superfood Amazing Health Benefits: आपने सफेद रंग का चावल देखा होगा, काले रंग का चावल देखा होगा. लेकिन आज हम आपको बताने वाले हैं एक भूरे रंग के चावल के बारे में. जिसे पसई या पसाढ़ी का चावल कहा जाता है. इस चावल के पौधे की सबसे खास बात यह है कि इसकी ना तो बुवाई होती है और ना ही रोपाई होती है. बल्कि यह अपने आप खाली जगह पर उगता है.
पसई का चावल अवध क्षेत्र में पूजा पाठ में शामिल किया जाता है. खास तौर पर भाद्रपद माह की छठ पूजा में जिसे ललई छठ भी कहा जाता है. इस पसई के चावल का प्रयोग किया जाता है. इसके साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है.

आज के समय में शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया आम समस्या हो गई है. पसई का चावल इसमें कारगर है. इसमें मौजूद आयरन शरीर की जरूरत पूरी करता है और ब्लड हेल्थ को बेहतर बनाता है.

मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि अगर आप वजन कम करने की कोशिश में हैं तो पसई का चावल आपके लिए नेचुरल हेल्पर साबित हो सकता है. यह न सिर्फ हल्का होता है, बल्कि लंबे समय तक पेट भरा रखता है, यानी बार-बार भूख लगने की समस्या से छुटकारा और मोटापे पर कंट्रोल करता है.

पसई के चावल में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मिलता है. यही वजह है कि यह हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचाता है. यदि इसका सेवश रोजाना डाइट में किया जाए तो हमारी हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं.

भूरे रंग का ये चावल हल्का होता है और आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है. कब्ज से राहत, गट हेल्थ में सुधार और पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए पसई का चावल बेहतरीन माना जाता है.

पसई में मौजूद जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के घाव और चोट को तेजी से भरने में मदद करते हैं. साथ ही यह सेल्स को फ्री रेडिकल्स से भी बचाते हैं.

पसई के चावल को उबलते समय उसका जो पानी रहता है यदि इसको ठंडा करके हम किसी फूल के पौधे या अन्य किसी पौधे में डालते हैं तो यह काफी लाभ प्रदान करता है. इससे पौधों में फूल भारी मात्रा में आने लगते हैं और फूल के साथ-साथ पौधे का भी विकास होता है.

इस चावल की सबसे खास बात क्या है कि इसके पौधों की रोपाई नहीं की जाति और ना ही इसकी कोई बुवाई की जाती है. इसके सबसे खास बात क्या है कि जिस जगह पर कोई फसल नहीं उगाई गई होती. उसे फसल पर यह अपने आप उगता है और इसके साथ ही इसको हाथ हाथ से नहीं काटा जाता बल्कि लोहे और लकड़ी का एक झरना होता है. इस झरने से इसको पौधे से अलग किया जाता है.