आगर मालवा| जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रभु पार्श्वनाथ प्रतिष्ठा महोत्सव में धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। विवेकानंद कॉलोनी में हुए इस आयोजन में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा, वहीं चल समारोह और प्रवचन कार्यक्रमों ने पूरे शहर को धर्ममय कर दिया। नंदन मुनिराज वज्ररत्न सागर मसा ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपने सामर्थ्य या भाग्य पर घमंड नहीं करना चाहिए। जीवन में जो कुछ भी प्राप्त होता है, वह परमात्मा की कृपा और संचित पुण्य का परिणाम है। “मैं ही सब कुछ हूं” का भाव सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने प्रभु भक्ति को जीवन का आधार बताते हुए इसे ही सच्चे कल्याण का मार्ग बताया। मुनिश्री ने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। उनके दिए संस्कार ही जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं, इसलिए आधुनिकता के साथ पारिवारिक मूल्यों को अपनाना जरूरी है। .