पार्लर और सलून से भी हो सकता है आई-फ्लू, दो चीजें खतरनाक, एम्स डॉ. बोलीं, बरतें सावधानी

Conjunctivitis in Monsoon: बारिश के मौसम में ब्यूटी पार्लर या सलून में जाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है. जिन जगहों पर आप अपने शरीर को साफ, सुथरा और सुंदर बनाने जाते हैं, हो सकता है कि वहां से बीमारी लेकर लौटें. इन दोनों ही जगहों पर ऐसी दो चीजें इस्तेमाल होती हैं जो बिना किसी भेदभाव के सलून और पार्लर वाले लोग सभी लोगों पर इस्तेमाल करते हैं. यही चीजें आपको आंखों की बीमारी कंजंक्टिवाइटिस या आई फ्लू दे सकते हैं.

आरपी सेंटर, एम्स नई दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर ऑप्थेल्मोलॉजी श्रीदेवी नायर कहती हैं कि बारिश के मौसम में हवा और वातावरण ज्यादा नमी वाला हो जाता है. नमी और गीला वातावरण कीटाणुओं को पनपने के लिए एकदम सही जमीन तैयार कर देता है. रुका हुआ पानी, प्रदूषण और भीड़भाड़ वाले स्कूल, ऑफिसेज में नजदीकी संपर्क से आंखों का इन्फेक्शन तेजी से बढ़ता है. इसी सीजन में सबसे कॉमन परेशानी होती है कंजक्टिवाइटिस या आई फ्लू. इसके अलावा एलर्जी और कभी-कभी कॉर्नियल इन्फेक्शन या पुतली में इन्फेक्शन भी हो जाता है.

मॉनसून में आई फ्लू कॉमन है.
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मॉनसून में कज्क्टिवाइटिस होना बहुत कॉमन है. इसमें आंखें लाल हो जाती हैं, आंखों से पानी आता है और पलकें चिपकने लगती हैं. ये संक्रमण जल्दी से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल जाता है. इसीलिए लोग इसे फ्लू भी कहते हैं. वैसे तो ये कई कारणों से हो सकता है लेकिन इसका सबसे कॉमन कारण वायरस होता है. कभी कभी बैक्टीरिया भी होते हैं लेकिन इनमें आंखों का चिपकना ज्यादा होता है.

तौलिया और कॉस्मेटिक्स हैं बड़े कारण

सलून और पार्लर में तौ‍ल‍िया और कॉस्‍मेट‍िक्‍स शेयर करने से आई फ्लू हो सकता है.

इसकी जो सबसे जरूरी बात है वह यह है कि यह छूने या स्पर्श से फैलता है. जैसे किसी ने आंख रगड़ी, फिर उसी हाथ से तौलिया को छू लिया, फिर दूसरे ने उसे इस्तेमाल कर लिया तो ऐसे में ये संक्रमण बड़ी आसानी से ट्रांसफर हो सकता है. ज्यादातर टॉवेल्स, कॉस्मेटिक्स, तकिया आदि से यह संक्रमण सबसे ज्यादा हो सकता है. स्कूल और ऑफिसों में भी ये तेजी से फैलता है. लोगों में ये गलतफहमी है कि ये देखने से फैलता है, ऐसा नहीं होता है. यह छूने या छूए हुए सामान के संपर्क में आने से फैलता है.

ठीक होने में लगता है एक हफ्ता
ज्यादातर फ्लू के केसेज माइल्ड होते हैं और हफ्ते भर में ये ठीक भी हो जाते हैं. बस थोड़ी सी देखभाल करनी होती है. जैसे कि ठंडी सिकाई, लुब्रिकेंट आई ड्रॉप्स, आंखों का साफ रहना बहुत जरूरी है. कंजक्टिवाइटिस दिखने में डरावना लग सकता है. आंख लाल लग सकती है और चिपचिपी हो सकती है लेकिन आमतौर पर नजर पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता है.

शेयर न करें ये चीजें
डॉ. कहती हैं कि आंखों को बिल्कुल भी न छूएं. किसी के साथ अपने टॉवल्स, कॉस्मेटिक्स या पर्सनल आइटम्स न शेयर करें, क्योंकि अगर आपको ये परेशानी हुई है तो ये औरों को भी हो सकती है.

. सबसे बड़ी बात है कि कैमिस्ट से खुद खरीदकर आई ड्रॉप्स न डालें. खासतौर पर स्टेरॉइड ड्रॉप्स. क्योंकि इनसे नुकसान और ज्यादा हो सकता है.
. कोई भी आईड्रॉप्स डालने से पहले अपने आंखों के डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें और तभी आंखों में डालें.
. इससे बचने के लिए हमारे पास कई तरीके हैं. इसमें सबसे जरूरी है, हैंड हाईजीन या हाथों की सफाई. हाथ को हमेशा धोइए, इन्हें साबुन से धो सकते हैं.
. अगर आप बाइक या स्कूटी चलाते हैं तो गॉगल्स या प्रोटेक्टिव चश्मा पहन कर रखें ताकि धूल मिट्टी या बारिश का पानी आंखों में न जाए.
. अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस यूज करते हैं तो उन्हें इन्फेक्शन के दौरान बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें.

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