पैरेंट्स अलर्ट! 4-5 साल की बच्चियों को लिपस्टिक लगाना पड़ सकता है भारी, जानें कितने खतरनाक हैं ये केमिकल्स

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Health Tips: 4–5 साल की बच्चियों को लिपस्टिक या किसी भी तरह का मेकअप लगाने से त्वचा और स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं. कई कॉस्मेटिक उत्पादों में पाए जाने वाले केमिकल्स एलर्जी, त्वचा में जलन, हार्मोनल असंतुलन और लंबी अवधि में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं. इसलिए माता-पिता को बच्चों के लिए सुरक्षित और केमिकल-फ्री विकल्प चुनना चाहिए.

आज के समय में छोटी बच्चियों में मेकअप का क्रेज तेजी से बढ़ता जा रहा है. घर में मां, बहन या बुआ को मेकअप करते देखकर वे भी सजने-संवरने की जिद करने लगती हैं. कई बार माता-पिता भी उनकी खुशी के लिए मना नहीं कर पाते और कम उम्र में ही बच्चियों को मेकअप की आदत पड़ने लगती है. इससे उनका ध्यान पढ़ाई और खेल की बजाय बाहरी दिखावे पर अधिक केंद्रित होने लगता है, जो आगे चलकर उनकी मानसिकता को प्रभावित करता है.

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सोशल मीडिया इस ट्रेंड को और बढ़ावा दे रहा है. इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर छोटे-छोटे इन्फ्लुएंसर बच्चों के मेकअप वीडियो लाखों लोग देखते हैं. जब सामान्य बच्चियां ये वीडियो देखती हैं, तो वे भी वैसा ही बनने की कोशिश करती हैं. ये ऑनलाइन प्लेटफार्म बच्चों में अनजाने में ही ग्लैमर की होड़ पैदा कर देते हैं, जिससे वे वास्तविकता से दूर होकर केवल सुंदर दिखने को प्राथमिकता देने लगती हैं.

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हेल्थ एक्सपर्ट डॉ अंजू चौधरी ने बताया कि मेकअप बच्चों की त्वचा के लिए बेहद नुकसानदायक है. बच्चियों की त्वचा वयस्कों से कहीं पतली, नाजुक और संवेदनशील होती है. स्किन केयर प्रोडक्ट्स में मौजूद कई रसायन बच्चे की स्किन बैरियर को तोड़ देते हैं. इससे त्वचा में रूखापन, खुजली, जलन, लालपन, पिंपल्स और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं. कई बार ये समस्याएं इतनी बढ़ जाती हैं कि डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है.

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रेटिनॉइड्स और ग्लाइकोलिक एसिड जैसे तत्व, जो वयस्कों की स्किन केयर में उपयोगी माने जाते हैं, बच्चों की नाजुक त्वचा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन रसायनों के कारण स्किन के भीतर सूजन, त्वचा का तेजी से उतरना और संवेदनशीलता बढ़ सकती है. ये बदलाव बच्चियों की प्राकृतिक त्वचा सुरक्षा को कम कर देते हैं, जिससे भविष्य में स्किन इंफेक्शन और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

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लिपस्टिक और अन्य मेकअप प्रोडक्ट्स में पैराबेन्स, फेथलेट्स और फिनोल जैसे केमिकल होते हैं, जो लंबे समय तक उपयोग करने पर हार्मोनल संतुलन बिगाड़ देते हैं. कम उम्र में इन पदार्थों के संपर्क में आने से बच्चियों में समय से पहले किशोरावस्था शुरू होने का खतरा बढ़ जाता है. कई शोध बताते हैं कि ऐसे केमिकल का लंबे समय तक संपर्क ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी बढ़ा सकता है.

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शारीरिक नुकसान के साथ-साथ मेकअप का मनोवैज्ञानिक असर भी होता है. चमकती-दमकती तस्वीरें देखकर बच्चियां एक अवास्तविक सौंदर्य-मानक बनाने लगती हैं. जब वे खुद को वैसा नहीं बना पातीं, तो उनमें हीनभावना, एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं जन्म ले लेती हैं. कई बार वे अपनी असली पहचान से असंतुष्ट होकर केवल बाहरी लुक्स को ही अपनी मूल्यता समझने लगती हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.

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माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी बच्चियों को मेकअप के नुकसान स्पष्ट रूप से समझाएं और उन्हें सोशल मीडिया के ग्लैमर से दूर रखने की कोशिश करें. बचपन खेल, सीखने और विकास का समय होता है, न कि सौंदर्य प्रतियोगिता का. बच्चों को आत्मविश्वास, प्राकृतिक सुंदरता और स्वस्थ आदतों के महत्व के बारे में बताना जरूरी है ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें और अनावश्यक दबावों से दूर रहें.

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पैरेंट्स अलर्ट! 4-5 साल की बच्चियों को लिपस्टिक लगाना पड़ सकता है भारी

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