40 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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सवाल- मैं रायपुर (छत्तीसगढ़) से हूं। करीब एक साल पहले मेरी 18 साल की बेटी हमें बिना बताए अपने बॉयफ्रेंड के साथ चली गई थी। बाद में पता चला कि दोनों ने मंदिर में शादी भी कर ली है। उस समय समाज में हमारी काफी बेइज्जती हुई, जिससे हम काफी आहत और नाराज हुए। हालांकि बेटी ने कई बार फोन करके हमसे बात करने की कोशिश की, लेकिन हमने बात नहीं की। अब काफी समय हो गया है, उसने कॉल करना भी बंद कर दिया है। मुझे अंदर ही अंदर उसकी बहुत याद आती है और अब मन करता है कि उससे एक बार बात करूं, लेकिन मेरे पति अभी भी इसके खिलाफ हैं। उनका मानना है कि हमने बेटी को माफ कर दिया तो समाज में हमारी और बेइज्जती होगी। ऐसे में हमें बेटी के साथ दोबारा रिश्ता जोड़ना चाहिए या उससे हमेशा के लिए दूर रहना चाहिए? कृपया मुझे बताएं कि एक माता-पिता के रूप में इस स्थिति में सही रास्ता क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर
जवाब- आपकी स्थिति बहुत संवेदनशील है। एक तरफ बेटी की याद और उसे अपनाने की चाह है, दूसरी तरफ पति की नाराजगी और समाज का डर। ऐसे में उलझन महसूस करना बिल्कुल स्वाभाविक है, लेकिन इस समय सबसे अहम सवाल ये है कि क्या परिवार, समाज के डर से चलना चाहिए या रिश्तों की बुनियाद पर।
युवावस्था में बच्चे अक्सर बिना पूरी समझदारी के बड़े फैसले ले लेते हैं। उस समय उन्होंने जो किया, शायद वो जल्दबाजी या भावनाओं के आवेग में उठाया गया कदम था। लेकिन अब जब वो आपसे जुड़ना चाहती है, इसका मतलब है कि उसे भी परिवार के सहारे और अपनेपन की जरूरत महसूस हो रही है।
वहीं एक मां के रूप में आपको बेटी की याद आना और उससे बात करने की इच्छा होना स्वाभाविक है। यह दिखाता है कि आप एक संवेदनशील और प्यार करने वाली मां हैं। आपके पति का रुख भी समझ में आता है क्योंकि भारतीय समाज में ऐसी घटनाएं परिवार की प्रतिष्ठा पर गहरा असर डालती हैं। लेकिन याद रखिए, रिश्ते टूटने से ज्यादा दर्दनाक कुछ नहीं होता, खासकर जब बात अपने बच्चे की हो।

बच्चे के अपनी मर्जी से शादी करने का पेरेंट्स पर असर
आइए पहले इस स्थिति के पीछे छिपी भावनाओं को समझते हैं। जब बेटा या बेटी घर से भागकर शादी करने का फैसला लेते हैं, उस समय पेरेंट्स के मन में गुस्सा, दुख, गिल्ट और डर की मिली-जुली भावनाएं उभरती हैं। आपकी बेटी ने उस समय जो किया, वह शायद प्यार में लिया गया फैसला था, लेकिन आपको यह विश्वासघात जैसा लगा। हालांकि समय बीतने के साथ ये भावनाएं बदलती हैं। गुस्सा कम होता है और यादें सताने लगती हैं।

रिश्ता तोड़ना आसान है, लेकिन जोड़ना कठिन
साइकोलॉजी में ‘फैमिली रिकन्सिलिएशन’ का कॉन्सेप्ट है, जो कहता है कि टूटे रिश्तों को जोड़ना संभव है, अगर दोनों तरफ से प्रयास हो। आपकी बेटी ने कॉल बंद कर दिया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह बात करना नहीं चाहती। शायद वह भी डर रही हो कि फिर से रिजेक्ट हो जाएगी। याद रखिए समाज की राय बदल सकती है, लेकिन खोया हुआ रिश्ता शायद नहीं लौटेगा। कई केसों में मैंने देखा है कि पेरेंट्स ने माफ करके नई शुरुआत की और समाज ने भी समय के साथ सबकुछ स्वीकार कर लिया।
मेरी सलाह है कि रिश्ता जोड़ने की कोशिश करें, लेकिन धीरे-धीरे और समझदारी से। हमेशा के लिए दूर रहना दोनों तरफ दर्द बढ़ाएगा। सबसे पहले खुद की भावनाओं को संभालें। आप मां हैं, आपका दिल बेटी की तरफ खिंच रहा है, यह अच्छी बात है। लेकिन पति से बात करें, उन्हें समझाएं कि इज्जत से ज्यादा महत्वपूर्ण परिवार का साथ है। इसके साथ ही कुछ बातों का ध्यान रखें।

हेल्दी पेरेंटिंग कैसे करें
बातचीत ही किसी भी रिश्ते की नींव होती है। जब बातचीत रुक जाती है तो रिश्ता भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। कई रिसर्च बताती हैं कि जो बच्चे अपने माता-पिता से खुलकर बात करते हैं, वे जीवन में संतुलित और समझदार फैसले लेते हैं। इसलिए रिश्ता जोड़ने के बाद नियमित संवाद बनाए रखें। कॉल्स, मुलाकातें और छोटी-छोटी बातें रिश्ते को फिर से मजबूत करेंगी।
इस प्रक्रिया में अपने पति को भी शामिल करें, ताकि एकजुट परिवार का भाव बना रहे। याद रखिए अब आपकी बेटी सिर्फ आपकी नहीं, बल्कि एक नई फैमिली का हिस्सा भी है। ऐसे में उसके पति को भी अपनाएं। यह सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा, लेकिन प्यार और धैर्य से सब संभव है। अब आइए, जानते हैं हेल्दी पेरेंटिंग के वे 10 सबक जो हर माता-पिता को अपनाने चाहिए।

बेटी से बात करें तो क्या कहें?
पहले उसकी बात सुनें। गुस्सा न दिखाएं, बल्कि कहें कि “हम दुखी थे, लेकिन अब तुम्हारी याद आती है।” इससे वह खुलकर बोलेगी। अगर वह खुश है तो बधाई दें। अगर नहीं तो मदद ऑफर करें। रिश्ता जोड़ने से आपका दिल हल्का होगा और बेटी को भी सुरक्षा का भाव मिलेगा। साइकोलॉजी में इसे ‘हीलिंग थ्रू फॉरगिवनेस’ कहते हैं। माफी देने से मानसिक शांति मिलती है।
अंत में यही कहूंगी कि बेटी ने भले ही अपनी मर्जी से शादी की हो, लेकिन वह अब भी आपकी ही बेटी है। इस वक्त उसे सबसे ज्यादा आपकी जरूरत है। शायद वो खुद ये जताने से डर रही हो। एक मां का प्यार, एक फोन कॉल या प्यारा मैसेज उसके लिए भरोसे की डोर बन सकता है। शुरुआत करें छोटे-छोटे कदमों से। उसे यह एहसास दिलाइए कि आपके दरवाजे अब भी खुले हैं। माफ करने से आपकी इज्जत बढ़ेगी क्योंकि यह दर्शाएगा कि आप मजबूत हैं। धैर्य रखें, प्यार से आगे बढ़ें और समय के साथ सब अपने आप ठीक हो जाएगा।
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