हैदराबाद की भीड़भाड़ से दूर… सरपनपल्ली झील का अनकहा राज, छिपाए बैठी है जन्नत

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Hyderabad News: हैदराबाद के पास स्थित सरपनपल्ली झील अपनी शांति और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती है, यहां कयाकिंग, पिकनिक और फोटोग्राफी का आनंद भी लिया जा सकता है.

हैदराबाद. हैदराबाद से घूमने निकलने वाले ज्यादातर लोग कोटेपल्ली जलाशय या नागासमुद्रम झील की ही सैर करते हैं. ये जगहें कयाकिंग और पिकनिक के लिए तो बेहतरीन हैं, मगर अक्सर यहां इतनी भीड़ होती है कि शांति का नामोनिशान तक नहीं रहता. लेकिन इन्हीं के पास छिपी है एक खूबसूरत और शांत जगह सरपनपल्ली झील, जो बिना भीड़ के वही सारी खूबियां पेश करती है.

खुले आसमान और हरे-भरे माहौल से घिरी यह झील एकदम अलग ही अनुभव देती है. हैदराबाद की दूसरी मशहूर झीलों के मुकाबले सरपनपल्ली में एक अनोखी, अबूझ सी खूबसूरती है, जो इसे देखने वालों का दिल खींच लेती है.

सरपनपल्ली झील में क्या है खास?
सरपनपल्ली झील को उसकी शांति और सुकून भरे माहौल के लिए जाना जाता है. यह जगह पिकनिक मनाने, फोटोग्राफी करने या बस पानी के किनारे बैठकर आराम करने के लिए परफेक्ट है. एडवेंचर पसंद लोग यहां कयाकिंग का मजा भी ले सकते हैं, जो आसपास के रिसॉर्ट्स में करीब 500 रुपये में उपलब्ध है.

डूबते सूरज का नजारा
झील घूमने का सबसे बेहतरीन वक्त वह है जब दोपहर ढलती है और सूरज की किरणें पानी पर सुनहरी चादर बिछा देती हैं. जो लोग भीड़ से दूर, प्रकृति की गोद में एकांत तलाश रहे हैं, उनके लिए सरपनपल्ली झील से बेहतर जगह शायद ही कोई हो. यहां पार्किंग की सुविधा है और एंट्री फ्री है. हालांकि यहां रेस्टोरेंट या टॉयलेट जैसी सुविधाएं सीमित हैं इसलिए जरूरी सामान साथ ले जाना बेहतर रहेगा.

कब जाएं यहां
सर्दियों और बारिश के मौसम में यहां आना सबसे अच्छा रहता है. हालांकि, सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है. जुलाई 2025 में यहां एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी, जब तेज हवाओं के कारण एक नाव पलट गई थी, जिसमें दो सैलानियों की मौत हो गई थी. इसलिए, मौसम खराब होने पर पानी के किनारे या नाव में जाने से बचें. इन सबके बावजूद सरपनपल्ली झील हैदराबाद के पास छिपा एक अनमोल रत्न है, जो कम से कम एक बार जरूर देखने लायक है, खासकर उन लोगों के लिए जो शांति और प्राकृतिक खूबसूरती की तलाश में हैं.

कैसे पहुंचें और कब जाएं?
सरपनपल्ली झील हैदराबाद से करीब 90 किलोमीटर और विकाराबाद से 15 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने में करीब दो घंटे लगते हैं. रास्ता घुमावदार है लेकिन आसपास के हरे-भरे खेत और पहाड़ियां सफर को यादगार बना देती हैं. कई सैलानी यहां आने के साथ ही पास की अनंतगिरी पहाड़ियों की सैर का भी प्लान बनाते हैं.

Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल… और पढ़ें

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