Agency:एजेंसियां
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जापान से जुड़वां पांडा जियाओ जियाओ और लेई लेई की वापसी सिर्फ एक वन्यजीव घटना नहीं. ये चीन-जापान रिश्तों में आई दरार का संकेत है. ताइवान पर सख्त रुख के बाद चीन ने नए पांडा भेजने से इनकार कर दिया. दशकों से दोस्ती की पहचान रही ‘पांडा डिप्लोमेसी’ अब राजनीति की भेंट चढ़ती दिख रही है.
टोक्यो: जापान और चीन के रिश्तों में आई तल्खी अब चिड़ियाघरों तक पहुंच गई है. टोक्यो के उएनो चिड़ियाघर में मौजूद जुड़वां पांडा जियाओ जियाओ और लेई लेई अगले हफ्ते चीन लौटने वाले हैं. इनके जाने के बाद यह 1972 के बाद पहली बार होगा कि जापान को भी विशाल पांडा नहीं रह जाएगा. यह वही साल था, जब दूसरे विश्व युद्ध के बाद चीन और जापान के बीच राजनयिक संबंध सामान्य हुए थे. ये दोनों पांडा 2021 में जापान में पैदा हुए थे, लेकिन वे तकनीकी रूप से चीन की संपत्ति हैं.
चीन अपने पांडा को ‘लोन’ पर देता है. अब इन्हें टोक्यो के नारिता एयरपोर्ट से चीन के सिचुआन प्रांत स्थित एक संरक्षण केंद्र ले जाया जाएगा, जहां ये अपनी बहन शियांग शियांग से मिलेंगे. पांडा की वापसी को केवल एक वन्यजीव घटना नहीं माना जा सकता. इसे चीन-जापान रिश्तों के बिगड़ते हालात का बड़ा संकेत माना जा रहा है. बीते पांच दशकों में चीन ने जापान को 30 से ज्यादा पांडा दिए थे. इन पांडाओं ने जापानी समाज में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और चीन-जापान दोस्ती की पहचान बन गए.
क्या है चीन की पांडा डिप्लोमेसी?
चीन अपने राष्ट्रीय प्रतीक माने जाने वाले पांडाओं को दूसरे देशों को उधार पर देता है. मकसद सिर्फ संरक्षण नहीं होता, बल्कि दोस्ती का संदेश देना भी होता है. जब रिश्ते अच्छे होते हैं, पांडा जाते हैं. जब रिश्ते बिगड़ते हैं, पांडा लौट आते हैं. यानी पांडा केवल जानवर नहीं, चीन की कूटनीति का नरम हथियार हैं. अब यह डिप्लोमेसी ताइवान मुद्दे पर आकर टूटती दिख रही है.
चीन-जापान के रिश्ते क्यों बिगड़े?
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल में कहा कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान अपनी सेना तैनात कर सकता है. चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताया और नाराजगी जताई. इसके बाद हालात तेजी से बदले. चीन ने अपने नागरिकों से जापान यात्रा से बचने को कहा. पर्यटन गिरा, सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द हुए. और अब असर पांडाओं तक पहुंच गया. टोक्यो सरकार ने नए पांडा भेजने की मांग की, लेकिन चीन ने साफ कह दिया कि फिलहाल कोई योजना नहीं है. बीजिंग के एक अखबार ने यहां तक लिखा कि अगर तनाव बना रहा तो जापान में पांडा फिर कभी न दिखें.
पांडा देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़
उएनो चिड़ियाघर में आने वाले लोग इसे सिर्फ राजनीति नहीं मान रहे. एक महिला ने कहा, ‘यह आखिरी बार है जब मैं इन्हें देख पा रही हूं. लगता है जैसे हमें सजा दी जा रही हो.’ विशेषज्ञ कहते हैं कि पांडा असल में रिश्तों का आईना हैं. वासेदा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रूमी आयामा के मुताबिक, ‘पांडा दोस्ती बनाते नहीं, बल्कि दिखाते हैं कि दोस्ती की हालत क्या है.’ आज उएनो में लोग घंटों लाइन में लगकर आखिरी झलक पाने की कोशिश कर रहे हैं. बैनरों पर एक ही संदेश है- ‘थैंक यू, जियाओ जियाओ.’
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें
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