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Health Benefit: खेतों के किनारे, गांव या जंगलों में झाड़ीनुमा उगने वाले इस पौधे पुराने लोग जानते और इसकी ताकत को मानते हैं. लेकिन, नई पीढ़ी को इसके बारे में नहीं पता. ये पौधा गजब है. खासकर पुराने से पुराने दर्द के लिए पेनकिलर है. रामबाण इलाज है. जानें कैसे… रिपोर्ट: आशीष पांडेय
अरंडी का पौधा आसपास आसानी से मिल जाता है. यह खेतों के किनारे, खाली जमीन और गांवों में ज्यादा दिखता है. यह एक झाड़ी जैसा पौधा होता है. इसकी पत्तियां बड़ी और हथेली जैसी होती हैं. पत्तियों का रंग हरा होता है और कभी-कभी हल्का लाल भी दिखता है. लोग इसे पहचान तो लेते हैं, लेकिन इसके फायदे कम जानते हैं. आयुर्वेद में इस पौधे को बहुत उपयोगी माना गया है. अरंडी का पौधा बिना ज्यादा देखभाल के भी अच्छी तरह बढ़ जाता है.

अरंडी की पत्तियां दर्द और सूजन में काम आती हैं. अगर किसी को चोट लग जाए या मोच आ जाए, तो इसकी पत्तियों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांधा जाता है. इससे सूजन कम होती है और आराम मिलता है. गांवों में यह तरीका बहुत पुराना है. पत्तियों में गर्मी होती है, जो शरीर को राहत देती है. यह आसान और घरेलू उपाय माना जाता है, इसलिए लोग आज भी अरंड की पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं.

अरंडी के बीजों से तेल निकलता है. अरंडी तेल गाढ़ा होता है. शरीर में दर्द होने पर इससे मालिश की जाती है. इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है. पीठ दर्द और जोड़ों के दर्द में भी लोग इस तेल का इस्तेमाल करते हैं. तेल लगाने से शरीर में गर्माहट आती है. यह तेल आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माना गया है. कई घरों में आज भी अरंडी का तेल रखा जाता है.
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जोड़ों में दर्द होने पर अरंडी का नाम सबसे पहले आता है. बुजुर्ग लोग इस पौधे का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. अरंडी के तेल से मालिश करने पर घुटनों और कमर के दर्द में राहत मिलती है. अरंडी को वात दोष कम करने वाला माना जाता है, इसलिए यह जोड़ों की परेशानी में काम आता है. पुराने समय से लोग इस पौधे पर भरोसा करते आए हैं.

अरंडी का पूरा पौधा उपयोगी होता है. इसकी जड़, तना, पत्तियां और बीज सभी किसी न किसी काम आते हैं. आयुर्वेद में इसे पंचांग कहा जाता है. कुछ लोग इसका काढ़ा भी बनाते हैं. हर हिस्सा शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. यही कारण है कि अरंड को बहुत खास पौधा कहा जाता है. यह प्रकृति की एक अच्छी देन है.

अरंडी का पंचांग यानी जड़, तना, पत्तियां, फूल और बीज-सब किसी न किसी रूप में काम आते हैं. आयुर्वेद में पंचांग का काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है. पंचांग की यही खासियत अरंड को “दवाओं का बाप” जैसा नाम दिलाती है.

गांवों में अरंडी सिर्फ पौधा नहीं, बल्कि घरेलू इलाज का हिस्सा है. अरंडी की खेती करना बहुत आसान है. इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. यह कम देखभाल में भी अच्छा बढ़ता है. किसान इसे खेत की मेड़ पर उगा लेते हैं. यह जल्दी बढ़ने वाला पौधा है, इसलिए लोग इसे आसानी से लगा लेते हैं. अरंडी का पौधा लंबे समय तक फायदा देता है.