सीतामढ़ी. सीतामढ़ी जिले की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली नीलम देवी ने आज उन तमाम महिलाओं के लिए एक नई मिसाल पेश की है, जो घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर कुछ अलग करना चाहती हैं. नीलम जी ने परंपरागत रूढ़ियों और सामाजिक बेड़ियों को पीछे छोड़ते हुए स्वरोजगार का रास्ता चुना. जहां आमतौर पर भारी मशीनों और मिलों के संचालन को पुरुषों का कार्य क्षेत्र माना जाता था, वहां नीलम देवी ने खुद की ‘आटा और चावल मिल’ स्थापित कर इस धारणा को बदल दिया है.
उनकी यह कहानी केवल एक व्यवसाय शुरू करने की नहीं है, बल्कि एक महिला की उस दृढ़ इच्छाशक्ति की है, जिसने उसे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने का साहस दिया. आज वे अपने क्षेत्र में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जा रही हैं.
कड़ी मेहनत और मशीनों पर पकड़
नीलम देवी की सफलता के पीछे पिछले चार वर्षों का कड़ा संघर्ष और अनुभव छिपा है. उन्होंने केवल मिल में निवेश ही नहीं किया, बल्कि वे स्वयं इन मशीनों का संचालन भी करती हैं. मिल में होने वाले हर बारीक काम, जैसे धान से चावल निकालना, गेहूं की पिसाई करना और मसालों को तैयार करना, इन सबमें वे पूरी तरह निपुण हो चुकी हैं. वे बताती हैं कि काम के घंटों की कोई निश्चित सीमा नहीं होती.
जब भी ग्राहकों की मांग आती है, वे पूरी तत्परता के साथ जुट जाती हैं. कभी 5 घंटे तो कभी 10 घंटे तक लगातार काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने न केवल मशीनों को चलाना सीखा, बल्कि तकनीक और व्यापार के बीच एक बेहतरीन तालमेल भी बिठाया है.
बहुउद्देशीय मिल और बाजार में बढ़ती मांग
नीलम देवी की यह मिल केवल आटा या चावल तक सीमित नहीं है. उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए इसमें मसाला पिसाई, दाल दरने और तेल पेरने जैसी सुविधाएं भी जोड़ दी हैं. इस बहुउद्देशीय दृष्टिकोण के कारण उनके पास ग्राहकों की भारी भीड़ लगी रहती है. उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की शुद्धता की वजह से स्थानीय लोग तो आते ही हैं, साथ ही बड़े व्यापारी भी सीधे मिल से ही माल की खरीदारी करते हैं.
बाजार में मिलावट के दौर में नीलम देवी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही शुद्ध खाद्य सामग्री ने उनकी एक अलग साख बना दी है. वे न केवल मिल का संचालन कर रही हैं, बल्कि अपनी छोटी सी दुकान के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं तक शुद्ध सामान पहुंचाकर स्वास्थ्य और स्वाद दोनों का ख्याल रख रही हैं.
आर्थिक समृद्धि और भविष्य की प्रेरणा
वित्तीय दृष्टि से देखा जाए तो सुनैना देवी का यह उद्यम बेहद सफल साबित हो रहा है. सभी खर्चों और लेबर की मजदूरी निकालने के बाद वे प्रतिदिन लगभग ₹1500 से ₹2000 तक की कमाई कर लेती हैं. इस हिसाब से वे हर महीने 40 से 50 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं, जो किसी भी ग्रामीण लघु उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. उनकी इस सफलता ने उनके पूरे परिवार के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है.
नीलम देवी का कहना है कि आत्मनिर्भरता से न केवल आर्थिक मजबूती आती है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है. उनकी यह ‘सक्सेस स्टोरी’ आज सीतामढ़ी की अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रही है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो संसाधन और समाज कभी बाधा नहीं बनते.
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