चांदी, तांबा या कांसा? एक बर्तन से बदलेगी आपकी सेहत की पूरी कहानी

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डॉ राजकुमार (आयुष) ने कहा कि पानी पीने का तरीका जितना जरूरी है, उतना ही अहम है कि पानी किस बर्तन में रखा और पिया जा रहा है. भारतीय परंपरा में चांदी, तांबा और कांसा जैसे धातु के बर्तनों का खास महत्व रहा है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि बर्तन की धातु पानी के गुणों को प्रभावित करती है. 

पानी पीने का तरीका जितना जरूरी है, उतना ही अहम है कि पानी किस बर्तन में रखा और पिया जा रहा है. भारतीय परंपरा में चांदी, तांबा और कांसा जैसे धातु के बर्तनों का खास महत्व रहा है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि बर्तन की धातु पानी के गुणों को प्रभावित करती है. आज के समय में लोग फिर से इन पारंपरिक बर्तनों की ओर लौट रहे हैं, ताकि सेहत को प्राकृतिक तरीके से बेहतर बनाया जा सके.

Ayurveda metal vessels for water

चांदी के बर्तन में रखा पानी सबसे शुद्ध माना जाता है. चांदी में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करते हैं. यह इम्युनिटी को मजबूत करता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है. छोटे बच्चों और बीमार लोगों के लिए चांदी का पानी खास तौर पर लाभकारी माना जाता है. हालांकि चांदी के बर्तन महंगे होते हैं, इसलिए हर किसी के लिए यह विकल्प आसान नहीं होता.

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तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की परंपरा भारत में सदियों पुरानी है. तांबा पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. नियमित रूप से तांबे का पानी पीने से वजन नियंत्रित रहता है और पेट की समस्याएं कम होती हैं. यह शरीर में आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाता है. हालांकि अधिक मात्रा में तांबे का पानी पीना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है.

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आज के समय में प्लास्टिक और स्टील के बर्तनों का चलन बढ़ गया है, लेकिन इनके मुकाबले धातु के पारंपरिक बर्तन ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं. प्लास्टिक से निकलने वाले केमिकल सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. वहीं स्टील तटस्थ होता है, लेकिन कोई अतिरिक्त औषधीय लाभ नहीं देता. ऐसे में चांदी, तांबा और कांसा स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर विकल्प साबित होते हैं.

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हर व्यक्ति की सेहत और जरूरत के अनुसार बर्तन का चुनाव अलग हो सकता है. अगर इम्युनिटी कमजोर है तो चांदी का पानी फायदेमंद हो सकता है. पाचन संबंधी समस्याओं और वजन नियंत्रण के लिए तांबे का बर्तन बेहतर माना जाता है. वहीं संतुलित और दीर्घकालिक लाभ के लिए कांसे का बर्तन अच्छा विकल्प है. सही धातु का चुनाव शरीर की जरूरत को समझकर करना चाहिए.

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कांसा तांबा और टिन का मिश्रण होता है और इसे बेहद संतुलित धातु माना जाता है. कांसे के बर्तन में रखा पानी शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करता है. यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और जोड़ों के दर्द में भी लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार कांसा लंबे समय तक पानी पीने के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है.

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धातु के बर्तनों का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं. तांबे और कांसे के बर्तन को नियमित रूप से सही तरीके से साफ करना चाहिए. ज्यादा देर तक पानी रखना भी नुकसानदायक हो सकता है. चांदी के बर्तन में भी केमिकल क्लीनर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. संतुलित मात्रा और सही देखभाल से ही इन बर्तनों का पूरा लाभ मिलता है.

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