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एक ऐसा पौधा जो पथरी से लेकर पेट, कान और त्वचा तक कई समस्याओं में राहत देने की क्षमता रखता है, उसे पत्थरचट्टा कहा जाता है. आयुर्वेद में इसका खास महत्व है, खासकर किडनी स्टोन और मूत्र संबंधी दिक्कतों के लिए. हालांकि, इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
पत्थरचट्टा की पत्तियों में ऐसे तत्व होते हैं, जो पथरी को धीरे-धीरे घुलने या छोटे टुकड़ों में टूटने में सहायक बनते हैं. खासतौर पर यह कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन में बेहद उपयोगी है. इसके नियमित और सीमित मात्रा में सेवन से मूत्र मार्ग साफ रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेनी बहुत जरूरी है.
पत्थरचट्टा का सेवन मूत्र में जलन, सूजन, यूटीआई और बार-बार पेशाब आने जैसी दिक्कतों में राहत दे सकता है. यह शरीर से अतिरिक्त विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने में सहायक माना जाता है. इसकी पत्तियों का रस हल्के मूत्र संक्रमण में उपयोग किया जाता है. फिर भी तेज दर्द, बुखार या खून आने की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद जरूरी है.
पत्थरचट्टा पेट फूलना, गैस, अपच या अल्सर जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेदिक परंपरा में इसकी ताजी पत्तियों का सेवन पाचन सुधारने के लिए किया जाता है. यह बवासीर में भी आरामदायक हैं. इसमें तमाम गुण पाए जाते हैं, जो पेट की अंदरूनी सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं.
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पत्थरचट्टा की पत्तियों का लेप लगाने से घाव, फोड़े-फुंसियों और हल्की चोट ठीक हो जाती है. इसके सेवन से सूजन कम होती है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते है. यह जोड़ों के दर्द या गठिया में बाहरी रूप से बेहद उपयोगी हैं. इसके ताजे पत्ते को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से ठंडक मिलती है.
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, यह कान दर्द या कान बहने की परेशानी में भी उपयोगी है. इसकी पीली पत्तियों को हल्का गर्म कर उनका रस निकालकर, इस रस की एक-दो बूंद कान में डालने से राहत मिलती है. हालांकि, यह उपाय बेहद सावधानी से करना चाहिए.
पत्थरचट्टा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है. इसके अलावा, यह ब्लड शुगर में भी उपयोगी है. हालांकि इसका सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए. शुगर मरीजों को किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
आमतौर पर इसकी ताजी पत्तियों को सुबह खाली पेट धोकर चबाने या एक पत्ता मिश्री के साथ पीसकर पानी में मिलाकर लेते हैं. यही नहीं, इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर भी सेवन किया जाता है. लेकिन ध्यान रहे, अधिक मात्रा में सेवन नुकसान हो सकता है. गर्भवती महिलाएं, बच्चे या गंभीर रोगी इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लें.