एक हाथ, लेकिन हौसले पूरे! छतरपुर का आइसक्रीम बेचने वाला बना इंटरनेशनल क्रिकेटर

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एक हाथ, लेकिन हौसले पूरे! छतरपुर का आइसक्रीम बेचने वाला बना इंटरनेशनल क्रिकेटर

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Shahid khan success story : छतरपुर के दिव्यांग शहीद ने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बना ली है. शहीद 4 अप्रैल को श्रीलंका T20 क्रिकेट खेलने जाएंगे. इंडिया के साथ श्रीलंका और बांग्लादेश भी खेलेगी. यह सीरीज 4 अप्रैल से श्रीलंका के कोलंबो में 7 अप्रैल तक खेली जाएगी.

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CHHATARPUR CRICKETER SHAHID KHAN :  आज हम आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं जिनका जन्म तो एक गरीब परिवार में हुआ. लेकिन सपने बड़े देखे थे. हालांकि, यह एक हांथ से अपंग थे. इनके पिता परिवार के पालन-पोषण के लिए मजदूरी करते थे. पिता को मजदूरी देख शहीद भी पढ़ाई छोड़ काम करने लगे. शहीद हांथ से अपंग थे तो साइकिल से आइसक्रीम बेचने का काम शुरू कर दिया.
शहीद आइसक्रीम बेचने के साथ ही क्रिकेट भी खेलते रहे. उन्हें जब भी खाली समय मिलता वह क्रिकेट खेलने लगते. वह भोपाल और बिहार भी क्रिकेट खेलने जा चुके हैं. लेकिन सपना सालों बाद आज पूरा हुआ है.

दरअसल, सालों की मेहनत के बाद दिव्यांग शहीद का इंडियन पैरा क्रिकेट टीम में सिलेक्शन हुआ है.‌अब वह श्रीलंका में अपने बल्ले से करतब दिखाएंगे. शहीद ने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाई है. शहीद 4 अप्रैल को श्रीलंका T20 क्रिकेट खेलने जाएंगे. इंडिया के साथ श्रीलंका और बांग्लादेश भी खेलेगी. यह सीरीज 4 अप्रैल से श्रीलंका के कोलंबो में 7 अप्रैल तक खेली जाएगी. श्रीलंका जाने से पहले शहीद ने बताई अपनी संघर्ष की कहानी.

शहीद लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि वह कक्षा 8वीं तक ही पढ़ें हैं. पिता दिहाड़ी करते हैं. पिता ईंटगारा का काम करते हैं. घर की आर्थिक हालत खराब है तो मैं भी काम करने लगा था.

आइसक्रीम बेचकर खेलते थे क्रिकेट
शहीद बताते हैं वह अपने गांव तालगांव से 22 किमी दूर राजनगर आइसक्रीम (बर्फ आइसक्रीम) लेने जाते था. फिर गांव-गांव बेचता था. शाम 4 बजे तक आइसक्रीम बेचता था फिर क्रिकेट खेलता था. शरीर में दिव्यांगता थी लेकिन कभी भी इसे कमजोरी नहीं समझा और आगे बढ़कर टेनिस की बॉल से क्रिकेट खेलता रहा. मुझे जितना भी खाली समय मिलता था. मैं उस खाली समय में क्रिकेट खेलता था.

लोग मारते थे ताने
शहीद बताते हैं कि भले ही आज मेरा सेलेक्शन इंडिया की पैरा क्रिकेट टीम में हो गया है लेकिन मैंने ताने भी बहुत सुने हैं. गांव के लोग बोलते थे – जब दो हांथ वाले नहीं अच्छे से खेल पाते तो तू क्या अच्छा खेलेगा. इस तरह के ताने भी मारे जाते थे.

जहां भी खेलने गए, गांव की पहचान बनाई
शहीद बताते हैं कि वह गांव में खेलते थे, अच्छा प्रदर्शन करते थे.‌ साथी खिलाड़ी भी सपोर्ट करते थे. वह हमेशा यही कहते थे कि तू एक हांथ से भी अच्छी गेंदबाजी कर लेगा. वह यही कहते थे कि तू अच्छा ही करेगा विश्वास है. शहीद बताते हैं कि वह जहां भी खेलने गए वहां अच्छा प्रदर्शन ही किया. वहां अपने गांव की पहचान बनाकर ही आया.

चोटिल होने पर भी प्लेयर ऑफ द मैच बने
ऑलराउंडर शहीद बताते हैं वह पटना सहित एमपी के हर जिले में अपना जलवा दिखा चुके हैं. बिहार पटना में मध्यप्रदेश की तरफ से भी वह खेलने जा चुके हैं. वहां हमनें फाइनल मैच जीता था. इसके बाद भोपाल में 100 घंटे लगातार क्रिकेट के आयोजन में भी बढ़िया प्रदर्शन किया था, जिसमें 2 मैच में 10 विकेट चटकाए थे. हालांकि, खेलने के दौरान चोटिल भी हुए लेकिन फिर भी प्लेयर ऑफ द मैच बना था.

श्रीलंका में खेलेंगे क्रिकेट
सालों की मेहनत के बाद छतरपुर के दिव्यांग शहीद ने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बना ली है. शहीद 4 अप्रैल को श्रीलंका T20 क्रिकेट खेलने जाएंगे. इंडिया के साथ श्रीलंका और बांग्लादेश भी खेलेगी. यह सीरीज 4 अप्रैल से श्रीलंका के कोलंबो में 7 अप्रैल तक खेली जाएगी.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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