5 kg बीज में बो दिया एक बीघा खेत, फसल लहलाहाई, गेहूं की ‘विदेशी खेती’ देख सब चौंके!

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5kg बीज में बो दिया एक बीघा खेत, फसल लहलाहाई, गेहूं की ‘विदेशी खेती’ देख चौंके

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Gehun Kheti: मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक किसान ने कमाल कर दिया. अमूमन गेहूं खेती में एक बीघा में 40 किलो बीज लग जाता है. लेकिन, इस किसान ने 5 किलो बीज से एक बीघे में फसल लहलहा दी. कहा, ये विदेशी प्रयोग है. अब किसान इस प्रयोग को देखने जा रहे हैं.

Shivpuri News: शिवपुरी के करैरा क्षेत्र से खेती को लेकर एक दिलचस्प पहल सामने आई है. यहां के प्रगतिशील किसान ने खेत में गेहूं की ऐसी पद्धति अपनाई है, जिसे वे इजरायली तकनीक से प्रेरित बताते हैं. उनका कहना है कि इस तरीके से बहुत कम बीज लगाकर भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है. यही वजह है कि आसपास के गांवों के किसान उनके खेत पर फसल को देखने और समझने के लिए पहुंच रहे हैं. किसान उमेश मिश्रा के अनुसार, आमतौर पर एक बीघा खेत में 30 से 40 किलो गेहूं का बीज लगता है.

लेकिन, इस नई पद्धति में उन्होंने प्रति बीघा करीब 5 किलो बीज का उपयोग किया है. इससे बीज की लागत में बड़ी कमी आई है. बुवाई का समय भी अक्टूबर से नवंबर रखा गया, ताकि फसल सामान्य गेहूं के साथ ही तैयार हो जाए और अतिरिक्त मेहनत की जरूरत न पड़े. किसान का कहना है कि इस किस्म में टिलरिंग ज्यादा होती है. एक दाने से 50 से 60 तक बालियां विकसित होने की संभावना रहती है. हालांकि, वास्तविक उत्पादन का आंकड़ा कटाई के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन अभी खेत में फसल की बढ़वार उन्हें उत्साहित कर रही है.

मददगार हो सकता है ये प्रयोग
खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए यह प्रयोग किसानों के लिए अहम माना जा रहा है. डीजल, खाद, मजदूरी और बीज की बढ़ती कीमतों के बीच यदि कम बीज में समान या ज्यादा उत्पादन संभव हो, तो यह किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है. उमेश मिश्रा ने कतारबद्ध बुवाई, पौधों के बीच उचित दूरी और खेत की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया है.

अनोखी खेती देखने पहुंच रहे किसान
इस प्रयोग को देखने आसपास के कई किसान खेत पर पहुंच रहे हैं. वे पौधों की संख्या, कतारों की दूरी और फसल की स्थिति का बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं. कृषि जानकारों का भी मानना है कि उन्नत बीज और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. उमेश मिश्रा का यह पहला प्रयोग है. उनका कहना है कि यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक रहे, तो वे अगले सीजन में इस पद्धति का रकबा बढ़ाएंगे. उनका उद्देश्य केवल अपनी पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि दूसरे किसानों को भी नई तकनीक के प्रति जागरूक करना है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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