Last Updated:
पूर्व WWE रेसलर और स्पोर्ट्स स्टार रहे रिंकू राजपूत, जिन्हें रिंग में ‘वीर महान’ के नाम से जाना जाता था, अब पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन अपना चुके हैं. ग्लैमर और ताकत की दुनिया छोड़कर वे वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के सान्निध्य में रह रहे हैं और सादगी भरा जीवन जी रहे हैं. इतनी बड़ी कद-काठी होने के बावजूद अब वे दिनभर में बेहद कम भोजन लेते हैं. आइए जानते हैं पूरी कहानी… (Photo- realrinkurajput/Instagram)
पूर्व WWE रेसलर और इंटरनेशनल स्पोर्ट्स स्टार रहे रिंकू राजपूत, जिन्हें दुनिया ‘वीर महान’ के नाम से जानती थी, अब पूरी तरह अलग राह पर चल पड़े हैं. ताकत, शोहरत और ग्लैमर से भरी जिंदगी छोड़कर उन्होंने अध्यात्म को अपना लिया है. आज वे वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के सान्निध्य में रहते हैं और उनके शिष्यों में शामिल हैं.

हाल ही में एक प्रवचन के दौरान प्रेमानंद महाराज ने रिंकू के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इच्छाओं पर नियंत्रण करके इंसान अपनी जीवनशैली पूरी तरह बदल सकता है.

करीब 6 फुट 4 इंच लंबाई और लगभग 125 किलो वजन वाले रिंकू जैसी कद-काठी के व्यक्ति से आमतौर पर भारी डाइट की उम्मीद की जाती है. लेकिन अब उनकी दिनचर्या बिल्कुल उलट है. महाराज के अनुसार, रिंकू अब पूरे दिन में सिर्फ डेढ़ रोटी खाते हैं और इसके बावजूद पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

यह सुनकर लोग हैरान हो जाते हैं, लेकिन महाराज का कहना है कि शरीर जरूरत से ज्यादा नहीं, बल्कि आदत से ज्यादा मांग करता है. जब इच्छाओं पर लगाम लगती है, तो शरीर खुद को कम में ढाल लेता है.

प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में यह भी बताया कि इंसान नींद, भोजन, बोलचाल और सांसारिक सुखों को अपने अभ्यास से घटा या बढ़ा सकता है. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पहले 30–35 रोटियां खा लेता था, वह आज डेढ़ रोटी में संतुष्ट है. जो पहले 7–8 घंटे सोता था, वह अब 3 घंटे की नींद में पूरा दिन काम कर लेता है.

प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, संयम और साधना से यह सब संभव है. महाराज ने यह भी समझाया कि बोलना सबसे आसान काम है, लेकिन मौन रहना सबसे कठिन. उन्होंने कम बोलने, कम खाने और कम सोने की सलाह दी. उनका कहना है कि जब भजन-कीर्तन और साधना में मन लगने लगता है, तो आलस अपने आप दूर हो जाता है. मोबाइल और बेकार की चीजों से दूरी बनने लगती है, क्योंकि धीरे-धीरे सांसारिक आकर्षण झूठे लगने लगते हैं.

अगर रिंकू के शुरुआती जीवन की बात करें, तो उनकी कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. रिंकू का जन्म उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के गोपीगंज में हुआ. उनके पिता ट्रक ड्राइवर थे और परिवार में कुल आठ भाई-बहन थे. सभी एक छोटे से कमरे में रहते थे. घर में बिजली तो थी, लेकिन पानी कुएं से लाना पड़ता था. सीमित संसाधनों के बावजूद रिंकू का झुकाव खेलों की ओर रहा.

बचपन में उन्होंने जैवलिन थ्रो, क्रिकेट और दूसरे खेलों में हाथ आजमाया. जैवलिन थ्रो में उन्होंने जूनियर लेवल पर नेशनल मेडल भी जीता. इसके बाद उन्होंने गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ से पढ़ाई की. साल 2008 में रियलिटी शो ‘मिलियन डॉलर आर्म’ जीतकर वे प्रोफेशनल बेसबॉल खेलने वाले पहले भारतीय बने. खास बात यह थी कि वे शाकाहारी रहते हुए भी शानदार फिटनेस बनाए रखते थे और घर का साधारण खाना ही खाते थे.

2018 में रिंकू ने WWE में एंट्री की और ‘वीर महान’ के नाम से पहचान बनाई. रिंग में उतरते वक्त रुद्राक्ष की माला और तिलक उनकी अलग पहचान बन गए. अब वही रिंकू राजपूत पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन में रम चुके हैं. वे आश्रम में सेवा करते हैं, प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संभालते हैं और सादगी भरा जीवन जी रहे हैं. उनकी यह यात्रा बताती है कि इंसान चाहे तो अपनी जिंदगी की दिशा कभी भी बदल सकता है.