कभी करते थे मजदूरी आज बने मालिक! 270 साल पुरानी परंपरा ने बदली जिंदगी, 150 लोगों को दे रहे रोजगार

Last Updated:

Ashok Chauhan Success Story: महेश्वर की माहेश्वरी साड़ियां आज देश से लेकर विदेशों तक अपनी शाही पहचान बना चुकी हैं. केरियाखेड़ी गांव के बुनकर अशोक चौहान ने मजदूरी से शुरुआत कर आज सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया है. हाथों से बुनी इन साड़ियों में महेश्वर किले की झलक और पारंपरिक कला दिखाई देती है. सरकारी योजनाओं और मेहनत के दम पर उनका छोटा कारखाना बड़े उद्योग में बदल गया. यह कहानी न सिर्फ सफलता की है, बल्कि ग्रामीण रोजगार और परंपरा को बचाने की मिसाल भी है.

दीपक पांडेय / खरगोन: मध्यप्रदेश के महेश्वर में बनने वाली माहेश्वरी साड़ियां आज सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं. शाही परंपरा, हाथों की बुनाई और खास डिजाइन यही इन साड़ियों की सबसे बड़ी ताकत है. इस परंपरा को जिंदा रखने वालों में केरियाखेड़ी गांव के बुनकर अशोक चौहान का नाम आज मिसाल बन चुका है. कभी दूसरों के यहां मजदूरी करने वाले अशोक आज एक बड़े कारखाने के मालिक हैं, जहां 150 से ज्यादा महिला और पुरुषों को स्थायी रोजगार मिल रहा है और हर महीने लाखों की साड़ियां बिक रही हैं.

हाथों से बुनी शाही पहचान
माहेश्वरी साड़ियों की सबसे बड़ी खासियत इनका पारंपरिक निर्माण तरीका है. ये साड़ियां पूरी तरह हैंडलूम पर हाथों से बुनी जाती हैं, जिसमें कई दिन लग जाते हैं. हर धागा बुनकर की मेहनत और कला को दर्शाता है. खासतौर पर साड़ियों के पल्लू और बॉर्डर पर बने महेश्वर किले की नक्काशी इन्हें रॉयल लुक देती है. मशीन से बनी साड़ियों के इस दौर में भी माहेश्वरी साड़ियों की मांग लगातार बनी हुई है.

270 साल पुरानी परंपरा
करीब 270 साल पहले महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा शुरू किया गया माहेश्वरी उद्योग आज महेश्वर को विश्व पटल पर पहचान दिला रहा है. यह उद्योग हजारों लोगों के लिए रोजगार का जरिया बना हुआ है. इसी परंपरा से प्रेरित होकर अशोक चौहान ने साल 1997 में महेश्वर में प्रशिक्षण लिया और इस कला को अपनाया.

मजदूरी से कारखाने तक का सफर
शुरुआती दिनों में अशोक चौहान ने दूसरों के यहां मजदूरी कर साड़ियां बनाईं. बाद में सरकारी योजनाओं की मदद से उन्हें पांच हैंडलूम मिले और चार दोस्तों के साथ गांव में छोटा सा कारखाना शुरू किया. मेहनत और धैर्य का नतीजा यह रहा कि आज उनके पास 23 से ज्यादा हैंडलूम हैं और उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है.

50 से ज्यादा डिजाइन, लाख तक की साड़ी
अशोक चौहान बताते हैं कि उनके कारखाने में 50 से 60 अलग-अलग डिजाइनों की माहेश्वरी साड़ियां बनाई जाती हैं. सामान्य साड़ियों की कीमत 3 हजार से 8 हजार रुपये तक होती है, जबकि खास ऑर्डर पर बनी साड़ियां एक लाख रुपये से ज्यादा में भी तैयार की जाती हैं. उनकी साड़ियां देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी सप्लाई होती हैं.

150 से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार
मध्यप्रदेश सरकार के सहयोग से अशोक चौहान दुबई समेत कई देशों में आयोजित प्रदर्शनियों में हिस्सा ले चुके हैं. इससे माहेश्वरी साड़ियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली. उनके कारखाने में काम करने वाले 150 से ज्यादा लोग उसी गांव के हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं. खास बात यह है कि अशोक आज भी नए लोगों को मुफ्त में प्रशिक्षण देकर इस परंपरागत कला से जोड़ रहे हैं.

About the Author

shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

homebusiness

कभी करते थे मजदूरी आज बने मालिक! 150 लोगों को दे रहे रोजगार

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *