कभी लोन लेकर शुरू किया था सफर, आज 20 लोगों के मालिक, सालाना टर्नओवर 10 लाख पार!

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Furniture Business Success Story: सागर जिले के खिमलासा गांव के 35 वर्षीय युवक ने 20 लाख रुपये का लोन लेकर फर्नीचर निर्माण यूनिट शुरू की और आज 20 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. कभी इलेक्ट्रिकल्स की छोटी दुकान चलाने वाले इस युवा ने चार साल में अपना पूरा लोन चुका दिया है. उनकी यूनिट में पलंग, सोफा, अलमारी और कूलर जैसे सामान तैयार होते हैं जिनकी डिमांड दूर-दूर तक है. गांव में रहकर सालाना 8 से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहे इस युवक की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है. जानिए कैसे सही प्लानिंग, क्वालिटी और मेहनत ने बदल दी एक छोटे दुकानदार की तकदीर.

अनुज गौतम, सागर: मध्यप्रदेश के सागर जिले के खिमलासा गांव के 35 साल के भगत सिंह कुशवाहा आज कई युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं. कभी इलेक्ट्रिकल्स की छोटी सी दुकान चलाने वाले भगत सिंह ने हालात से हार नहीं मानी. परिवार बड़ा हुआ तो दुकान की आमदनी कम पड़ने लगी. ऐसे में उन्होंने कुछ बड़ा करने की ठानी और यही फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया.

20 लाख का लोन… और शुरू हुई नई उड़ान
भगत सिंह बताते हैं कि उनकी करीब 20 साल पुरानी इलेक्ट्रिकल्स की दुकान थी, जिसे वे अपने भाई के साथ मिलकर चलाते थे. लेकिन खर्च बढ़ने लगे तो उन्होंने फर्नीचर का काम जोड़ दिया. शुरुआत में रेडीमेड फर्नीचर खरीदकर बेचते थे, मगर मुनाफा कम था.

तभी उद्योग विभाग से 20 लाख रुपये का लोन लेने की जानकारी मिली. उन्होंने लोन लिया, जिसमें 7.5 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिली. करीब चार साल पहले फर्नीचर निर्माण यूनिट शुरू की. आज हालत ये है कि पूरा लोन चुका दिया गया है और सारी ईएमआई क्लियर हो चुकी हैं.

गांव में लगी यूनिट, डिमांड शहरों तक
सबसे दिलचस्प बात ये है कि उनकी यूनिट और दुकान सागर से करीब 70 किलोमीटर दूर गांव में है. फिर भी उनके फर्नीचर की डिमांड दूर-दूर तक है. एक जगह लकड़ी और प्लाई का काम होता है, तो दूसरी जगह कूलर, अलमारी, पलंग, पेटी जैसे सामान तैयार किए जाते हैं. उनकी यूनिट में पलंग, सोफा सेट, डाइनिंग टेबल, अलमारी और कूलर जैसे आइटम तैयार होते हैं.

20 लोगों को रोजगार, खुद 8-10 लाख सालाना कमाई
आज उनकी यूनिट में 15 से 20 कर्मचारी काम कर रहे हैं. चार जगह थोक में सप्लाई होती है और बाकी सामान अपनी दुकान से बेचा जाता है. शादी का सीजन और गर्मी का समय आने से डिमांड और बढ़ गई है. हालात ऐसे हैं कि कई ऑर्डर लेने से मना करना पड़ता है क्योंकि कारीगरों की कमी है. जो कारीगर आज उनके साथ काम कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर को उन्होंने खुद ट्रेनिंग दी है. आज भगत सिंह सालाना 8 से 10 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं.

क्या कहते हैं भगत सिंह?
उनका साफ कहना है कि काम अगर सच्चे मन से किया जाए तो गांव में भी बिजनेस दौड़ता है. थोड़े पैसों के लालच में क्वालिटी से समझौता नहीं करना चाहिए. जब काम अच्छा होता है तो ग्राहक खुद जुड़ते जाते हैं. उनकी कहानी बताती है कि हौसला और सही प्लानिंग हो तो छोटा शहर या गांव कभी रुकावट नहीं बनता.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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