नई दिल्ली. सफलता कभी अचानक नहीं मिलती. इसे पाने के लिए संघर्ष, हिम्मत, हार के बीच खड़े रहने की क्षमता और खुद पर अटूट भरोसा चाहिए. जो डटा रहता है, वो अपनी मंजिल पा ही लेता है. विभांशु मिश्रा इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. होटल मैनेजमेंट में करियर बनाने की चाह रखने वाले मिश्रा को इंटरर्नशिप के दौरान पूरे एक महीने बाथरूम साफ करना पड़ा था. नौकरी छोड़कर जब उन्होंने अपना बिजनेस शुरू किया तो दस दिन बाद ही देश में लॉकडाउन लग गया. हिम्मत करके फिर काम शुरू किया तो कोरोना की दूसरी लहर ने फिर उनके फूड काउंटर्स पर ताले लगवा दिए. नतीजा वे कर्ज में डूब गए. लेकिन, अपने मां के एक सफल होटल व्यवसायी बनने के सपने को उन्होंने फिर भी मरने नहीं दिया और हर परिस्थितियों से जूझते हुए 120 करोड़ की कपंनी खड़ी कर दी.
आज, विभांशु की फूड कपंनी, VVM Restaurant Consultants के 250 से अधिक आउटलेट पूरे भारत में हैं और कनाडा में भी काम शुरू कर दिया है. सैकड़ों करोड़ का वार्षिक कारोबार करने वाले समूह में चालू चाइनीज, “VV Burger” और “Banaras Wala” जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं. दिल्ली NCr, पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और यूपी सहित कई राज्यों में उनका कारोबार फैला है. अपनी मां की याद में खोला गया “Banaras Wala” उनके जीवन की सबसे भावुक उपलब्धि साबित हुआ. उद्घाटन के दिन उनके पिता ने 35 साल बाद उन्हें गले लगाया था. विभांशु कहते हैं कि उसी पल उनकी पूरी यात्रा पूर्ण हो गई.
सातवीं कक्षा में आए बस 49 फीसदी नंबर
विभांशु के पिता एक नामी स्कूल के वाइस-प्रिंसिपल थे. वे चाहते थे कि उनका बेटा क्लास में अव्वल आए. लेकिन विभांशु औसत छात्र थे. उनकी मार्कशीट शायद उनके इरादों की तुलना में कमज़ोर थी. सातवीं में सिर्फ उनके 49%नंबर आए. इससे पिता-पुत्र के बीच दूरी आ गई. बचपन में वे अपनी मां के सबसे प्रिय थे. उनके पड़ोस में रहने वाले एक लड़के ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया था और साउथ अफ्रीका चला गया. उनकी मां उससे बहुत प्रभावित हुई और विभांशु को भी होटल मैनेजमेंट को ही अपना करियर बनाने को कहा.
बाप के साथ उनकी ज्यादा बनती नहीं थी और 12वीं की परीक्षा से पहले विभांशु की मां की मौत हो गई. यह सदमा इतना भारी था कि वे 12वीं में फेल हो गए और बाद में किसी तरह 42% अंकों के साथ सप्लीमेंटरी से पास हुए. लेकिन उनकी मां का सपना—“होटल मैनेजमेंट करना” उनके दिल में हमेशा के लिए अंकित हो गया.
बैच में किया टॉप
होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई शुरू करते ही उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदल दी. पहले ही साल में उन्होंने पूरे बैच में टॉप किया—वह भी शानदार 94.2% अंकों के साथ. इसी दौरान उन्हें ITC दार्जिलिंग में ट्रेनिंग मिली. वहां उन्हें पूरे एक महीने ट्रेनिंग के नाम पर वॉशरूम साफ करने का काम मिला. इस काम के बदले उन्हें 500 रुपये मिले.
बहरीन में की नौकरी
पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने नागपुर के प्राइड होटल में नौकरी शुरू की. फिर एक दोस्त के जरिए बहरीन में नौकरी का मौका मिला, जहाँ वे एक छोटे से खाने-पीने के सेक्शन में काम करते थे. वे शाकाहारी थे, फिर भी प्रमोशन पाने के लिए उन्होंने चिकन और अन्य नॉनवेज आइटम्स सर्व करना सीख लिया. उनकी लगन और कार्यशैली ने जल्द ही उन्हें प्रमोशन दिलाया और 50 दिनार (करीब 15,000 रुपये) की बढ़ोतरी मिली. इसके बाद उनके कैरियर के दरवाजे दुनिया के लिए खुलने लगे. बाद में उन्होंने दुबई, अमेरिका और कनाडा में भी नौकरी की.
पिता को हुआ कैंसर तो लौटे भारत
सब कुछ ठीक चल रहा था. लेकिन, अचानक विभांशु के पिता को कैंसर हो गया. उन्हें भारत लौटना पड़ा. पिता के ऑपरेशन के बाद जब वे होश में आए, उन्होंने सिर्फ एक बात कही—“तू मेरा बेटा है, यहीं रह. कहीं मत जाना.” यही एक वाक्य विभांशु के जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया. उन्होंने विदेश की नौकरी छोड़ दी और हमेशा के लिए भारत में रहने का फैसला कर लिया.
भारत लौटकर उन्होंने पहले गोवा में नौकरी की, फिर देश की एक बड़ी फूड और बेवरेज कंपनी में सीनियर जनरल मैनेजर बने. यहाँ उन्होंने ब्रांडिंग, मार्केटिंग, ऑपरेशन और बिजनेस मैनेजमेंट की गहरी समझ विकसित की. एक साल बाद उनके मन में विचार आया कि जब वे दूसरों के लिए ब्रांड बना सकते हैं तो खुद का क्यों नहीं.
नागपुर में खोला पहला आउटलेट
14 फरवरी 2020 को उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी VVM Restaurant Consultants रजिस्टर की. 10 मार्च 2020 को नागपुर में “Chalu Chinese” का पहला आउटलेट खोला. लेकिन किस्मत ने फिर एक झटका दिया और 10 दिन बाद पूरे देश में कोरोना लॉकडाउन लग गया. महीनों तक दुकान बंद रही. जुलाई 2020 में दोबारा शुरुआत की और धीमी रफ्तार से ही सही, व्यापार बढ़ने लगा. दिसंबर 2020 में दूसरा आउटलेट खोला. फिर रायपुर और भरूच में भी काम शुरू किया.
यह आसान नहीं था. जुलाई 2021 तक वे करीब 1.5 करोड़ के कर्ज में डूब चुके थे. लेकिन वे रुके नहीं. उन्होंने अपनी रणनीति बदली. दाम घटाए, लोकप्रिय आइटम्स बढ़ाए, और ग्राहकों की पसंद को समझकर नए तरीके अपनाए. और तब चमत्कार हुआ. जुलाई से दिसंबर 2021 के बीच सिर्फ छह महीनों में उन्होंने 13 नए आउटलेट खोल दिए. यह फूड इंडस्ट्री में एक रिकॉर्ड जैसा था. आज उनकी कंपनी का सैंकड़ों करोड़ का टर्न ओवर है.
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