पूर्णिमा की रात… चोर के चंगुल से बच्चे को यूं छुड़ाया, ऐन मौके पर डॉक्टर और स्टाफ ने जान पर खेल बचाई जिंदगी

World Patient Safety Day 2025: देशभर में हर साल 17 सितंबर को विश्व मरीज सुरक्षा दिवस (World Patient Safety Day) मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य दुनियाभर में मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और हेल्थ सिस्टम में होने वाली गलतियों को कम करने के लिए जागरुकता फैलाना है. इस दिन को सेलिब्रेट करने की शुरुआत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने साल 2019 में की थी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जा सके और मरीजों को सुरक्षित इलाज मिल सके.

पेशेंट सेफ्टी में नर्स और डॉक्टर्स की भूमिका सबसे अहम होती है. मरीज के इलाज की प्रक्रिया में सबसे पहले और आखिरी तक वही शामिल होते हैं. डॉक्टर सही इलाज तय करते हैं और नर्सें दिन-रात मरीज की देखभाल करती हैं. समय पर दवाएं देना, समय पर चेकअप करना, साफ-सफाई का ध्यान रखना और इमरजेंसी में तुरंत प्रतिक्रिया देना, ये सब पेशेंट सेफ्टी का ही हिस्सा हैं. हालांकि, कई बार कुछ अचानक ऐसे गंभीर मामले हो जाते हैं, उस वक्त अगर डॉक्टर्स स्टाप तत्परता न दिखाए तो बच्चे की जान भी जा सकती है. ऐसा ही एक मामला नोएडा सेक्टर 110 भंगेल की सीएची में देखने को मिला. इस सच्ची घटना को हमारे साथ शेयर कर रही हैं नोएडा की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक ने-

डॉ. मीरा पाठक…., जिन्होंने सच्ची आंखों देखी घटना को शेयर किया.
अस्पताल की सतर्कता से बची एक मासूम की जान

पूर्णिमा की रात और चोर से पंगा

बात करीब 3 साल पहले की है. पूर्णिमा की रात थी, अंधेरी रात में चांद पूरे सुरूर में था. समय रहा होगा करीब रात के 10 बजे. डिलीवरी रूम में डॉक्टर, नर्स और आशा वर्कर्स अपनी ड्यूटी पर थीं. उस वक्त 3 महिलाओं की डिलीवरी होनी थी. अस्पताल के नियम के मुताबिक, रात के समय डिलीवरी रूम में एक महिला तीमारदार को रुकने की इजाजत दी जाती है. इसलिए सभी के साथ कोई न कोई महिला थी. बस इसी का फायदा उठाकर एक चोर भी महिला के वेश में वहां आ धमका.

पीले रंग की साड़ी और लंबा घूंघट

डिलीवरी रूम में जब चोर पहुंचा तो उस दौरान चोर ने पीले रंग साड़ी पहनी हुई थी. होंठों पर गहरी लिपिस्टिक और लंबा सा घूंघट डाल रखा था. सिर पर लंबा साड़ी का पल्लू होने से अस्पताल स्टाप उसे नहीं पहचान सका. हालांकि, उसकी हरकतें लोगों को सोचने पर जरूर मजबूर कर रही थीं. क्योंकि, जैसे ही किसी महिला की डिलीवरी होती थी वह वहां पहुंचकर गौर से निहारने लगता था.

चोर की हरकतों से घूमी शक की सुई

डिलीवरी रूम में चोर जिस तरह वेष बदलकर आया था, उससे वह पहचान में तो नहीं आ सका. लेकिन, उसकी अजीब हरकतों ने अस्पताल स्टाफ को चौकन्ना जरूर कर दिया. वह चोर लगातार इधर-उधर घूमे जा रहा था. कभी डिलीवरी हो रही महिला के पास जाता तो कभी आसपास को ताकने-झांकने लगता. इसपर वहां मौजूद एक आशा वर्कर ने उसे टोकते हुए कहा कि आप कौन हैं. इसपर वह बिना कुछ बोले वहां रखे जनरेटर के पास चला गया.

डॉक्टर और आला स्टाफ को दी जानकारी

चोर की हरकतें और पूछने पर जवाब न मिलने पर आशा वर्कर सचेत हो गई. उसके बिना किसी देरी के फौरन डॉक्टर को जानकारी दी. इसके बाद सभी अलर्ट मोड़ में आ गए. इसके बाद जैसे ही वह चोर एक नवजात के पास पहुंचा और बच्चे को उठाने वाला ही था, कि अस्पताल में तत्परता दिखाते हुए चोर को पकड़ लिया. इस वक्त चोर के पास कोई हथियार भी हो सकता था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने जान की परवाह किए उसे चारोओर से घेर लिया. और बच्चे को स्टाफ ने अपने कब्जे में ले लिया.

घूंघट में महिला नहीं, पुरुष चोर था

अस्पताल प्रशासन के चंगुल में आए चोर का जब घूंघट उठाकर देखा गया, तो वह कोई महिला नहीं पुरुष चोर था. इसके बाद भी स्टाफ ने जान पर खेलकर चोर को पकड़ लिया. हालांकि, जैसे ही पुलिस को सूचना दे लगे तो उसी वक्त वह हाथ छुड़ाकर, दीवार पर चढ़कर फरार हो गया. दरअसल, रात होने की वजह से वह कहां भाग गया पता ही नहीं चला. हालांकि, बाद पहुंची पुलिस ने मामले की छानबीन की, लेकिन चोर हाथ नहीं लगा था.

तंत्र-मंत्र साधना के लिए तो नहीं आया चोर?

तंत्र-मंत्र में पूर्णिमा की रात किसी पशु या नर बलि देने जैसी बातें भी प्रचलित हैं. इस तरह की घटना के बाद वहां इसी तरह की बातें हो रही थीं. खैर जो भी हो, अंत भला तो सब भला. अस्पताल की तत्परता काम आई और बच्चे की जान बच गई.

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