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Agri Tips: खरगोन के वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि खरपतवार गेहूं की जड़ों तक पहुंचने वाले पोषक तत्व को सोख लेते हैं. इनको हटाने के लिए किसान कीटनाशक डालते हैं, लेकिन इसी दौरान एक गड़बड़ी कर देते हैं, जो पूरी फसल तबाह कर सकती है. जानें ये जरूरी तथ्य…
Agri Tips: रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही खेतों में गेहूं की हरियाली नजर आने लगी है. लेकिन, इसी के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. खरपतवार तेजी से पनप रहे हैं, जो गेहूं की बढ़वार को रोककर उत्पादन में भारी कमी ला सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान दवा का छिड़काव तो करते हैं, लेकिन नोजल का गलत इस्तेमाल और पानी की गलत मात्रा से दवा का असर आधा हो जाता है. कई बार फसल पर विपरीत प्रभाव भी पड़ता है.
खरगोन में हर साल लगभग साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई होती है, जिसमें करीब 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसान गेहूं उगाते हैं. बुवाई के बाद किसान सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन में जुट जाते हैं, लेकिन फसल के साथ बढ़ने वाले खरपतवार उनकी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि खरपतवार गेहूं की जड़ों तक पहुंचने वाले पोषक तत्व को सोख लेते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ कमजोर पड़ जाती है और पैदावार पर सीधा असर पड़ता है.
खरपतवार नियंत्रण में नोजल का बड़ा रोल
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सबसे ज्यादा गलती किसान दवा छिड़कने वाली नोजल चुनने में करते हैं. खरपतवार नाशक दवाओं के लिए हमेशा फ्लैट फैन नोजल (कट नोजल) का ही उपयोग करना चाहिए. बाजार में ये नोजल आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन कई किसान लागत बचाने के चक्कर में कीटनाशक वाली नोजल से ही दवा छिड़क देते हैं. इससे दवा का फैलाव समान रूप से नहीं हो पाता और खरपतवार पूरी तरह नष्ट नहीं होते. इससे फसल कमजोर होती है और उत्पादन में गिरावट आती है.
कब करें दवा का छिड़काव?
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की फसल के साथ खरपतवार भी तेजी से बढ़ने लगती है. यदि सही समय पर सही तरीके से नियंत्रण कर लिया जाए तो उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है. अन्यथा 50 से 60 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है. बाजार में उपलब्ध उन्नत खरपतवार नाशक दवाओं में क्लोबेन फार्म 15% + मेटसल्फ्यूरॉन 1% प्रमुख है, जो वेस्टा नाम से भी मिलता है. इसे 400 ग्राम प्रति हेक्टेयर (160 ग्राम प्रति एकड़) की दर से उपयोग करना चाहिए.
दवा में पानी की मात्रा का रखें खास ध्यान
दवा का असर सही हो इसके लिए पानी की मात्रा बिल्कुल सटीक होनी चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक खरपतवार नाशी दवा के 160 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से 150 से 200 लीटर पानी अनिवार्य है, यानी एक एकड़ खेत में छिड़काव के लिए लगभग 12 टंकी पानी की जरूरत होती है. यदि पानी कम लिया जाता है तो दवा का असर घट जाता है और कई बार फसल पर विषैला प्रभाव भी पड़ सकता है. वहीं ज्यादा पानी लेने पर दवा का घोल इतना हल्का हो जाता है कि खरपतवार पर असर ही नहीं होता.
विशेषज्ञ की किसानों को विशेष सलाह
1. हमेशा फ्लैट फैन नोज़ल से ही छिड़काव करें.
2. हवा तेज हो तो दवा का छिड़काव बिल्कुल न करें.
3. दवा छिड़कते समय बैक पैक स्प्रेयर को छाती की ऊंचाई पर रखें.
4. छिड़काव के बाद 24 घंटे तक खेत में सिंचाई न करें.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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