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Sanchi Dugdh Samiti Opening process: भारत में श्वेत क्रांति के बाद दूध उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन प्रोसेसिंग और मार्केटिंग बड़ी चुनौती बन गई थी. ऐसे में सांची दुग्ध संघ जैसी संस्थाओं ने गांव-गांव में दुग्ध समितियां खोलकर किसानों को नई दिशा दी. अगर गांव में 100 लीटर सरप्लस दूध और 22 सदस्य मौजूद हैं, तो आसानी से सांची समिति खोली जा सकती है. इससे किसानों को सालभर दूध बेचने की सुविधा, सही दाम और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है. जानिए सांची दुग्ध समिति खोलने की पूरी प्रक्रिया और इससे होने वाले तगड़े फायदे.
Sanchi Dugdh Samiti Kaise Kholein: एक वक्त था जब भारत में दूध की भारी कमी थी. फिर आई श्वेत क्रांति और तस्वीर पूरी तरह बदल गई. दूध का उत्पादन तेजी से बढ़ा, लेकिन नई समस्या खड़ी हो गई प्रोसेसिंग और मार्केट तक पहुंच. ऐसे समय में Anand Milk Union Limited और Sanchi Dugdh Sangh जैसी संस्थाएं किसानों के लिए वरदान साबित हुईं.आज सांची की समितियां गांव-गांव तक पहुंच रही हैं, लेकिन किसान अब भी इससे अनजान हैं.
गांव में समिति, तो किसान की बल्ले-बल्ले
आमतौर पर गांवों में बड़े पशुपालक नहीं होते. कई किसान सिर्फ 2 से 3 लीटर दूध ही निकाल पाते हैं. इतना कम दूध शहर तक ले जाना मुश्किल और महंगा पड़ता है. कई बार दूध बिक नहीं पाता और खराब हो जाता है. लेकिन अगर गांव में ही सांची दुग्ध समिति बन जाए, तो किसान मिलकर दूध बेच सकते हैं. संघ खुद गांव से दूध उठाता है. इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बचता है और सही दाम भी मिलता है. सबसे बड़ी बात दूध की बर्बादी रुक जाती है और हर बूंद की कीमत मिलती है.
कैसे खोलें सांची दुग्ध समिति?
अगर कोई किसान या समूह समिति खोलना चाहता है, तो वह सांची दुग्ध संघ के जिला कार्यालय में संपर्क कर सकता है या अपने विकासखंड के सुपरवाइजर से मिल सकता है. सुपरवाइजर गांव में सर्वे करता है. इसमें देखा जाता है: गांव में कुल दूध उत्पादन कितना है. खपत के बाद कितना सरप्लस (अतिशेष) दूध बचता है. अगर गांव में कम से कम 100 लीटर सरप्लस दूध रोजाना उपलब्ध है, तो वहां समिति खोली जा सकती है.
कितने सदस्य जरूरी हैं?
दुग्ध समिति बनाने के लिए कम से कम 22 सदस्य होने चाहिए. इनमें से 33 प्रतिशत यानी कम से कम 8 महिलाएं होना जरूरी है. गांव में अलग से महिला दुग्ध समिति भी बनाई जा सकती है, जिससे महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिले.
सालभर आमदनी, साथ में और भी फायदे
सांची समिति से जुड़ने पर किसानों को दूध की बिक्री की चिंता नहीं रहती. सालभर दूध बिकता है और नियमित भुगतान मिलता है.
इसके अलावा:
शासन की अन्य योजनाओं का लाभ, पशुपालन को बढ़ावा, जैविक खेती के लिए गोबर की खाद, लघु और सीमांत किसानों की आय में बढ़ोतरी. कुल मिलाकर, सांची दुग्ध समिति छोटे किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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