विजन डॉक्यूमेंट में यह प्रस्ताव भी है कि यूजर्स को डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग तरीकों से होने वाले ट्रांजैक्शन को चालू या बंद करने की सुविधा दी जाए, ठीक वैसे ही जैसे कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए कंट्रोल उपलब्ध होते हैं. जैसे अभी डेबिट या क्रेडिट काड्र को ऐप के जरिए चालू या बंद किया जा सकता है. वैसी ही सुविधा UPI, नेट बैंकिंग जैसे सभी डिजिटल भुगतान मोड के लिए उपलब्ध कराई जाए. इससे ग्राहकों का अपने लेनदेन पर नियंत्रण बढ़ेगा और सुरक्षा भी बढ़ेगी.
धोखाधड़ी के जोखिमों से निपटने के लिए RBI एक ‘साझा जिम्मेदारी फ्रेमवर्क’ पर विचार कर रहा है, जिसके तहत अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन के मामलों में जारी करने वाला बैंक और लाभार्थी बैंक, दोनों ही जिम्मेदारी साझा करेंगे. यानी कि अब डिजिटल फ्रॉड के मामले में ग्राहक का बैंक अकेला जिम्मेदार नहीं होगा.
अन्य पहलों में ‘आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम’ (AePS) में व्हाइट-लेबल समाधानों की खोज करना, ‘ट्रेड रिसीवेबल्स ई-डिस्काउंटिंग सिस्टम’ (TReDS) में इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करना और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के माइग्रेशन को आसान बनाने के लिए ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस’ शुरू करना शामिल है.
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