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Fatty Liver: अगर आप मानते हैं कि आप हट्ठा-कट्ठा हैं और आपको लिवर की बीमारी नहीं होगी तो आप गलत है, हेल्दी दिखने वाले आदमी को भी फैटी लिवर डिजीज हो सकता है.
Fatty Liver: आमतौर पर यह धारणा रहती है कि जो लोग देखने में हट्ठे-कट्ठे रहते हैं उन्हें अंदर से कोई बीमारी नहीं होती. यह धारण पूरी तरह गलत है. अगर आप देखने में बेशक हेल्दी हो लेकिन कई बीमारियां अंदर पनप सकती है. आंकड़ों के मुताबिक 4 में से 1 वयस्क को किसी न किसी डिग्री का फैटी लिवर डिजीज है. इसलिए ऐसा समझने की भूल न करें. इंडियन एक्सप्रेस की खबर में एक 28 साल की महिला के बारे में बताया गया है कि वह बेहद हेल्दी थी लेकिन उसे हाई डिग्री वाला फैटी लिवर डिजीज था. उसका न तो वजन बढ़ा था और न ही पेट पर चर्बी थी लेकिन उसे खतरनाक तरह का फैटी लिवर था. उसका SGOT और SGPT का लेवल 600 से 700 U/L के बीच थे, जबकि सामान्य स्तर 7 से 56 U/L के बीच होते हैं.
नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज
क्या होता है फैटी लिवर डिजीज
फैटी लिवर डिजीज फैटी मेटाबोलिक डिसफंक्शन के कारण होता है. इसमें लिवर में जरूरत से कई गुना ज्यादा फैट जमा हो जाता है. फैटी मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर के भोजन को ऊर्जा में बदलने की सामान्य रासायनिक प्रक्रिया बिगड़ जाती है. इसकी वजह से शरीर में ज़रूरी तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है या फिर लिवर और पैंक्रियाज़ ठीक से काम करना बंद कर सकते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो कोई अंदरुनी बीमारी फैटी लिवर का कारण बन सकती है. अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो यह लिवर को कठोर बना सकती है, उसमें घाव या स्कार्स हो सकता है और आगे चलकर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है. सिरोसिस बेहद खतरनाक बीमारी है जिसे कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
फैटी लिवर डिजीज के लक्षण
फैटी लिवर डिजीज में अगर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज है तो इसमें शुरुआत में बिल्कुल पत नहीं चलता. कुछ मामलों में बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी रहती है. इसके साथ ही सुबह-सुबह दांत ब्रश करते समय थकान और सुस्ती होने लगती है. ऐसे मरीजों को ज़्यादा पसीना आता है और पैरों में सूजन होने लगती है. अगर बीमारी बढ़ी तो स्किन में खुजली होती है और पेट के पास सूजन बढ़ने लगती है. स्किन में स्पाइडर की तरह खून की नलियां दिखने लगेगी. स्किन का रंग भी पीला हो जाता है.
युवाओं में क्यों हो रहा फैटी लिवर
इंडियन एक्सप्रेस की खबर में आईएलबीएस के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनूप सराया कहते हैं कि हर दिन उनके क्लिनिक में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर के कई मरीज आते हैं, जिनमें ज्यादा युवा भी शामिल हैं. वे कहते हैं कि यह एक मेटाबॉलिक बीमारी है और इसका पैटर्न डायबिटीज जैसी अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों जैसा ही है. हैदराबाद में आईटी सेक्टर के 345 कर्मचारियों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार 84 प्रतिशत से अधिक में लिवर में चर्बी बढ़ी हुई पाई गई. यानी फैटी लिवर डिज़ीज़ के लक्षण. अध्ययन के मुताबिक 76.5 कर्मचारियों में एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) का स्तर ऊंचा था. वहीं 70.7 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त थे और 20.9 प्रतिशत में खाली पेट ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा था.डॉ. अनूप सराया कहते हैं कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का सबसे बड़ा कारण है अनहेल्दी लाइफस्टाइल. आजकल के युवा एक्सरसाइज पर ध्यान नहीं देते और अनाप-शनाप जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड खाते रहते हैं.
बीमारी को कैसे कंट्रोल किया जाए
डॉ. सराया कहते हैं कि यह स्थिति अब इतनी सामान्य हो गई है कि अगर लोगों की जांच ढंग से की जाए तो बहुतों में लिवर में अत्यधिक चर्बी मिल जाएगी. शुरुआत में कोई लक्षण न होने की वजह से अधिकांश को इसका पता ही नहीं चलता. अक्सर यह तब सामने आता है जब किसी अन्य कारण से टेस्ट कराए जाते हैं. लेकिन इस बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है. इसके लिए लाइफस्टाइल को सही करने की जरूरत है. इसके लिए आइसक्रीम, केक जैसे मीठे और तैलीय (डीप फ्राइड) खाद्य पदार्थों से बचना होगा. संतुलित आहार लें जिसमें मछली जैसी प्रोटीन, फल और सब्जियों से फाइबर, दालें, साबुत अनाज और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शामिल करें. हर दिन कम से कम 45 मिनट एक्सरसाइज ज़रूर करें. और सबसे महत्वपूर्ण वजन को कंट्रोल करें.
Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at News18. His role blends in-dep…और पढ़ें
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