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Groundnut Farming: कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी के साथ-साथ उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी है. अगर बुवाई के समय खाद की मात्रा संतुलित नहीं होगी, तो अंकुरण कमजोर रहेगा. कमजोर अंकुरण का सीधा असर पौधों की संख्या और आगे चलकर फलियों के विकास पर पड़ता है.
Agri Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन में कई किसान मूंगफली की खेती कर रहे हैं. यह फसल कम समय में अच्छी आमदनी देने वाली मानी जाती है, लेकिन सही तकनीक और संतुलित उर्वरक नहीं मिलने पर उत्पादन प्रभावित हो जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि मूंगफली की फसल में बवाई के समय की गई छोटी-सी लापरवाही आगे चलकर बड़े नुकसान का कारण बन सकती है. खासतौर पर उर्वरकों की मात्रा और सल्फर की पूर्ति पर किसानों को विशेष ध्यान देना चाहिए.
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी के साथ-साथ उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी है. अगर बुवाई के समय खाद की मात्रा संतुलित नहीं होगी, तो अंकुरण कमजोर रहेगा. कमजोर अंकुरण का सीधा असर पौधों की संख्या और आगे चलकर फलियों के विकास पर पड़ता है. ऐसे में किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि सिफारिश की गई मात्रा में ही उर्वरक डालें. चूंकि, जनवरी का महीना मूंगफली की खेती के लिए उपर्युक्त माना जाता है. बस थोड़ी सावधानी जरूरी है.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह बताते हैं कि मूंगफली की खेती करने वाले किसानों को रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए. बुवाई के समय प्रति एकड़ 8 किलोग्राम नत्रजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस, 8 किलोग्राम पोटाश और 8 किलोग्राम सल्फर देना जरूरी होता है. इससे पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है और आगे चलकर फलियां भरने में मदद मिलती है.
सल्फर की भूमिका सबसे अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, मूंगफली एक प्रमुख तिलहन फसल है और इसमें सल्फर की जरूरत सबसे ज्यादा होती है. कई किसान केवल नत्रजन और फास्फोरस पर ध्यान देते हैं, लेकिन सल्फर डालना भूल जाते हैं. यही वजह है कि खेतों में मूंगफली की फसल पीली पड़ने लगती है. सल्फर की कमी होने पर पौधों की ऊपरी पत्तियां हल्के पीले रंग की दिखाई देने लगती हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है.
सल्फर की कमी से कैसे बचें
सल्फर की पूर्ति के लिए किसानों को बुवाई के समय ही सही मात्रा में सल्फर देना चाहिए. विशेषज्ञ बताते हैं कि इसके लिए बेंजोनाइट सल्फर का उपयोग बेहतर रहता है. प्रति एकड़ 10 किलोग्राम बेंजोनाइट सल्फर डालने से फसल को पर्याप्त सल्फर मिल जाता है. इससे पत्तियों का रंग गहरा हरा बना रहता है और पौधों की सेहत अच्छी रहती है.
संतुलित पोषण से बढ़ेगी पैदावार
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि संतुलित पोषण मिलने पर मूंगफली के पौधे मजबूत बनते हैं. मजबूत पौधों में ज्यादा फूल आते हैं और फलियां भी अच्छी तरह विकसित होती हैं. अगर शुरुआत में ही पोषक तत्वों की कमी हो गई, तो बाद में इसकी भरपाई करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए किसान भाइयों को चाहिए कि वे बुआई से पहले मिट्टी की जांच करवा लें और उसी के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करें.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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