प्योंगयांग : उत्तर कोरिया और इस देश के तानाशाह किम जोंग उन के बारे में कई तरह की डरावने किस्से-कहानियां मशहूर हैं. इस देश में रहने वाले लोगों पर दुनिया भर की बंदिशें लगाई गई हैं, जिन्हें इसे तोड़ने वाले को जान गंवानी पड़ती है. हाल ही में कुछ ऐसा ही खौफनाक वाकया सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक टीनएजर बच्चों को किम जोंग उन ने मौत की सजा सुना दी, उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक बेहद पॉप्युलर थ्रिलर सीरीज देख ली. इन बच्चों ने एक दुनिया भर में मशहूर हो रहा म्यूजिक भी सुन लिया था.
कौन सी थ्रिलर सीरीज देख रहे थे लड़के?
एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें बताया गया है कि कैसे दक्षिण कोरियाई ड्रामा और म्यूजिक सुनने मात्र से स्कूली बच्चों तक को मौत के घाट उतार दिया जा रहा है. ये रिपोर्ट उन गवाहों की जुबानी है जिन्होंने मौत का यह तांडव अपनी आंखों से देखा है.
हाई स्कूल के छात्रों का सबके सामने किया ये हाल
किसी तरह से एक दिन ये खबर प्रशासन के कानों तक पहुंच गई. बस फिर क्या था इन बच्चों की ना उम्र देखी गई और ना ही इंसानियत दिखाई गई. दावा किया जा रहा है कि हाई स्कूल के छात्रों को सरेआम फांसी दे दी गई. 2021 में इस शो को बांटने वाले एक शख्स को भी मौत की सजा दी गई थी.
एमनेस्टी की रिपोर्ट बताती है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि वहां के युवाओं को डराने के लिए ऐसी सामूहिक हत्याएं आम हो चुकी हैं. गवाहों ने बताया कि वहां BTS जैसे बैंड्स को सुनना सबसे बड़ा अपराध माना जाता है. 2021 में प्योंगयांग के पास कुछ टीनएजर्स को सिर्फ इसलिए जांच के घेरे में ले लिया गया क्योंकि वो छिपकर दक्षिण कोरियाई संगीत सुन रहे थे. वहां की सरकार को डर है कि विदेशी संस्कृति उनके ‘वैचारिक किले’ को ढहा देगी.
क्या है Kim Jong Un का क्रूर नियम?
साल 2020 में किम जोंग-उन की सरकार ने ‘एंटी-रिएक्शनरी थॉट एंड कल्चर एक्ट’ लागू किया था. यह कानून इतना क्रूर है कि अगर आप दक्षिण कोरियाई फिल्म देखते पकड़े गए, तो 5 से 15 साल तक बंधुआ मजदूरी करनी होगी लेकिन अगर आपने इसे किसी और को दिखाया या ग्रुप में बैठकर देखा, तो सजा सिर्फ एक ही है- मौत.
40 साल की किम युनजू की आपबीती सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी. उन्होंने बताया कि जब वे महज 16-17 साल की थीं, तब उन्हें और उनके क्लासमेट्स को जबरन मैदान में ले जाया गया. वहां उन्हें सरेआम लोगों को मरते हुए देखना पड़ा. सरकार इसे ‘वैचारिक शिक्षा’ कहती है ताकि बच्चों के दिमाग में यह बैठ जाए कि नियम तोड़ने का अंजाम क्या होता है.
चोई सुबिन, जो 2019 में वहां से भागी थीं, बताती हैं कि सजा से बचने का एकमात्र तरीका पैसा है. जिनके पास $5,000 से $10,000 होते हैं, वे रिश्वत देकर बच जाते हैं. गरीब लोग अपने घर तक बेच देते हैं ताकि वे लेबर कैंप की यातनाओं से बच सकें. कानून सबके लिए एक है, लेकिन मौत सिर्फ गरीबों के हिस्से आती है.
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