इस घटना के सामने आने के बाद से पति के इस व्यवहार पर बहस शुरू हो गई है. कोई उसे फिटनेस फ्रीक तो कोई मेंटली सिक बता रहा है. हालांकि इस घटना पर मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं? आइए जानते हैं.
डॉ. सिंह कहते हैं कि इस केस में पति का व्यवहार सनकी या जुनूनी और आत्ममुग्धता (ऑब्सेसिव और नारसेसिस्टिक)का हो सकता है. ओसीपीडी यानि ऑब्सेसिव कम्प्रेसिव पर्सनेलिटी डिसऑर्डर से भी जोड़ सकते हैं. कभी-कभी ये पागलपन की हद तक हो सकता है. देखने में ऐसा व्यक्ति सामान्य दिखाई देता है लेकिन उसके व्यवहार से सिर्फ वो लोग पीड़ित होते हैं जो उससे नजदीकी से जुड़े होते हैं, फिर चाहे वे परिवार के लोग हों या वर्कप्लेस पर जूनियर्स हों.
. व्यक्ति अपने पार्टनर की बॉडी शेमिंग कर सकता है और उसकी आलोचना करके उसे अपने अनुसार बनाने की कोशिश करता है.
. पति अपनी पत्नी की बॉडी और उसके लुक को कंट्रोल करने की कोशिश करता है.
. पार्टनर का बात-बात पर विरोध करना भी इसमें शामिल है.
. रिलेशनशिप एब्यूज भी कर सकता है.
. पार्टनर को डिक्टेट करना या अपने इशारों पर चलाना हो सकता है. कि वह ऐसी दिखनी चाहिए, ऐसा उसका ड्रेस होना चाहिए, ऐसा फिगर होना चाहिए.
. यह व्यवहार ईगो से प्रेरित रहता है. यानि व्यक्ति को लगता है कि उसे हर जगह पूछा जाए, सब उसकी तारीफ करें. उसके पास जो भी है, उसकी चीजें या उसका पार्टनर ही क्यों न हो, उसकी तारीफ हो. सब उसकी बात सुनें.
. ऐसे व्यवहार वाला व्यक्ति अपनी निजी जरूरतों को लेकर पार्टनर का शोषण भी करता है.
पत्नी का व्यवहार भी हो सकता है जिम्मेदार
डॉ. कुलदीप कहते हैं कि इसका दूसरा पहलू ये भी है कि कुछ लोग फिटनेस के प्रति एकदम सुस्त होते हैं. अगर एक पार्टनर ज्यादा एक्टिव है और उनपर भी ऐसा करने का दवाब डालता है तो यहां भी मनमुटाव और क्लेश पैदा हो जाता है. कई बार लोग किसी पब्लिक फिगर को पॉइंट आउट करके ऐसे भी कहते हैं कि ये भी तो लड़की है, क्या फिगर बनाया है, तुम भी मेहनत करो, ऐसी बॉडी बनाओ, लेकिन एक ही बात को कई बार रिपीट करने पर संभव है कि वह दूसरे पार्टनर को खलने लगे या उसे ये महसूस हो कि उसके साथ ज्यादती हो रही है.
क्या होना चाहिए?
डॉ. कुलदीप कहते हैं कि पति-पत्नी के ऐसे मामलों में हमेशा दोनों पक्षों की काउंसलिंग होनी चाहिए और फिर पता लगाना चाहिए कि आखिर मसला क्या है. एक पक्ष की बात सुनकर कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है. संभव है कि यह मेंटल हेल्थ का इश्यू हो, एक पार्टनर के ऑब्सेशन का मामला हो या फिर दूसरे पार्टनर को बिहेवियरल इश्यूज हों.