मोटापा सिर्फ लुक्स नहीं, शरीर की गंभीर बीमारी
डॉक्टर्स आशीष गौतम बताते हैं कि मोटापा सिर्फ शरीर पर चर्बी जमा होना नहीं है. यह शरीर को ही भद्दा नहीं बनाता, बल्कि यह आपके दिल, लिवर, हार्मोन, ब्लड शुगर और यहां तक कि नींद और महिलाओं में मां बनने की क्षमता तक को प्रभावित करता है. एक रिसर्च बताती है कि सिर्फ मोटापे की वजह से शरीर में 200 तरह की बीमारियां हो सकती हैं. यहां तक कि मोटे लोगों को आमतौर पर होने वाली परेशानियां जैसे जोड़ों का दर्द, थकावट, सांस फूलना, उसी मोटापे की देन हो सकते हैं.
कई बार बहुत सारी एक्सरसाइज और कोशिशें करने के बाद भी वजन नहीं घटता है.
सर्जरी से हटाया जा सकता है मोटापा?
डॉ. कहते हैं कि योग, व्यायाम और डाइटिंग से अलग आजकल मोटे लोगों के लिए सर्जरी की प्रक्रिया भी उपलब्ध है. बैरिएट्रिक सर्जरी मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए एक स्ट्रक्चरल सपोर्ट होती है.
डॉ. आशीष कहते हैं कि बैरिएट्रिक सर्जरी कोई कॉस्मेटिक ऑपरेशन नहीं है बल्कि शरीर के सिस्टम को रीसेट करने वाली क्लिनिकल प्रक्रिया है. सर्जरी के बाद पेट छोटा हो जाता है और भूख कंट्रोल करने वाले हार्मोन (जैसे घ्रेलिन) का व्यवहार बदल जाता है. मतलब थोड़ा खाना ही काफी लगेगा, बार-बार कुछ खाने का मन नहीं करेगा और इंसुलिन बेहतर काम करेगा.
सर्जरी करवाना शॉर्टकट है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि सर्जरी वही करवाते हैं जो मेहनत से डरते हैं लेकिन असलियत ये है कि ऐसे मरीज़ पहले से ही जिम और डाइटिंग की लंबी लड़ाई हार चुके होते हैं. बैरिएट्रिक सर्जरी उनके लिए एक स्ट्रक्चरल सपोर्ट होती है, न कि शॉर्टकट.
यह सर्जरी उन लोगों के लिए है-
. जिनका BMI 35 या उससे ज़्यादा हो और साथ में डायबीटीज़, हाई BP जैसी बीमारियां हों.
. जिनका BMI 40 से ऊपर हो, भले कोई दूसरी बीमारी न हो.
. जिन्हें डाइट और एक्सरसाइज़ से कोई असर न हो रहा हो.
हालांकि हालिया कुछ स्टडीज बताती हैं कि BMI 27 से 30 तक के कुछ मरीज़ों को भी इससे फायदा हुआ है, खासकर डाइबिटीज़ कंट्रोल में.
मोटापा घटाने वाली बैरियाट्रिक सर्जरी के बाद लाइफस्टाइल को भी बदलना पड़ता है, ताकि वजन दोबारा न बढ़े.
डॉ. गौतम बताते हैं कि सर्जरी के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होता है कि इंसुलिन काम करने लगता है और ब्लड शुगर नियंत्रित हो जाता है. बहुत से मरीज़ सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद इंसुलिन लेना बंद कर देते हैं. वजन घटता है, एनर्जी बढ़ती है, नींद बेहतर होती है, और जोड़ों का दर्द भी घट जाता है.
आज की लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीक से सर्जरी छोटे छेदों से की जाती है. मरीज़ सर्जरी के दिन ही चलने लगते हैं और 2-3 दिन में घर जा सकते हैं. एक हफ्ते में फिर से सामान्य दिनचर्या में लौटना संभव है.
क्या ये विकल्प दवाओं से बेहतर है?
डॉ. के मुताबिक सेमाग्लूटाइड जैसी दवाएं भूख कम करती हैं, लेकिन असर तभी तक रहता है जब तक दवा चलती है.दवा बंद होते ही वजन लौट आता है और साइड इफेक्ट्स अलग होते हैं. जबकि बैरिएट्रिक सर्जरी शरीर के हार्मोनल सिस्टम को स्थायी रूप से बदलती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है.
नहीं हर किसी को यह ऑपरेशन नहीं कराना चाहिए. सही कैंडिडेट तय करने के लिए डॉक्टर BMI, मेडिकल हिस्ट्री, और लाइफस्टाइल को ध्यान में रखते हैं लेकिन अगर मोटापा आपकी रोजाना की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है, तो यह इलाज आपके लिए जरूरी हो सकता है.
इस सर्जरी की क्या कीमत है?
क्या इस सर्जरी के बाद भी मोटापा बढ़ सकता है?
सर्जरी के बाद सबसे जरूरी है सही खानपान और लाइफस्टाइल. अगर सर्जरी के बाद मरीज अपनी पुरानी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाता है तो फिर से वजन बढ़ सकता है. सर्जरी के बाद डॉ. की सलाह से जीवनशैली में बहुत से बदलाव करने होते हैं, ताकि वजन को फिर से बढ़ने से रोका जा सके.