Agency:एजेंसियां
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Ice made at room temperature: वैज्ञानिकों ने ‘Ice XXI’ नाम की नई बर्फ खोजी है, जो ठंड में नहीं बल्कि कमरे के तापमान पर बनती है. बेहद ज्यादा दबाव डालकर बनी ये बर्फ पानी के रहस्यों को समझने में नई दिशा दे रही है.
कैसे बनी ये नई बर्फ
आमतौर पर हम जानते हैं कि बर्फ तभी बनती है जब तापमान गिरता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इस बार बर्फ को ठंड से नहीं, बल्कि बेहद ज्यादा दबाव डालकर बनाया है. इस बर्फ को तैयार करने के लिए 2 गीगापास्कल (GPa) यानी करीब 20,000 गुना ज्यादा दबाव डाला गया.
इतना दबाव डालने के लिए वैज्ञानिकों ने ‘डायमंड ऐनविल सेल’ (Diamond Anvil Cell) नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें पानी की बेहद छोटी बूंद को दो हीरों के बीच रखा गया और उस पर कुछ ही मिलीसेकंड में जबरदस्त दबाव डाला गया.
दबाव डालने और फिर धीरे-धीरे छोड़ने की यह प्रक्रिया हजार से ज्यादा बार दोहराई गई. इसके बाद वैज्ञानिकों ने यूरोप की XFEL और PETRA III जैसी आधुनिक एक्स-रे मशीनों की मदद से हर माइक्रोसेकंड की तस्वीरें लीं. यानी, उन्होंने बर्फ बनने की पूरी प्रक्रिया को मानो कैमरे में “फिल्म” की तरह कैद कर लिया.
क्या खास है ‘Ice XXI’ में
‘Ice XXI’ बाकी बर्फ की तरह नहीं है. इसकी संरचना “tetragonal crystal” जैसी है, यानी इसके अणु बहुत घनी और सटीक तरीके से जुड़े रहते हैं. इसका मतलब यह बर्फ ‘metastable’ होती है- यानी सामान्य हालात में तो इसे पिघल जाना चाहिए, लेकिन यह कुछ समय तक वैसे ही बनी रहती है. यानी, वैज्ञानिकों ने एक ऐसी बर्फ बनाई है जो गर्म तापमान में भी कुछ देर टिक सकती है.
क्यों अहम है ये खोज
यह खोज सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि बर्फ कमरे के तापमान पर बनी, बल्कि इसलिए भी कि इसने पानी की “पहेली” के एक और रहस्य को सुलझाया है.
पानी, दिखने में भले साधारण लगे, लेकिन इसके 20 से ज्यादा अलग-अलग रूप हैं, जो अलग तापमान और दबाव पर बनते हैं. ‘Ice XXI’ यह दिखाती है कि अभी भी पानी के बारे में बहुत कुछ जानना बाकी है. इस खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रहों और उपग्रहों के अंदर बर्फ कैसे व्यवहार करती है- खासकर उन जगहों पर जहां दबाव बेहद ज्यादा होता है.
बर्फीले ग्रहों से जुड़ सकती है ये खोज
शनि का चांद टाइटन (Titan) और बृहस्पति का चांद गैनिमीड (Ganymede) जैसे कई बर्फीले चंद्रमा हैं, जिनके अंदर भी भारी दबाव में बनी बर्फ की परतें मौजूद हैं. ‘Ice XXI’ जैसी बर्फ यह समझने में मदद कर सकती है कि उन ग्रहों के भीतर क्या हो रहा है. इससे यह भी अंदाज़ा लगाया जा सकेगा कि क्या वहां जीवन जैसी परिस्थितियां संभव हैं या नहीं.
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