बंदूकों से कम नहीं इनका तीर-धनुष , खुद हाथों से करते हैं तैयार, MP, छत्तीसगढ़ में है खूब डिमांड

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Aadivasi Teer Kaman: आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं, जो आज भी अपने हाथों से तीर धनुष बनाने का काम करते हैं. हालांकि, तीर धनुष बनाने का काम इनके यहां पीढ़ियों से हो रहा है.  इनके धनुष बाण सिर्फ देखने के लिए नहीं होते बल्कि ये चलते भी हैं. कैसे बनाते हैं धनुष-बाण? क्या होती है कीमत?आईए जानते हैं

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छतरपुरः जब बंदूके नहीं चलती थी तो धनुष-बाण जैसे परंपरागत  हथियार से युद्ध लड़ा जाता था. लेकिन आधुनिक समय में ये हथियार विलुप्त होते गए. लेकिन झाबुआ के रहने वाले जोरू ताहेड़ आज भी आदिवासियों के पुराने पारंपरिक हथियार तीर-धनुष बनाते हैं. तीर धनुष बनाने का काम पीढ़ियों से चला रहा है और अब तीर कमान बनाने का जिम्मा जोरू कर रहे हैं. इनका मानना है कि लोग भले ही तीर कमान न चलाते हो लेकिन हमारा यह पीढ़ियों का काम है इसलिए आज भी हम तीर कमान बनाते हैं और सरकार हमें अलग-अलग जगह भेजती है. जिससे हमें कमाई भी हो जाती है और हमारी पुरानी कला भी जीवित है.

बनाते हैं तीर कमान

जोरू ताहेड़ बताते हैं कि वह झाबुआ जिले के रहने वाले हैं और पीढ़ियों से तीर-कमान बनाने का काम कर रहे हैं. हमारे पिताजी बनाते थे और हम भी धनुष बाण बनाते हैं.  ये तीर-कमान बांस से ही तैयार करते हैं. जोरु बताते हैं कि तीर धनुष बनाना हम आदिवासी लोगों की परंपरा का एक हिस्सा है. इस परंपरा को आज भी हमने जीवित कर रखा है. यह हमारी सुरक्षा का एक हथियार भी होता था. जिसे आज भी हम अपने हाथों से बनाते हैं. हाथों से जो ये धनुष-बाण बनाते हैं , ये सिर्फ शो पीस के लिए नहीं है यह चलते भी हैं . आप इसे चला सकते हैं.

एक धनुष-बाण में इतना कमाते मुनाफा

जोरू बताते हैं कि एक तीर-धनुष बनाने में डेढ़ सौ से 200 रुपए की लागत आती है. वहीं इसकी कीमत की बात करें तो 300 रुपए में एक तीर धनुष हम बेचते हैं. जिससे हमें एक धनुष-बाण में 100 रुपए का मुनाफा हो जाता है.  जॉन बताते हैं कि हमें सरकार खुद बुलाती है जहां भी आदिवासियों से संबंधित कार्यक्रम होते हैं वहां हमें बुलाया जाता है और सरकार हमें पैसा भी देती है. जोरू बताते हैं कि वह अपने तीर धनुष को मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर और छत्तीसगढ़ के रायपुर जैसे बड़े शहरों में भी बेच चुके हैं. सरकार द्वारा मुझे मध्यप्रदेश के बड़े शहरों के साथ ही दूसरे राज्यों में भी बुलाया जाता है.

क्या है धनुष-बाण की खासियत

जोरू बताते हैं कि यह जो तीर धनुष होता है इसमें खासियत होती है कि आप कितना भी प्रत्यंचा चढ़ाएं या खींचते चला जाए यह टूटता नहीं है. जबकि यह बांस का बना होता है. हालांकि, पूरा धनुष ही हम बांस से बनाते हैं. वहीं तीर की बात करें तो इसे सरकंडा और इंगोटा फल से बनाते हैं.अगर कोई हमारा धनुष बाण खरीदना है तो उसे बाण के साथ दो तीर साथ में दिए जाते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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बंदूकों से कम नहीं इनका तीर-धनुष , खुद हाथों से करते हैं तैयार

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