पाली. कहते हैं सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती और कई बार असफलता ही सबसे बड़ी सीख बन जाती है. राजस्थान के पाली जिले के निर्मल चौधरी ने इसे सच कर दिखाया. UPSC में असफल होने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय नया रास्ता चुना और अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया. एक ओर जहां उन्हें 35 लाख रुपए सालाना का आकर्षक पैकेज मिल रहा था, वहीं उन्होंने उसे छोड़कर ऊंटनी के दूध के क्षेत्र में काम शुरू किया.
UPSC में मिली असफलता, लेकिन हार नहीं मानी
राजस्थान के पाली जिले के रहने वाले निर्मल चौधरी का सपना कभी देश की सर्वोच्च सेवा (UPSC) में जाकर देश सेवा करने का था. उन्होंने एक नहीं, बल्कि तीन बार कड़ी मेहनत के साथ प्रयास किए. जब सफलता हाथ नहीं लगी, तो उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी ऊर्जा को उद्यमिता में लगाने का फैसला किया. बेंगलुरु के एलन करियर इंस्टीट्यूट में 35 लाख रुपये सालाना के पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर वे वापस मारवाड़ की मिट्टी में लौट आए.
₹2.5 करोड़ के निवेश से खड़ा किया साम्राज्य
ब्रिटेन की बड़ी कंपनी ने 22.5 करोड़ की फंडिंग दी
निर्मल चौधरी की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2024 में उनकी कंपनी ने 35 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया है. उनकी इस सफलता की गूंज सात समंदर पार तक पहुंची, जिसके चलते हाल ही में ब्रिटेन (UK) की एक बड़ी डेयरी कंपनी ने उन्हें 22.5 करोड़ की फंडिंग दी है. अब निर्मल का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 100 करोड़ के राजस्व के आंकड़े को छूना है.
पाली को बनाएंगे फूड प्रोसेसिंग का सिरमौर
खेती और पशुपालन से भी युवा बना सकते हैं अपना भविष्य
निर्मल चौधरी आज के युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नही है. वे कहते हैं कि युवाओं को केवल ऑफिस जॉब के पीछे नहीं भागना चाहिए. भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है और भविष्य एग्री-बिजनेस में ही है. उनका मूल मंत्र स्पष्ट है कि जो चीज आप खुद नहीं खा सकते, वो अपने ग्राहकों को कभी न खिलाएं. इसी गुणवत्ता के दम पर उन्होंने आज राजस्थान के छोटे से गांव को भारत के नक्शे पर एक नई पहचान दिला दी है.
सूखा बेल्ट नहीं, यह है ‘वाइट गोल्ड’ की खान
यूके से मिली फंडिंग से प्लांट को बनाएं पूरी तरह ऑटोमेटिक
‘मिल्क स्टेशन’ की गुणवत्ता और सफलता को देखते हुए हाल ही में इंग्लैंड (UK) से बड़ी फंडिंग प्राप्त हुई है. इस फंड का इस्तेमाल प्लांट को अत्याधुनिक और ऑटोमेशन तकनीक से लैस करने के लिए किया जाएगा. शुद्धता पर जोर देते हुए निर्मल ने कहा कि हर फूड यूनिट की अपनी इंटरनल लैब होनी चाहिए. उनका मूल मंत्र बेहद सरल और प्रभावशाली है कि जो आप खुद नहीं खा सकते, वह अपने कंज्यूमर को भी कभी न खिलाएं.
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