शिवपुरी में झिरना मंदिर विवाद में नया मोड़: वनकर्मियों ने SP ऑफिस में सौंपा ज्ञापन; फॉरेस्ट अफसरों पर दबाव और झूठी FIR के आरोप – Shivpuri News

शिवपुरी के झिरना मंदिर प्रकरण को लेकर वन विभाग में उठे विवाद ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया। गुरुवार को झिरना मंदिर के महंत ने ग्रामीणों के साथ मिलकर सतनबाड़ा थाना का घेराव कर रेंजर के पिता रिटायर्ड डीएसपी सुरेश सिंह सिकरवार पर एफआईआर दर्ज करवा थी।

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इसके बाद आज (शुक्रवार) जिले के वनकर्मियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने फॉरेस्ट अफसरों पर दबाव बनाने, परिजनों पर झूठी FIR दर्ज कराने और विभागीय कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप लगाए।

वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने कहा गया है कि वन विभाग के अमले को झूठे आरोपों में फंसाकर विभागीय कार्यों में बाधा डाली जा रही है, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा और भय का माहौल बन रहा है।

यह था मामला वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दिनांक 3 नवंबर 2025 को एक डंपर अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहा था, जिसे वन अमले ने पकड़कर नियमानुसार कार्रवाई की। इस दौरान जब्त की गई रेत को झिरना मंदिर के महंत कृष्णदास उर्फ कम्मा गुर्जर ने जबरन अपने मंदिर परिसर में खाली करवा लिया। वन अमले ने इस घटना का वीडियो साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड किया, जिसमें किसी भी प्रकार की अभद्रता या धार्मिक स्थल का अपमान नहीं दिखता।

बताया गया कि बाबा कृष्णदास और डंपर मालिक अमन पवैया आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति हैं। अमन पवैया पर पहले से वन अपराध दर्ज हैं, जबकि कृष्णदास उर्फ कम्मा गुर्जर पर IPC की धारा 302 के तहत मामला दर्ज हो चुका है और वे जेल भी जा चुके हैं। वनकर्मियों का आरोप है कि गुरुवार को बाबा कृष्णदास ने डंपर छुड़वाने के लिए राजनीतिक हस्तियों और बाहरी तत्वों के माध्यम से वन अमले पर दबाव बनाया।

उन्होंने भीड़ एकत्र कर थाना सतनबाड़ा का घेराव करवाया और सड़क जाम कराकर रेंजर सिकरवार के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन की मांग की और रेंजर सिकरवार के पिता रिटायर्ड डीएसपी सुरेश सिंह सिकरवार पर भी झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई, ताकि अमले को मानसिक रूप से दबाव में लाया जा सके।

धार्मिक भावना भड़काकर अवैध निर्माण को बढ़ावा वन विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक, झिरना मंदिर परिसर में हजारों की भीड़ जुटाकर धार्मिक भावना के नाम पर लोगों को भड़काया गया। इसका उद्देश्य वन विभाग पर दबाव बनाकर अवैध अतिक्रमण और निर्माण कार्यों को बढ़ावा देना था। महंत कृष्णदास पर आरोप है कि वे माधव टाइगर रिजर्व के कक्ष N-98 में निजी निर्माण कार्य कर रहे हैं, जो वन क्षेत्र का उल्लंघन है। इसके अलावा उनके भाई द्वारा करीब 100 से अधिक भैंसें मंदिर के नाम पर रखी गई हैं, जिन्हें संरक्षित क्षेत्र की भूमि पर चराया जा रहा है।

वनकर्मियों का कहना है कि जब विभागीय अमला इस पर रोक लगाता है, तो इसे “मंदिर की आस्था पर प्रहार” बताकर धार्मिक रंग दे दिया जाता है, जबकि यह वास्तव में निजी आर्थिक हित से जुड़ा मामला है।

ये रखी गई प्रमुख मांगें

  • बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं।
  • महंत कृष्णदास उर्फ कम्मा गुर्जर के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई हो।
  • वन अमले की सुरक्षा और स्वतंत्र कार्य निष्पादन हेतु स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।
  • बाबा कृष्णदास द्वारा कराई गई झूठी FIR निरस्त की जाए और उनके विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने की FIR दर्ज की जाए।

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