भोपाल में 11वीं की छात्रा से दरिंदगी मामले में नए खुलासे, पुलिस जुटा रही सबूत

भोपाल. कोहेफिजा इलाके में 11वीं की छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग केस में हो रहे नए खुलासों ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया है. इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं. मुख्य आरोपी ओसाफ अली खान (19) और उसके साथी माज खान की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी. आरोपियों ने ना केवल छात्रा की मासूमियत का फायदा उठाया, बल्कि उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का भी प्रयास किया. छात्रा को डराने-धमकाने के लिए बाकायदा वीडियो रिकॉर्ड किए गए, ताकि उसे समाज में बदनाम करने का डर दिखाकर उम्र भर के लिए चुप कराया जा सके. पुलिस को आशंका है कि इन आरोपियों ने कई लड़कियों के साथ ऐसा किया होगा.

पुलिस की रिमांड में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे छात्रा को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ देना चाहते थे कि वह उनके हर निर्देश को मानने के लिए विवश हो जाए. जांच में यह भी सामने आया है कि इस घृणित कार्य को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने लग्जरी कारों का इस्तेमाल किया था. आरोपियों ने पीड़िता को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की और इस दौरान माज खान ने बाहर खड़े होकर मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो बनाया. यह वीडियो बाद में ब्लैकमेलिंग का मुख्य हथियार बना. पीड़िता से करीब 40 हजार रुपये की मोटी रकम भी वसूली गई और जब छात्रा ने विरोध किया, तो उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया.

दरिंदों की जांच के लिए पुलिस ने बनाई एसआईटी 
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेक्सस में जिम संचालक माज खान की भूमिका सबसे संदिग्ध रही है, जिसने न केवल अपराध में साथ दिया बल्कि साक्ष्यों को मिटाने की भी कोशिश की. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने एसआईटी (SIT) का गठन किया है, जो अब डिजिटल साक्ष्यों और घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर केस को मजबूत कर रही है ताकि दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके. पुलिस ने बताया कि डिजिटल साक्ष्‍यों की जांच के बाद पता चलेगा कि ये लड़के किन-किन लड़कियों के संपर्क में थे? क्‍या इनकी परिचित लड़कियां इन लड़कों तक नई मासूम लड़कियों को पहुंचाने का काम करतीं थीं?

सुनियोजित साजिश और ब्लैकमेलिंग का खेल
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी ओसाफ अली खान और माज खान ने शाहपुरा इलाके के प्रसिद्ध स्‍कूल की छात्रा को फंसाने के लिए पहले से ही जाल बिछाया था.  लड़की तक पहुंचने के लिए एक अन्‍य लड़की की मदद ली गई. उस लड़की ने छात्रा से दोस्‍ती की और फिर उसे लड़कों से मिलवाया था.  पुलिस ने बताया कि वारदात के समय माज खान कार के बाहर खड़ा होकर निगरानी कर रहा था और खिड़की से मोबाइल के जरिए वीडियो बना रहा था. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर छात्रा को बार-बार डराकर गलत काम किया गया. आरोपी जानते थे कि छात्रा अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के डर से किसी को कुछ नहीं बताएगी. इसी का फायदा उठाकर उन्होंने न केवल उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया, बल्कि उसके परिवार की जमा पूंजी में से 40 हजार रुपये भी ऐंठ लिए.

धर्मांतरण का दबाव और मानसिक प्रताड़ना
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू धर्मांतरण के दबाव का है. आरोपियों ने छात्रा को वीडियो के जरिए इस कदर मजबूर कर दिया था कि वे उसे अपना धर्म छोड़ने के लिए कहने लगे थे. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे लगातार डराया जाता था कि यदि उसने उनकी बात नहीं मानी, तो उसका वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाएगा और उसके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा.

चार लग्जरी कारों का इस्तेमाल और साक्ष्य मिटाने की कोशिश
पुलिस जांच में पाया गया कि आरोपियों ने वारदात के लिए थार सहित चार अलग-अलग कारों का उपयोग किया था. इन कारों को भोपाल से बाहर छिपाने की कोशिश की गई थी, जिनमें से एक कार को पुलिस ने सीहोर जिले के एक गांव से बरामद कर लिया है. मुख्य आरोपी माज खान, जो एक जिम का संचालक है, उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए अपना मोबाइल राजस्थान में नष्ट करने का दावा किया है. हालांकि, एसआईटी अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डेटा रिकवर करने और मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है ताकि वह वीडियो बरामद किया जा सके जो इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सबूत है.

दरिंदों के दोस्‍तों से पूछताछ
एसीपी टीटीनगर अंकिता खातरकर के नेतृत्व में गठित चार सदस्यीय एसआईटी अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जो इस गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंच सकें. माज के दो करीबी दोस्तों से भी पूछताछ की जा रही है, जिन पर साजिश में शामिल होने का संदेह है. पुलिस सभी संभावित घटनास्थल और जप्त की गई कारों की फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि डीएनए प्रोफाइलिंग के जरिए कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए जा सकें.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *