नेपाल के संचार और सूचना मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने बताया कि सरकार ने दो दर्जन सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बार-बार अपनी कंपनियों को पंजीकृत करने के लिए सूचित किया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके कारण, उन्हें तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा.
प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
सरकार ने 28 अगस्त को रजिस्ट्रेशन लागू करने का एक और प्रयास किया. उसने सात दिन की समय सीमा जारी की जो बुधवार रात को समाप्त हो गई. नेपाली अधिकारियों ने इन कंपनियों को एक स्थानीय संपर्क व्यक्ति नियुक्त करने के लिए दबाव डाला है. इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने संसद में एक विधेयक पेश किया है जिसका उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को सही तरीके से प्रबंधित करना, जिम्मेदार और जवाबदेह बनाना है.
सरकार के अनुसार, दो हफ्ते पहले, नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया कि सभी ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों – चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, उनको एक सक्षम प्राधिकरण के साथ अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना चाहिए. यह निर्णय सरकार की कार्रवाई के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है.
सरकार के खिलाफ आलोचना
यह विधेयक, जो अभी तक संसद में अपनी बहस पूरी नहीं कर पाया है, व्यापक आलोचना का सामना कर रहा है. अधिकार समूहों का तर्क है कि यह सरकार द्वारा सेंसरशिप का एक उपकरण है, जिसका उद्देश्य विरोधियों को चुप कराना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना है. इसके विपरीत, सरकारी अधिकारी कहते हैं कि नया कानून सोशल मीडिया की निगरानी के लिए आवश्यक है और उपयोगकर्ताओं और प्लेटफार्म ऑपरेटरों को उनके द्वारा साझा की गई सामग्री के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराने के लिए जरूरी है.
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