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Sonic Weapon: अमेरिका ने जिस तरह से वेनेजुएला ऑपरेशन को अंजाम दिया, उससे पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. डोनाल्ड ट्रंप की अगुआई वाली अमेरिकी सरकार ने ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाले फॉर्मूले पर अमल करना शुरू कर दिया है. वेनेजुएला के बाद अब डेनमार्क के आधिपत्य वाले ग्रीनलैंड आइलैंड पर ट्रंप की नजरें टिकी हैं.
Sonic Weapon: फाइटर जेट, मिसाइल, बम जैसे वेपन सिस्टम के बारे में आम से लेकर खास तक जानते हैं, पर क्या आपको मालूम है कि अमेरिका ने वेनेजुएला ऑपरेशन के दौरान ऐसा हथियार इस्तेमाल किया जिससे वहां के सैनिक खौफ में आ गए. जी हां! अमेरिका ने वेनेजुएला में सोनिक वेपन (Sonic Weapon) का इस्तेमाल किया. इससे वेनेजुएला के सैनिकों के नाक से खून निकलने लगे और वे खून की उल्टियां भी करने लगे. इस तरह अमेरिका ने बिना किसी बम-गोले के वेनेजुएला की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. साथ ही बिना किसी ज्यादा खून-खराबे के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अरेस्ट कर लिया गया. अब सोनिक वेपन को लेकर पूरी दुनिया में हलचल है. साथ ही इसके तौर-तरीकों पर भी चर्चाएं गरम हो गई हैं. प्रत्यक्षदर्शियों ने सोनिक वेपन अटैक की खौफनाक कहानी बयान की है. इस वेपन के आगे टॉमहॉक और चीन की PL-15 मिसाइलें भी फेल हैं.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका ने इस ऑपरेशन के दौरान एक शक्तिशाली ‘सोनिक हथियार’ (ध्वनि आधारित हथियार – Soud Based Weapon) का इस्तेमाल किया, जिससे वेनेजुएला के सैनिकों की हालत बिगड़ गई. कथित तौर पर सैनिकों की नाक से खून बहने लगा, कुछ लोगों को खून की उल्टियां हुईं और वे जमीन पर गिर पड़े. यह दावा व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा एक इंटरव्यू के बाद चर्चा में आया. इंटरव्यू में एक नाम न बताए गए सुरक्षा गार्ड ने खुद को उस रात ड्यूटी पर बताया, जब अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला में कार्रवाई कर मादुरो को पकड़ा. लेविट ने पोस्ट में लिखा, ‘जो कर रहे हैं, रोकिए और इसे पढ़िए.’
| सोनिक वेपन क्या है? |
| सोनिक हथियारों के प्रकार | इंसानों पर प्रभाव | इस्तेमाल और विवाद |
| लॉन्ग-रेंज अकॉस्टिक डिवाइस (LRAD): ये बहुत तेज और एक दिशा में जाने वाली आवाज निकालने वाले स्पीकर होते हैं. इनसे बहुत दूर तक साफ़ आवाज या दर्द देने वाली तेज ध्वनि भेजी जा सकती है. | तुरंत असर: तेज दर्द, मिचली, भ्रम की स्थिति, कानों में दबाव महसूस होना, दिशा-भ्रम, कुछ समय के लिए सुनाई न देना, घबराहट और डर. | सैन्य/पुलिस उपयोग: भीड़ को नियंत्रित करने, समुद्री डकैती रोकने और बड़े स्तर पर सूचना देने के लिए. |
| अल्ट्रासोनिक डिवाइस: ये बहुत ऊंची फ़्रीक्वेंसी की आवाज निकालते हैं, जो ज्यादातर बच्चों और युवाओं (टीन्स/20 की उम्र) को परेशान या दर्दनाक लग सकती है. | गंभीर असर: कान के पर्दे का फटना, हमेशा के लिए सुनने की क्षमता को नुकसान और दिमाग/नसों पर बुरा असर (जैसा कि हवाना सिंड्रोम में देखा गया). | उदाहरण: नौसेना, सीमा सुरक्षा बल और पुलिस द्वारा उपयोग किया जाता है. हाल की रिपोर्टों में सर्बिया में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल के आरोप लगे हैं. |
| इन्फ्रासोनिक हथियार: ये बहुत कम फ़्रीक्वेंसी की आवाज का इस्तेमाल करते हैं. इससे शरीर के अंदर कंपन महसूस हो सकता है, मतली आ सकती है और व्यक्ति भ्रमित या असहज महसूस कर सकता है. | भीड़ पर प्रभाव: इससे लोगों में डर फैल सकता है और भगदड़ मच सकती है, जिससे चोटें लगने का खतरा बढ़ जाता है. | कानूनी स्थिति: इसके इस्तेमाल पर बहस होती है और यह देश-दर-देश अलग-अलग है; कई जगह यह लीगली ग्रे एरिया में आता है. |
खौफनाक दास्तान
‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरव्यू में सुरक्षा गार्ड ने बताया कि अचानक एक बेहद तेत ध्वनि तरंग महसूस हुई, जिससे सिर के अंदर विस्फोट जैसा दर्द हुआ. उसके अनुसार, ‘हम सबकी नाक से खून बहने लगा. कुछ लोग खून की उल्टी करने लगे. हम जमीन पर गिर गए और हिल भी नहीं पा रहे थे.’ सुक्षाकर्मी ने बताया कि इस आवाज के बाद वे खड़े तक नहीं हो सके. इस दावे को सबसे पहले कैलिफोर्निया स्थित संगठन ‘रीबिल्ड कैलिफोर्निया’ के उपाध्यक्ष माइक नेट्टर ने एक्स पर साझा किया था. उनका पोस्ट एक दिन में 1.5 करोड़ से अधिक बार देखा गया. नेट्टर ने कहा कि इस कथित सोनिक हथियार के इस्तेमाल से लैटिन अमेरिका में अचानक बदले राजनीतिक रुख को समझा जा सकता है. हालांकि, यह पूरा विवरण अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है. व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी के लिए मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया है. सुरक्षा गार्ड के अनुसार, कार्रवाई से ठीक पहले वेनेजुएला के सभी रडार सिस्टम अचानक बंद हो गए. इसके बाद आठ हेलिकॉप्टर आए और करीब 20 अमेरिकी सैनिक उतरे. गार्ड का दावा है कि ये सैनिक पहले कभी देखे गए किसी भी दुश्मन जैसे नहीं लग रहे थे. उसने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में सैकड़ों वेनेजुएलाई लोग मारे गए, हालांकि इस आंकड़े की पुष्टि नहीं है.
अमेरिकी अटैक में वेनेजुएला में व्यापक नुकसान हुआ. (फाइल फोटो/AP)
डोनाल्ड ट्रंप क्या बोले?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि यह ऑपरेशन अगस्त से योजना में था. इसमें पश्चिमी गोलार्ध के 20 ठिकानों से 150 विमान उड़ान पर थे. व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, पिछले महीने मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ने का फैसला हो चुका था, लेकिन मौसम अनुकूल होने का इंतजार किया गया. आखिरकार 3 जनवरी को कार्रवाई की गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीआईए के एजेंट जमीन पर मादुरो और फ्लोरेस की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे. दोनों हर रात अलग-अलग जगह सोते थे ताकि गिरफ्तारी से बच सकें. अमेरिकी सेना की विशेष इकाई डेल्टा फोर्स ने हेलिकॉप्टर के जरिए वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया. अमेरिकी विमानों और ड्रोन ने वेनेजुएला की वायु रक्षा को नष्ट किया और बिजली आपूर्ति काट दी.
इस तरह पकड़े गए मादुरो
बताया गया कि डेल्टा फोर्स के जवान 1:01 बजे मादुरो के परिसर में दाखिल हुए. मादुरो एक सुरक्षित कमरे में भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उन्हें पकड़ लिया गया. उन्हें और उनकी पत्नी को हेलिकॉप्टर से यूएसएस इवो जीमा युद्धपोत पर ले जाया गया. वेनेजुएला के अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन में 80 सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई. अमेरिका की ओर से कहा गया कि एक अमेरिकी सैनिक घायल हुआ, लेकिन कोई मौत नहीं हुई. मादुरो को न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े संघीय आरोप हैं. मादुरो ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि वे “युद्धबंदी” हैं. उनकी पत्नी ने भी आरोपों से इनकार किया है. दोनों को अगली सुनवाई तक हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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