न जहर, न पिंजरा…बस एक मशीन और चूहों की परमानेंट छुट्टी! बिहार के प्रोफेसर ने किया कमाल का आविष्कार

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Ultrasonic Rodent Repellent Device: मुजफ्फरपुर के प्रो.मनेन्द्र कुमार का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डंका बजा है. उन्होंने एक ऐसी अल्ट्रासोनिक एंड सेंट बेस्ड रॉडेंट डिटेरेंट डिवाइस विकसित की है. जिसे यूनाइटेड किंगडम में ‘ब्रिटिश पेटेंट’ मिला है. यह स्वदेशी और गैर-विषैली मशीन अल्ट्रासोनिक तरंगों के जरिए चूहों को बिना मारे 30 फीट की दूरी तक भगा देती है. जिससे घरों और गोदामों में रखा अनाज अब पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.

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मुजफ्फरपुरः अब घरों, गोदामों और अनाज भंडारण स्थलों में रखे अनाज को चूहों से होने वाले नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू), मुजफ्फरपुर के विज्ञान संकाय के पूर्व अध्यक्ष एवं जन्तु विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनेन्द्र कुमार ने चूहों से बचाव के लिए एक खास मशीन विकसित की है. जिसका डिजाइन पेटेंट यूनाइटेड किंगडम में पंजीकृत किया गया है. आइए जानते हैं इस मशीन की खासियत.

जानिए मशीन का नाम और खासियत
इस नवाचार का नाम ‘अल्ट्रासोनिक एंड सेंट बेस्ड रॉडेंट डिटेरेंट डिवाइस’ रखा गया है. यह उपकरण घरों, खेतों, गोदामों, खाद्य भंडारण स्थलों, वाहनों और विद्युत प्रणालियों को चूहों से होने वाले नुकसान से बचाने में सक्षम है. प्रो.मनेन्द्र कुमार के अनुसार चूहे आज एक गंभीर समस्या बन चुके हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर साल फसलों और संग्रहित अनाज को चूहों से लगभग 40 से 45 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है. इसके अलावा चूहे प्लेग, लेप्टोस्पाइरोसिस, सैलमोनेलोसिस और लासा फीवर जैसी खतरनाक बीमारियां भी फैलाते हैं.

सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है मशीन 
अब तक चूहों से बचाव के लिए जहर, रासायनिक स्प्रे और पिंजरों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. जो बच्चों, पालतू जानवरों और पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित होते हैं. इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह नई मशीन तैयार की गई है. जो पूरी तरह सुरक्षित, गैर-विषैला और पर्यावरण के अनुकूल है.

डिवाइस हाइब्रिड डुअल एक्शन सिस्टम पर आधारित
यह डिवाइस हाइब्रिड डुअल एक्शन सिस्टम पर आधारित है. इसमें 20 से 60 किलोहर्ट्ज तक की परिवर्तनीय आवृत्ति वाला अल्ट्रासोनिक एमिटर लगाया गया है. जिससे चूहे ध्वनि के अभ्यस्त नहीं हो पाते. साथ ही इसमें पैसिव इन्फ्रारेड मोशन सेंसर और माइक्रोकंट्रोलर आधारित प्रणाली है. जो चूहों की गतिविधि के अनुसार काम करती है. मशीन में पेपरमिंट और सिट्रोनेला जैसे प्राकृतिक आवश्यक तेलों की सुगंध माइक्रो डोज में छोड़ी जाती है. जिससे चूहे उस जगह से दूर भागने लगते हैं. यह ध्वनि इंसानों को सुनाई नहीं देती, लेकिन चूहों को बेहद असहज कर देती है.

20-30 फीट के दायरे में नहीं आते हैं चूहे
प्रो. मनेन्द्र कुमार ने बताया कि यह मशीन कम बिजली में चलती है. बैटरी या सोलर से भी संचालित हो सकती है. एक बार लगाने के बाद 20 से 30 फीट के दायरे में चूहे नहीं आते. यदि किसी कंपनी द्वारा इसका व्यावसायिक उत्पादन किया जाता है. तो इसकी अनुमानित कीमत 800 से 900 रुपये के बीच होगी. इस शोध में शोधार्थी स्वाती सुमन और सोनम कुमारी का योगदान रहा है. जबकि एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ब्रजकिशोर प्रसाद सिंह ने मार्गदर्शन किया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिवाइस चूहों के नियंत्रण के क्षेत्र में एक मानवीय और क्रांतिकारी समाधान साबित हो सकती है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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न जहर, न पिंजरा…बस एक मशीन और चूहों की परमानेंट छुट्टी!

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