Kauwakeni Bhaji Benefits : छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक चिकित्सा पद्धति में ऐसी कई वनोषधियां हैं, जिनका महत्व आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करता है. इन्हीं में से एक है कौआकेनी भाजी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ स्वादिष्ट भाजी के रूप में खाई जाती है, बल्कि आयुर्वेद में इसे बहुमूल्य औषधि के रूप में भी जाना जाता है. राजधानी रायपुर स्थित श्री नारायण प्रसाद अवस्थी शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह बताते हैं कि कौआकेनी भाजी का औषधीय गुण किसी भी महंगी दवा से कम नहीं है.
स्थानीय बोली में कौआकेनी है नाम
डॉ. सिंह राजेश के अनुसार, अक्सर कान में मवाद या पस निकलने की समस्या लोगों को परेशान करती है. यह संक्रमण इतना तकलीफदेह होता है कि जलन और असहनीय दर्द झेलना पड़ता है. ऐसे में कौआकेनी भाजी को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से मवाद और पस जल्दी सूखने लगते हैं. इससे जलन शांत होती है और संक्रमण भी नियंत्रित हो जाता है. यही कारण है कि स्थानीय बोली में इसे कौआकेनी कहा जाता है.
शरीर को ठंडक देने के लिए आदर्श
कौआकेनी भाजी का उपयोग सिर्फ बाहरी संक्रमणों में ही सीमित नहीं है, यह शरीर के भीतर भी चमत्कारी प्रभाव डालती है. यह भाजी शीतलता प्रदान करने वाली मानी जाती है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए आदर्श आहार है. इसके नियमित सेवन से एनीमिया यानी खून की कमी, पीलिया और लिवर से जुड़ी समस्याओं में आश्चर्यजनक लाभ देखा गया है.
हड्डियों के लिए फायदेमंद
इस भाजी की खासियत यह है कि यह नमी वाले इलाकों में अपने आप उगती है और इसके लिए किसी विशेष खेती की आवश्यकता नहीं पड़ती. यह भाजी हल्की चिपचिपी होती है, लेकिन यही चिपचिपापन हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है. कौआकेनी भाजी में मौजूद औषधीय तत्व शरीर में एंटी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और सेल डैमेज की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं.
कई महंगी दवाओं और सप्लीमेंट्स का प्राकृतिक विकल्प
ग्रामीण अंचलों में यह भाजी वर्षों से औषधीय परंपराओं का हिस्सा रही है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में इसके गुणों के प्रति जागरूकता की कमी है. आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कौआकेनी भाजी का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह कई महंगी दवाओं और सप्लीमेंट्स का प्राकृतिक विकल्प बन सकती है. छत्तीसगढ़ की माटी में उपजने वाली इस औषधीय भाजी की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है और आने वाले समय में यह वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती है.