गाजीपुर की नेहा राय पीसीएस में बनी नायब तहसीलदार, प्लान बी के बारे में छात्रों को दी नसीहत

गाजीपुरः ख्वाब UPSC का था, लेकिन हकीकत ने बनाया नायब तहसीलदार. गाजीपुर की नेहा राय की यह कहानी सिर्फ एक सफलता नहीं, बल्कि हारकर जीतने का वो प्लान-बी है जिसे हर अभ्यर्थी को समझना चाहिए. सेंट जॉन्स की गलियों से निकलकर JNU-BHU के गलियारों तक पहुँचने वाली नेहा ने साबित कर दिया कि अगर इरादे रियलिस्टिक हों, तो सफलता का रास्ता मिल ही जाता है.

व्यक्तित्व निर्माण में यूनीवर्सिटी का योगदान

नेहा की प्राथमिक शिक्षा गाजीपुर के सेंट जॉन्स स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय  से राजनीति विज्ञान  में स्नातक  किया. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  का रुख किया, जहाँ से उन्होंने इंटरनेशनल रिलेशंस में परास्नातक  की डिग्री हासिल की. वर्तमान में वे BHU से ही राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर रही हैं. नेहा बताती हैं कि उनके व्यक्तित्व निर्माण में BHU और JNU का बड़ा योगदान रहा है. जहाँ BHU ने उन्हें जड़ों से जोड़ा, वहीं JNU ने राष्ट्रीय और छात्र राजनीति के माध्यम से एक बड़ा एक्सपोज़र और वैचारिक स्पष्टता दी.

इंटरव्यू के दौरान नेहा ने एक बहुत ही व्यावहारिक बात कही. उन्होंने स्वीकार किया कि हर अभ्यर्थी की तरह उनका भी पहला सपना यूपीएससी ही था. उन्होंने दो प्रयास भी किए, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में सफलता नहीं मिल सकी. नेहा का मानना है कि तैयारी के दौरान समय के साथ रियलिस्टिक होना जरूरी है. उन्होंने कहा, जीवन में स्टेबिलिटी बहुत मायने रखती है. जब यूपीएससी में बात नहीं बनी, तो मैंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अपने सेकंड बेस्ट विकल्प के तौर पर चुना.

सेल्फ स्टडी से मिली सफलता

नेहा ने अपनी सफलता का श्रेय सेल्फ स्टडी को दिया है. उन्होंने अपनी पिछली असफलताओं का विश्लेषण किया और पाया कि पिछले वर्षों के प्रश्न को गहराई से हल न करने के कारण उनका प्रीलिम्स रुक रहा था.

इस कामयाबी का एक बड़ा श्रेय अपने दोस्त उज्जवल को देती हैं. तैयारी के कठिन दौर में उज्जवल ने न केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई, बल्कि प्रीलिम्स से लेकर मेन्स तक नेहा की तैयारी का निरंतर मूल्यांकन भी किया. क्या पढ़ना है, किन स्रोतों से बचना है और उत्तरों को कैसे बेहतर बनाना है उज्जवल के सटीक रिव्यू और फीडबैक ने नेहा की रणनीति को धार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों (IR) की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-2 में काफी मदद मिली.

छात्र राजनीति और ब्यूरोक्रेसी का तालमेल

JNU में छात्र राजनीति में सक्रिय रहीं नेहा का मानना है कि राजनीति और ब्यूरोक्रेसी कहीं न कहीं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं. उनके अनुसार, छात्र राजनीति के दौरान सीखी गई बातें और लोगों की समस्याओं को समझने का अनुभव प्रशासनिक कार्यों में भी मददगार साबित हो सकता है. हालांकि, वे यह भी मानती हैं कि कागजों पर दिखने वाली चुनौतियां जमीन पर उतरने के बाद काफी अलग और बड़ी होती हैं.

गाजीपुर और आसपास के जिलों के छात्रों को सलाह देते हुए नेहा ने कहा कि इस परीक्षा की प्रकृति ऐसी है कि यहां बाहर होने के चांसेस ज्यादा होते हैं, इसलिए हार मानना कभी विकल्प नहीं होना चाहिए. उनकी सबसे महत्वपूर्ण सलाह बैकअप प्लान को लेकर है. कहा कि सिर्फ परीक्षा के भरोसे खाली बैठे रहने से बेहतर है कि आप कोई डिग्री कोर्स या जॉब करते रहें. इससे एक सेंस ऑफ कॉन्फिडेंस आता है कि अगर प्रशासनिक परीक्षा में सफल नहीं हुए, तो भी आपके पास करियर का एक मजबूत विकल्प मौजूद है.

प्रशासनिक गलियारों में कदम रखने को तैयार नेहा का लक्ष्य स्पष्ट है. वे कहती हैं कि ट्रेनिंग के दौरान जो भी सिखाया जाएगा, वे उसका सख्ती से पालन करेंगी और एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जनता की सेवा करेंगी.

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