जरूरत की खबर- सर्दियों में ज्यादा खर्राटे क्यों आते हैं: हो सकते हैं ये कारण, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए 7 जरूरी सावधानियां

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39 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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सर्दियों में खर्राटे आना एक आम और मौसम बदलने से बढ़ने वाली समस्या है। ये नींद की क्वालिटी और हेल्थ दोनों को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (AASM) के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 24% महिलाएं और 40% पुरूष खर्राटे लेते हैं।

सर्दियों में ये समस्या और भी बढ़ जाती है क्योंकि इस मौसम में हवा आम तौर पर ज्यादा ड्राई होती है, जिससे नाक और गले में कंजेशन बढ़ सकता है।

इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

  • सर्दियों में खर्राटे की समस्या क्यों बढ़ जाती है?
  • किन बातों का ध्यान रखकर इनसे बच सकते हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. अनिमेष आर्य, डायरेक्टर, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली

सवाल- खर्राटे क्यों आते हैं? इसका वैज्ञानिक कारण क्या है?

जवाब- खर्राटे गले के पिछले हिस्से में मौजूद टिश्यू के हिलने और वाइब्रेशन की वजह से आते हैं। सोते समय मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं, जिससे एयरवे थोड़ा संकरा हो जाता है। जब इंसान सांस लेता और छोड़ता है, तो हवा इन ढीले टिश्यू को हिलाती है और इससे आवाज पैदा होती है। कुछ लोगों में गर्दन के अंदर मौजूद मांसपेशियों और टिश्यू का आकार और बनावट ऐसी होती है कि उन्हें अधिक खर्राटे आते हैं।

सवाल- किन वजहों से लोगों को ज्यादा खर्राटे आते हैं?

जवाब- खर्राटों के कई कारण हो सकते हैं, जो सांस की नली को संकरा कर देते हैं या गले की मांसपेशियों को ढीला कर देते हैं, जिससे सोते समय हवा का रास्ता रुकता है और खर्राटे बढ़ जाते हैं। ग्राफिक्स से उन कारणों के बारे में समझते हैं-

सवाल- सर्दियों में खर्राटों की समस्या क्यों बढ़ जाती है?

जवाब- सर्दियों में हवा ठंडी और बहुत ड्राई हो जाती है। जब हम ऐसी हवा सांस के जरिए अंदर लेते हैं, तो नाक और गले के अंदर की नमी जल्दी सूखने लगती है। सूखने पर ये टिश्यू सिकुड़ सकते हैं, उनमें जलन हो सकती है और उनमें थोड़ा इंफ्लेमेशन हो सकता हैं। इसी वजह से एयरवे यानी सांस की नली पहले से ज्यादा संकरी महसूस होती है। जब एयरवे संकरा हो जाता है और टिश्यू सूखे या इंफ्लेमेटेड होते हैं, तो सोते समय हवा उनके बीच से गुजरते हुए वाइब्रेशन पैदा करती है, जिससे खर्राटे बढ़ जाते हैं।

सवाल- किन्हें खर्राटे की समस्या ज्यादा होती है?

जवाब- नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा खर्राटे लेने की रिपोर्ट करते हैं। 42% पुरुष और 31% महिलाएं खर्राटे लेती हैं। (क्योंकि यह जानकारी लोग खुद बताते हैं और खर्राटों का आकलन सुनने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है, इसलिए ये आंकड़े अनुमानित हैं।) इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त लोगों और वृद्धों में ये समस्या ज्यादा होती है।

सवाल- खर्राटे आने पर क्या करें?

जवाब- अगर खर्राटे रोजमर्रा की नींद का हिस्सा बनते जा रहे हैं, तो कुछ आसान लेकिन जरूरी बदलाव मददगार हो सकते हैं। ग्राफिक से समझते हैं-

आइए इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं-

सोने की पोजिशन बदलें

पीठ के बल सोने से जीभ और सॉफ्ट पैलेट पीछे की ओर गिरकर रास्ता संकरा कर देते हैं। बाईं या दाईं करवट लेकर सोने से राहत मिल सकती है।

वजन कम करें

डॉक्टर अनिमेष आर्य के मुताबिक, गर्दन पर जमा फैट गले की अंदरूनी जगह को दबाता है, जिससे नींद में रास्ता और भी संकरा हो जाता है। इसलिए वजन कंट्रोल करें।

शराब छोड़ें

शराब और सिडेटिव दवाएं गले की मांसपेशियों को बहुत ढीला कर देती हैं। इसलिए शराब का सेवन ना करें।

डिनर जल्दी करें

देर रात खाना खाने से पेट भरा रहता है और लेटने पर उसका दबाव डायफ्राम पर पड़ता है। इसलिए सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले डिनर कर लेना बेहतर होता है।

हैवी डिनर न करें

बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना पचने में समय लेता है। इससे पेट में गैस, एसिड रिफ्लक्स और बेचैनी हो सकती है, जो नींद के दौरान सांस की नली को प्रभावित करती है और खर्राटों को बढ़ा सकती है। हल्का और आसानी से पचने वाला डिनर ज्यादा सुरक्षित रहता है।

स्लीप हाइजीन अपनाएं

बहुत ज्यादा थकान या लगातार कम नींद लेने से नींद बहुत गहरी हो जाती है और मांसपेशियां और ढीली पड़कर खर्राटे पैदा कर सकती हैं। इसलिए भरपूर नींद लें।

मुंह ढककर न सोएं

सोते समय मुंह या चेहरा ढकने से नाक के रास्ते हवा का फ्लो बाधित होता है। जिससे ज्यादा खर्राटे आते हैं। इसलिए मुंह ढककर ना सोएं।

तकिया बदलें

तकियों में मौजूद डस्ट माइट्स एलर्जी बढ़ाकर नाक बंद कर सकते हैं, जिससे खर्राटे होते हैं। बेडरूम और पिलो में जमा धूल भी इसका कारण हो सकती है।

सवाल- ठंड के मौसम में खर्राटों को रोकने के लिए क्या करें?

जवाब- ठंड में खर्राटों से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ग्राफिक्स से समझते हैं-

अब इन पॉइंटर्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं-

कमरे में नमी बनाए रखें

सर्दियों में हवा बहुत सूखी हो जाती है, जिससे नक और गले के टिश्यू सूखकर खर्राटे बढ़ा सकते हैं। इसलिए कमरे में हल्की नमी बनाए रखें।

नाक को नम रखें

नाक को नम रखने से सूखापन, जलन और रुकावट कम होती है, जिससे खर्राटे भी कम हो सकते हैं।

सोने से पहले भाप लें

भाप लेने से नाक और साइनस में जमा कफ ढीला हो जाता है। इससे नाक खुलती है और रात में सांस लेने में परेशानी घटती है।

धूल और एलर्जी ट्रिगर्स से बचें

धूल, पालतू जानवरों की डैंडर या धूल के कीड़े (डस्ट माइट्स) नाक में इंफ्लेमेशन और एलर्जी बढ़ाते हैं। इससे नाक बंद रहती है और खर्राटे आने लगते हैं। साफ-सफाई रखने से यह समस्या कम होती है।

नाक को ठंडी हवा से बचाएं

बहुत ठंडी हवा नाक की नलियों को सिकोड़ देती है और सांस लेने का रास्ता संकरा कर देती है। इसलिए बाहर जाते समय मफलर या स्कार्फ से नाक ढकें।

हाइड्रेटेड रहें

पर्याप्त पानी पीने से नाक और गला हाइड्रेटेड रहते हैं और सांस लेना सहज होता है और खर्राटे नहीं आते हैं।

सवाल- खर्राटे की समस्या क्या किसी गंभीर बीमारी का संकेत है?

जवाब- खर्राटे आमतौर पर हानिकारक नहीं होते, लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज, लगातार हों और नींद या दिनचर्या को प्रभावित करें, तो यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

सवाल- खर्राटे कब सेहत के लिए खतरा बनने लगते हैं?

जवाब- अगर सोते वक्त खर्राटे बार-बार और बहुत तेज आने लगें, सांस अटकने या हांफने जैसी आवाजें सुनाई दें और दिन में जरूरत से ज्यादा नींद, थकान या सिरदर्द बना रहे, तो यह सामान्य नहीं माना जाता। ग्राफिक से समझते हैं कौन सी स्थिति गंभीर होती है-

सही स्लीप हैबिट्स और लाइफस्टाइल पर ध्यान देकर ज्यादातर मामलों में राहत मिल सकती है। लेकिन चेतावनी वाले लक्षण दिखें तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि किसी गंभीर स्लीप डिसऑर्डर को रोका जा सके।

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