जरूरत की खबर- सर्दियों में मुंह ढककर सोना खतरनाक: 20% तक घटता ऑक्सीजन, हो सकते हैं 11 हेल्थ रिस्क, बता रहे हैं डॉक्टर

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20 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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सर्दियों में ठंड से बचने और गर्माहट बनाए रखने के लिए कई लोग सोते समय रजाई–कंबल से पूरा चेहरा ढक लेते हैं। यह आदत भले ही आरामदायक लगे, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह नींद और सांस दोनों के लिए नुकसानदेह है।

बेंगलुरू के स्पर्श हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शिवराज अज्जी करियप्पाला लक्ष्मण के मुताबिक, चेहरा ढककर सोने से ऑक्सीजन का स्तर 15–20% तक घट जाता है और फेफड़ों को ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी लगती है। इसका असर नींद की क्वालिटी पर पड़ता है, जिससे नींद बार-बार टूटती है। लंबे समय तक ऐसा करने से सुबह भारीपन, थकान, सिरदर्द और सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि सर्दियों में मुंह ढककर क्यों नहीं सोना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि-

  • इससे सेहत को क्या नुकसान होते हैं
  • किन लोगों के लिए मुंह ढककर सोना जानलेवा हो सकता है?

एक्सपर्ट: डॉ. शिवराज अज्जी करियप्पाला लक्ष्मण, पल्मोनोलॉजिस्ट, HOD- पल्मोनोलॉजी, स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरू

सवाल- लोग सर्दियों में चेहरा ढककर क्यों सोते हैं? जवाब- कई लोग सिर ढककर सोना इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह एक तरह की सुरक्षित, घिरी हुई जगह का एहसास देता है। कंबल का वजन और गर्माहट शरीर को शांत करते हैं, जिससे बेचैनी और चिंता कम होती है। साथ ही कंबल रोशनी और हल्की आवाजों को भी रोक देता है, जिससे दिमाग जल्दी रिलैक्स होता है और नींद गहरी आती है।

सवाल- मुंह ढककर सोने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- डॉक्टर बताते हैं कि चेहरा ढककर सोने पर कंबल के भीतर ताजी हवा का फ्लो काफी कम हो जाता है और हम अपनी ही छोड़ी हुई हवा दोबारा भीतर ले लेते हैं। इसका असर सुबह महसूस होता है। सुबह सिर भारी लगता है, शरीर थका हुआ रहता है और नींद तरोताजा नहीं होती।

सवाल- मुंह ढककर सोना क्यों रिस्की है?

जवाब- साइंटिफिक स्टडीज बताती हैं कि चेहरा ढककर सोना कई तरह की समस्याएं बढ़ा सकता है। यह आदत लंबे समय तक जारी रहे तो सांस लेने की क्षमता, नींद की गुणवत्ता और कुल मिलाकर सेहत पर नेगेटिव असर पड़ता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

ऑक्सीजन की कमी चेहरा और मुंह पूरी तरह कंबल में ढकने पर ताजी हवा का फ्लो कम हो जाता है। कंबल के अंदर ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है। इससे शरीर को जरूरत भर ऑक्सीजन नहीं मिलती और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है। नतीजतन दम घुटने जैसा एहसास, नींद टूटना और सुबह उठकर थकान महसूस होना जैसी परेशानियां होती हैं।

शरीर का तापमान बढ़ना और बेचैनी कंबल के अंदर चेहरा ढककर सोने से तापमान बढ़ जाता है, जबकि शरीर गहरी नींद के लिए हल्का ठंडा माहौल पसंद करता है। गर्मी बढ़ने से पसीना, बेचैनी और बार-बार करवटें आती हैं, जिससे नींद लगातार डिस्टर्ब होती है।

नींद की गुणवत्ता पर असर कम ऑक्सीजन, ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड और बढ़ती गर्मी, ये तीनों गहरी नींद में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। अगर नींद खराब होती रहे तो ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल, चिड़चिड़ापन, कम ऊर्जा और आगे चलकर सेहत से जुड़ी बड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

त्वचा संबंधी समस्याएं कंबल के अंदर बंद माहौल में लगातार पसीना आने से पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे पिंपल्स बढ़ सकते हैं। हवा न लगने से रैशेज, जलन और एक्जिमा जैसी समस्याएं भी उभर सकती हैं।

सांस की दिक्कतें

अस्थमा, स्लीप एप्निया या लगातार नाक बंद रहने वालों के लिए यह आदत और नुकसानदायक है। हवा का फ्लो रुकने पर सांस उथली हो जाती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

सवाल- किन लोगों के लिए मुंह ढककर सोना जानलेवा हो सकता है? जवाब- जिन लोगों को अस्थमा, स्लीप एप्निया या नाक बंद रहने की समस्या रहती है, उनके लिए यह आदत सांस रुकने जैसी गंभीर स्थिति भी बना सकती है। बच्चों, खासकर शिशुओं के लिए यह जानलेवा है और इसे सडेन इन्फेंट डेथ सिन्ड्रोम (SIDS) का बड़ा कारण माना जाता है।

सवाल- मुंह ढककर सोने की आदत कैसे छुड़ाएं?

जवाब- ठंड में कंबल से चेहरा ढककर सोने की आदत छोड़ना मुश्किल लग सकता है, लेकिन सही तरीके अपनाने पर इसे आसानी से बदला जा सकता है।

धीरे-धीरे आदत बदलें

चेहरा अचानक पूरी तरह खुला रखने की जगह शुरुआत में थोड़ा सा गैप या एयर-टनल रखें। कुछ दिनों में धीरे-धीरे कंबल को नीचे लाकर पहले नाक-मुंह और फिर पूरा चेहरा एक्सपोज करने की आदत डालें।

सोने से पहले सचेत पोजिशनिंग

नींद आने से पहले कंबल को कंधों के नीचे सेट करें और कमरे का तापमान आरामदायक रखें, ताकि नींद में खुद-ब-खुद चेहरा ढकने की जरूरत न पड़े।

सवाल- सर्दी में गर्म रहने के लिए चेहरा ढके बिना सोने के तरीके क्या हैं?

जवाब- सर्दियों की ठंड में आराम से सोने के लिए चेहरा ढकना जरूरी नहीं होता। सही तरह के कंबल, कमरे का आरामदायक तापमान और खुली सांस लेने वाली सोने की पोजिशन रात की नींद को ज्यादा सुरक्षित और सुकूनभरी बनाती है। जरूरत हो तो रोशनी रोकने के लिए आई मास्क का सहारा लिया जा सकता है और हवा की क्वालिटी ठीक करने के लिए एयर प्यूरीफायर मददगार होता है। बस इतना ध्यान रखें कि चेहरे पर कोई भारी या घुटन वाला कंबल न आए।

सवाल- मुंह खुला रखकर सोने से स्वास्थ्य को क्या फायदे होते हैं?

जवाब- सही तरह से सांस लेते हुए सोना न सिर्फ नींद की क्वालिटी को बेहतर बनाता है, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों पर सकारात्मक असर डालता है।

पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने से नींद गहरी और आरामदायक होती है, जिससे आप सुबह ज्यादा तरोताजा महसूस करते हैं। चेहरे पर पसीना और ऑयल जमा न होने से स्किन भी हेल्दी रहती है।

सवाल- मुंह ढककर सोने को लेकर क्या–क्या मिथ हैं?

जवाब- मुंह ढककर सोने को लेकर कई सारे मिथ हैं, जैसे–

मिथ 1- चेहरा ढककर सोना ही गर्म रहने का एकमात्र तरीका है।

सच्चाई- शरीर के बाकी हिस्से को ढककर और चेहरा खुला रखकर भी आप पूरी तरह गर्म रह सकते हैं। इसके लिए पूरे चेहरे को कंबल में दबाने की जरूरत नहीं होती।

मिथ 2- चेहरा ढकने से एलर्जी से बचाव होता है।

सच्चाई- कंबल थोड़ी देर के लिए एलर्जी ट्रिगर्स को कम कर सकता है, लेकिन वह धूल और एलर्जेंस को चेहरे के पास ही फंसा देता है, जिससे सांस से जुड़ी दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।

मिथ 3- अगर आप स्वस्थ हैं तो चेहरा ढककर सोना नुकसान नहीं करता।

सच्चाई- यह आदत स्वस्थ लोगों के लिए भी ठीक नहीं। इससे सांस लेने में बाधा, बेचैनी और नींद की गुणवत्ता में कमी हो सकती है।

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